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Видео добавленное пользователем “BUBBLES news”
हम सिर्फ 21 थे ! और वे 12  हज़ार (Battle of Saragarhi)
 
04:19
दोस्तों जो घटना में आज आपको सुनने जा रहा हूँ वो सुनने में किसी कहानी जैसी लगती है लेकिन ये कोई कहानी नही बल्कि सारागाढ़ी की लड़ाई एक सच्ची घटना है जब एक तरफ से 12 हजार अफगानी लूटेरो ने हमला बोला था तो उनसे मुकाबला करने के लिए वहां सिर्फ 21 सिख मौजूद थे और उसके बाद शुरू हुई थी दुनिया की सबसे महान लड़ाई घटना 1897 की है ! नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर स्टेट मेँ 12 हजार अफगानोँ ने हमला कर दिया ! वे गुलिस्तान और लोखार्ट के किलोँ पर कब्जा करना चाहते थे !इन किलो को महाराजा रणजीत सिंह ने बनवाया था ! इन किलो के पास सारागढी में एक सुरक्षा चौकी थी ! जंहा पर 36 वीं सिख रेजिमेंट के 21 जवान तैनात थे 36वीं सिख रेजिमेंट में सिर्फ साबत सुरत ( यानी वे सिक्ख जो केश धारी हों ) भर्ती किये जाते थे, ईशर सिँह के नेतृत्व मेँ तैनात इन 21 जवानोँ को पहले ही पता चल गया कि अफगानों की संख्या 12 हजार से ज्यादा है और वे सिर्फ 21 थे ऐसी सूरत में जिन्दा बचना नामुमकिन नहीं फिर भी इन जवानोँ ने लड़ने का फैसला लिया और 12 सितम्बर 1897 को सिखलैँड की धरती पर एक ऐसी लड़ाई हुयी जो दुनिया की पांच महानतम लड़ाइयोँ मेँ गिनी गई , बहार से कही मदद मिलने की कोई उम्मीद नही थी लांस नायक लाभ सिंह और भगवान सिंह ने गोली चलाना शुरू कर दिया ! हजारों की संख्या में आये अफगानों की गोली का पहला शिकार बनें भगवान सिंह,जो की मुख्य द्वार पर दुश्मन को रोक रहे थे ! उधर सिखों के हौंसले से,अफगानों के कैम्प में हडकंप मचा गया था,उन्हें ऐसा लगा मानो कोई बहुत बड़ी सेना अभी भी किले के अन्दर है ! उन्होंने किले पर कब्जा करने के लिए दीवार तोड़ने की असफल कोशिशें की ! हवलदार इशर सिंह बड़ी कुशलता से नेत्रत्व संभाले हुए थे सेकड़ो अफगानी उनकी गोलियों का शिकार बने लेकिन कुछ ही समय बाद उनकी गोलिया खत्म हो गई तभी उन्होंने अपनी टोली के साथ गरजते हुए “जो बोले सो निहाल,सत श्री अकाल” का नारा लगाया और दुश्मन पर निहत्थे ही झपट पड़े कहा जाता है के बिना किसी हथियार के सिर्फ हाथापाई मे उन्होंने 20 से अधिक पठानों को मौत के घात उतार दिया ! और उनकी बंदूके छीन कर अपने साथियों की तरफ उछाल दी तभी गुरमुख सिंह गरजते हुए बोले के ,”हम भले ही संख्या में कम हो ,पर अब हमारी हाँथों में 2-2 बंदूकें हो गयी हैं और हम आख़िरी साँस तक लड़ेंगे” और सभी सिक्ख भूखे शेरो की तरह अफगानी कुत्तो पर टूट पड़े अफगानों से लड़ते-लड़ते सुबह से रात हो गयी,और सभी 21 रणबाँकुरे शहीद हो गए ! लेकिन अपने जीते जी उन्होंने उस विशाल फ़ौज के आगे आत्मसमर्पण नहीं किया ! और 1400 अफानो को मौत के घाट उतर दिया अफगानियों को इस लड़ाई में भारी नुकसान सहना पडा लेकिन वे किले को फतह नहीं कर पाये ! सिख जवान आखिरी सांस तक लड़े और इन किले को बचा लिया ! जब ये खबर यूरोप पंहुची तो पूरी दुनिया उन सरदारों की बहादुरी के आगे सन्न रह गयी ! ब्रिटेन की संसद मेँ सभी ने खडा होकर इन 21 वीरों की बहादुरी को सलाम किया ! इन सभी को मरणोपरांत इंडियन आर्डर ऑफ़ मेरिट दिया गया ! जो आज के परमवीर चक्र के बराबर था ! पर अफ़सोस होता है कि जो बात हर भारतीय को पता होनी चाहिए, उसके बारे में कम लोग ही जानते है ! ये लडाई यूरोप के स्कूलोँ की किताबो मेँ पढाई जाती है पर हमारे यंहा लोग इस बारे में जानते तक नहीँ !
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दस सालो तक जंजीर से बांध कर रखा गया , देखिये आखिर कैसे मिली आज़ादी !
 
06:57
दोस्तों क्या आपको जानवर पसंद है वैसे हम में से ज्यादतर लोगो को जानवर पसंद होते है खासकर के कुत्ता कुत्ता एक ऐसा जानवर है जिसका रिश्ता इंसानों के साथ सबसे पुराना और सबसे करीबी रहा है प्राचीन काल से ही इंसानों ने इस जानवर को पालना शुरू कर दिया था और कुत्ता भी पूरी मेहनत से इंसानों की शिकार में मदद किया करता था आज भी कुत्ते इंसानों के घर में चौकीदार के रूप में तैनात मिलते है , सिर्फ इतना ही नही बल्कि पूरी दुनिया में कुत्तो को इस्तेमाल पुलिस और फौज द्वारा किया जाता है , कुत्तो ने कई खूंखार अपराधियों को पकडवाने के साथ साथ कई बोम्ब्स को खोजने में पुलिस की बहुत मदद भी की है ये जीव बड़ी सिद्दत से बगैर किसी तनख्वाह के पूरी इमानदारी से अपना काम करता आया है इसीलिए कुत्तो को इन्सान सबसे अच्चा दोस्त और सबसे वफादार जानवर भी माना जाता है music credit - Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/
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अगर हमें भगवान ने बनाया तो फिर भगवान को किसने बनाया !
 
09:15
दोस्तों विज्ञानं कहता है ,ब्रम्हांड या जीवन का निर्माण ( Creation ) स्वत : यानी अपने आप हुआ है। मतलब अगर विज्ञानं की मानी जाये तो सृष्टि या ब्रम्हांड के निर्माण में भगवान् की कोई भूमिका नहीं है। असल में भगवान् है या नही ये एक ऐसी बहस है जिसका कोई अंत नही है ना ही भगवान् को प्रमाणित किया जा सकता है और न ही गलत साबित किया जा सकता है, ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright. credit (movie clip) - morn1415 (please subscribe to this channel) https://www.youtube.com/watch?v=GoW8Tf7hTGA&t=102s credit (music) - Martin Carlberg https://www.youtube.com/watch?v=KgtEA5UUefI
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How to survive in a nuclear Attack परमाणु बम हमले से कैसे बचे !
 
07:21
In this video, I tell about how to survive in a nuclear attack! These tips can help save your life if you ever find yourself in this situation. Places On Earth Where You Not Allowed - https://www.youtube.com/edit?o=U&video_id=FbEaU1M0ryQ When will be end of the world - https://www.youtube.com/edit?o=U&video_id=-3jiDUVblB8
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भुला दिया गया इस महान क्रन्तिकारी को !
 
06:32
दोस्तों शेर अली अफरीदी एक ऐसे क्रांतिकारी थे जिनका इतिहास की किताबो में शायद ही कहीं आपको जिक्र मिले ना ही इनकी याद में कोई जयंती मनाता है और न ही देश के क्रांतिकारीयो या देशभक्तों की सूची में उनका कोई नाम है जिस अंग्रेज अधिकारी की हत्या करने की योजना कई सारे क्रांतिकारी संघठन बना रहे थे लेकिन कामयाब नही हो रहे थे उस काम को शेर अली अफरीदी ने अकेले ही कर दिखाया था असल में उन्होंने अंग्रेज गवर्नर जनरल लोर्ड मेयो की हत्या कर दी थी ये काम कितना मुश्किल था इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है के वर्तमान भारत में जो हैसियत प्रधानमंत्री की होती है वाही हैसियत अंग्रेजी राज में गवर्नर जनरल की होती थी शेर अली पेशावर के अंग्रेजी कमिश्नर के ऑफिस में काम करते थे वे खैबर पख्तून इलाके के रहने वाले पठान थे शुरुआत में उन्हें अंग्रेजी शाशन बुरा नही लगता था देश और देश भक्ति क्या होती है इसके बारे में वो ज्याद नही सोचते थे लेकिन एक घटना ने उनके सोचने का नजरिया ही बदल दिया असल में एक झगडे में उनके उपर कत्ल का झूठा इल्जाम लगा दिया गया उसने अपने आप को कोर्ट में बेगुनाह साबित करने की जी जान से कोशिश के लेकिन उन दिनों अंग्रेजी सरकार में रंगभेद का बहुत बोलबाला था गौरे अफसर हम काले हिनुस्तानियो की बात भी नही सुनती थी बस ऐसा ही कुछ भेदभाव शेर अली के साथ भी हुआ अंग्रेजो ने बिना उनकी बात सुने सन 1867 उन्हें उमेर्कैद की सजा सुना दी और उन्हें सजा काटने काला पानी यानि अंडमान निकोबार भेज दिया गया वहां उनकी मुलाकात कई सारे सजा काट रहे क्रांतिकारियों से हुई जिसकी वजह से अंग्रेज विरोधी भावनाए मजबूत होने लगी छोटे से छोटे अंग्रेजी सैनिक को बडे से बड़े जुर्म के वाबजूद कोई सजा नहीं दी जाती थी, और उसे काला पानी भेज दिया गया था तिल तिल कर मरने के लिए। उन्होंने तय कर लिया था कि उसे दो व्यक्तियों की हत्या करनी है एक वो जो उनका सुप्रिडेंटेंट था और दूसरा अंग्रेजी राज के गवर्नर की। जेल में उसके अच्छे व्यवहार की वजह से 1871 में उसे पोर्ट ब्लेयर पर नाई का काम करने की इजाजत दे दी गई, यह एक तरह की ओपन जेल थी वहां से भागने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता था। और कोई भाग कर जा भी कहाँ सकता है क्योकि चारो और सिर्फ समुद्र ही था सन 1871 में शेर अली को अपने मकसद को पूरा करने को मौका मिल ही गया हुआ ये के गवर्नर लोर्ड मेयो ने अचानक जेल का दौरा करने का फैसला किया वो जेल में आ धमके और कैदियों का हाल चाल जानने लगे उनका कोर सिक्योरिटी दस्ता जिसमें 12 सिक्योरिटी ऑफिसर शामिल थे, वो भी साथ साथ चल रहे थे। इधर शेर अली अफरीदी ने उस दिन तय कर लिया था कि आज अपना मिशन पूरा करना है, जिस काम के लिए वो सालों से इंतजार कर रहा था, वो मौका आज उसे मिल गया है और शायद सालों तक दोबारा नहीं मिलना है। वो खुद क्योंकि अंग्रेजो के सिक्योरिटी दस्ते का सदस्य रह चुका था, इसलिए बेहतर जानता था कि वो कहां चूक करते हैं और कहां लापरवाह हो जाते हैं। हथियार उसके पास था नही, इसीलिए इस काम के लिए उसने नाई वाला उस्तरा ही इस्तेमाल करने की सोची । आप सिर्फ अंदाज़ा लगा के देखिये की एक तरफ बन्दूको से लैस 12 सैनिक जो गवर्नर की रक्षा कर रहे थे और दूसरी तरफ एक अकेला आदमी जिसके पास हथियार के नाम पे सिर्फ एक उस्तरा था लेकिन शेर अली सिर्फ नाम का ही नहीं बल्कि देल से भी शेर था जेल से बाहर निकल के गवर्नर जैसे ही अपनी समुंदरी बोट के तरफ बढ़ा, उसका सिक्योरिटी दस्ता थोड़ा बेफिक्र हो गया कि चलो पूरा दिन ठीकठाक गुजर गया। वैसे भी वायसराय तक पहुंचने की हिम्मत कौन कर सकता है, जैसे कि आजके पीएम की सिक्योरिटी बेधने की कौन सोचेगा! लेकिन उनकी यही बेफिक्री उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल हो गई। पोर्ट पर अंधेरा था, उस वक्त रोशनी के इंतजामात बहुत अच्छे नहीं होते थे। तभी बिजली की तरह एक साया गवर्नर की तरफ झपटा, जब तक खुद गवर्नर या सिक्योरिटी दस्ते के लोग कुछ समझते तब तक सारी बोट खून से सरोबर हो चुकी थी मौके पर ही गवर्नर की मौत हो गई हलाकि शेर अली को उसी समय ही पकड़ लिया गया, लेकिन पूरे ब्रिटिश साम्राज्य में दहशत फैल गई। लंदन तक बात पहुंची तो हर कोई स्तब्ध रह गया। जब एक गवर्नर के साथ ये हो सकता है तो कोई भी अंग्रेज हिंदुस्तान में खुद को सुरक्षित नहीं मान सकता। शेर अली अफरीदी से जमकर पूछताछ की गई, लेकिन हर सवाल के जवाब में वो एक ही बात कहते थे , “ मुझे अल्लाह ने ऐसा करने का हुक्म दिया है, मैंने अल्लाह की मर्जी पूरी की है ”। - जेल में उसकी सेल के साथियों से भी पूछताछ की गई, एक कैदी ने बताया कि शेर अली अफरीदी कहता था कि अंग्रेज देश से तभी भागेंगे जब उनके सबसे बड़े अधिकारी को मारा जाएगा और गवर्नर वायसराय ही सबसे बड़ा अंग्रेज अधिकारी था। उसकी हत्या के बाद वाकई अंग्रेज बहुत खौफ में आ गए थे । इसीलिए उन्होंने इस खबर को जायदा फैलने नही दीया और शेर अली अफरीदी को चुपचाप फांसी पर लटका दिया गया।
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आखिर उस रात को हुआ क्या था ? What was happened with RMS TITANIC ?
 
09:30
14 अप्रैल, 1 912 को रात 11 बजके 40 मिनट पर एक घोषणा हुई के अटलांटिक महासागर में आरएमएस टाइटैनिक के साथ एक भीषण दुर्घटना हुई है और इसी दुर्घटना के कारण ही लगभग तीन घंटे बाद 15 अप्रैल 1912 की सुबह 2 बजकर 20 मिनट पर दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री जहाज ठंडे बर्फीले पानी की सतह की निचे पूरी तरह से गायब हो गया और टाइटेनिक अकेला नही डूबा बल्कि अपने साथ 1500 जिंदगियो को भी ले डूबा music credit - Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/ ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright.
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पांच सवाल जो विज्ञान को खामोश कर देते है !
 
08:27
दोस्तों ये कहना सच होगा के हम इंसानों ने हमरी दुनिया का जादुई दुनिया बना दिया है आज हवाई जहाजो से की मदद से हम आसमान में बिना परो के उड़ सकते है सिर्फ इतना ही नही बल्कि हम अन्तरिक्ष तक पहुँच रखते है जहाँ पर हमरी प्रथ्वी का गुरुतुअक्र्ष्ण बल तक ख़त्म हो जाता है , aircondintior और फ्रीज़ की मदद से हमने मौसम पर काबू पाना भी सिख लिया है हम सूर्य की गैरमौजूदगी में भी रात का अपने घर को रोशन रखते है समुन्द्र में कई सौ मीटर की गहराइयो तक मछलियों की भांति गोता लगा सकते है लेकिन दोस्तों फिर भी हमारी दुनिया में ऐसी बहुत सी साधरण सी चीजे या घटनाये मौजूद है जिन्हें हम आज तक समझ नही पाए तो दोस्तों हमारे शारीर से लेकर हमरी प्रथ्वी तक में होने वाली ऐसी ही पांच घटित होने वाली घटनाओ के बारे में मैं आपको बताने जा रहा हूँ जिन्हें विज्ञानं आज तक नही समझ पाया music credit - "Infinite Perspective" Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/ ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of an such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright.
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घर में घुसकर, ठोका था अंग्रेज को ! !
 
04:54
दोस्तों हमारी धरती माँ की कोख से कई सारे ऐसे क्रांतिकारियों ने जन्म लिया और और बलिदान दिया है जिन्हें आज हम भुला चुके है उनका जिक्र किताबो में शायद ही कहीं आपको मिले क्योंकि किताबो के सारे पन्ने तो महात्मा गाँधी और जवाहर लाल नेहरु की तारीफों से ही भर दिए गए थे तो ऐसे में देश की आज़ादी के लिए जान देने वाले इन क्रांतिकारियों को भला कहाँ किताबो में जगह मिल पाती तो दोस्तों ऐसी ही तीन महान क्रांतिकारियों से मैं आपको रूबरू करवाता है नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 1928 में एक ग्रुप बनाया था जिसका नाम बंगाल वॉलंटीयर्स रखा गया था , उससे तीन नौजवान जुड़े जिनके नाम थे बिनॉय बसु, बादल गुप्ता और दिनेश गुप्ता। ये ग्रुप बहुत तेजी से सक्रिय होने लगा और थोड़े ही समय बाद क्रांतिकारियों के गुस्से के इजहार करने का प्लेटफॉर्म बन गया था । इस ग्रुप मे रोज चर्चा होती थी कि कौन सा ब्रिटिश अफसर भारतीयों के साथ बुरा बर्ताव करता है, उनकी लिस्ट बनाई जाय और एक-एक करके सबको सबक सिखाया जाए। इस लिस्ट में सबसे बड़ा निशाना बना कर्नल एन एस सिंपसन। सिंपसन बंगाल की जेल का आईजी था , वो जेल में भारतीय कैदियों को यातनाएं देने के लिए कुख्यात था, जब राजनीतिक कैदी भी उसका शिकार बने तो इन क्रांतिकारियों ने ठान लिया कि इस आई जी को सबक सिखाना बहुत जरूरी है। सिंपसन नस्लवादी मानसिकता का था। उसको भारतीयों से घृणा की हद तक चिढ़ थी, भारतीय होना उसके लिए मानो कोई गाली थी। सभी क्रांतिकारी उसे सबक सिखाने पर एकमत थे।और इसकी जिम्मेदारी ली इन तीन युवाओ , बिनॉय-बादल और दिनेश ने। उस वक्त कोलकाता के डलहौजी स्क्वायर पर राइटर्स बिल्डिंग अंग्रीजी सत्ता का केंद्र थी, सारे बड़े अधिकारी वहीं बैठते थे। योजना बनी कि सिम्पसन को वहीं घुसकर मारा जाए, ताकि सबसे सेफ जोन में मारने से बाकी अधिकारियों में आतंक फैल जाए। 8 दिसंबर 1930 का दिन था, तीनों ने यूरोपीय ढंग के कपड़े पहने ताकि पहचाने ना जा सकें। सिंपसन को जरा सा भी अनुमान नहीं था कि कोई यहां भी घुसकर उस पर हमला कर सकता है, वो सिक्योरिटी को लेकर लापरवाह था। तभी इन तीनों क्रांतिकारियों ने अचानक से उसके सामने आकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाना शुरू कर दिया, सिम्पसन वहीँ ढेर हो गया कई और अंग्रेज अधिकारियों को भी गोली लगी। लेकिन वहां से भागना आसान नहीं था , गोलियों की आवाज से भगदड़ मच गई और सिक्योरिटी स्टाफ फौरन हरकत में आया। दोनों तरफ से गोलियां चलने लगीं। भारत माता की तीनों शेर खुद को गिरफ्तार करवाना नहीं चाहते थे, खुद को घिरता देखकर बादल गुप्ता ने पोटेशियम साइनाइड खा लिया तो बिनॉय बसु और दिनेश गुप्ता ने अपनी ही रिवॉल्वर से खुद को शूट कर लिया। पोटेशियम साइनाइड खा चुके बादल की कुछ ही समय में मौत हो गई लेकिन बिनॉय बसु और दिनेश गुप्ता में जान अभी बाकी थी, उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया। बिनॉय बसु पांच दिन के बाद यानी 13 दिसंबर को दुनिया से विदा हो गए। जबकि दिनेश गुप्ता को अंग्रेजों ने बचा लिया और ट्रायल के बाद उसे फांसी दे दी गई । उस वक्त दिनेश महज 19 साल के थे। लेकिन जिस जज ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई थी, उस जज को दिनेश के क्रांतिकारी साथी कन्हाई लाल भट्टाचार्य ने बाद में गोली से उड़कर दिनेश की मौत का बदला ले लिया था। इस घटना के बाद अंग्रेज सरकार हैरान रह गई थी , ना केवल राइटर्स बिल्डिंग में घुसकर इतने बड़े अधिकारी की हत्या करने के उनके दुस्साहस पर बल्कि वतन पर अपनी जान कुर्बान करने के उनके जज्बे पर भी। सारे क्रांतिकारियों को मानो नई संजीवनी मिल गई, एक-एक करके अंग्रेज अफसर निशाना बनाए जाने लगे और युवाओं में देश पर मर मिटने का जुनून सर चढ़कर बोलने लगा। और यही जूनून एक दिन भारत माता की आज़ादी का कारण बना .
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क्या हुआ था फ्लाइट 814 के साथ ? Story of Kandahar aircraft hijacking!
 
13:18
24 दिसम्बर 1999 की शाम थी मौसम काफी ठंडा था नेपाल की राजधानी काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एअरपोर्ट से इंडियन एयरलाइन्स की फ्लाइट आईसी 814 दिल्ली आने के लिए उड़ान भरने वाली थी वैसे तो विमान के लिए ये दुरी महज 1.5 घंटे की थी लेकिन इस बात किसी भी यात्री को अंदाज़ा नही था की छोटी सी ये दुरी कौफ और आतंक के बहुत लम्बे सफ़र में बदलने वाली है और उन्हें भारत पहुँचने के लिए कुछ घंटे नही बल्कि आठ दिनों तक इन्तजार करना पड़ेगा music credit - Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/
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हरे रंग के जूतों की दर्द भरी कहानी !
 
07:27
माउंट एवरेस्ट, धरती की सबसे ऊँची चोटी समुन्द्र तल से 8848 मीटर ऊँची इस चोटी पर चढ़ना बहुत बड़ा कारनामा माना जाता है हर साल हजारों लोग कोशिश करते हैं, पर मुट्ठी भर लोग ही चोटी पर पहुंच पाते हैं। music credit - Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/
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क्या हो अगर चाँद टूट कर धरती पर गिर जाए ?
 
06:36
नील आर्मस्ट्रांग का चाँद पर रखा गया पहला कदम पूरी दुनिया के लिए हैरान कर देने वाला था किसी को यकीं नही था के इंसान चाँद पर पहुँच गया है कुछ अन्तरिक्ष संस्थाओ ने तो इसे अमेरिका द्वारा फैलाया गया बहुत बड़ा झूठ करार दे दिया था music credit - "Division" Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/
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आईये करते है हमारे सौरमंडल की सैर ! !
 
09:35
दोस्तों इस विडियो में हमारे सौरमंडल के बारे में समझाया गया है हमारे सूर्य उसके आठ ग्रह उन ग्रहों के चंद्रमा और बौने ग्रहों से मिलकर बना है हमारा सौरमंडल अगर विडियो पसंद आये तो चैनल को सब्सक्राइब जरुर कर लेना दोस्तों धन्यवाद !! SOURCE OF THE VIDEO UNDER CREATIVE COMMONS - https://www.youtube.com/watch?v=m1EBHOmXSqA music credit - Lost Frontier Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/ ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright.
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क्या हो अगर आपको छोडकर पृथ्वी का हर इन्सान गायब हो जाए !
 
07:04
As we all know humans are the dominant species on this planet and We are the smartest ,most advanced and most powerful creatures that exist But, What will be happen if Every Human Disappeared EXCEPT You? music credit - Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/
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ऐसे महान आविष्कार जो लुप्त हो गए ! ! !
 
04:30
आज के युग में मानव समाज इतना आगे बढ़ पाया है तो इसका श्रेय सिर्फ विज्ञानं को जाता है दुनिया भर में हुए महत्वपूर्ण अविष्कारों की ही वजह से आज मानव जंगलो को छोड़ कर इंसानी सभ्यता बसा पाया है लेकिन इस​के साथ ही कई अविष्कार ऐसे भी थे, जो की दुनिया में सामने आने से दूर रह गए। माना जाता है कि वैज्ञानिकों द्वारा कई ऐसे आविष्कारकिए गए थे, जो दुनिया बदल सकते थे, परंतु वो मिट गए या फिर उनको मिटा दिया गया। इस विडियो में ऐसे ही कुछ आविष्कार बताये गए है अगर जानकारी पसंद आये तो मेरे चैनल को सब्सक्राइब जरुर कर लेना ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright.
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इतिहास की किताबो में जगह नही मिली भारत के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी को !!
 
06:03
जिस भारतीय ने सबसे पहले ब्रिटिश सरकार के खिलाफ बगावत करके, अंग्रेजो से लोहा लिया था उनका नाम था तिलकमांझी उन्होंने 1857 के विद्रोह के लगभग 100 साल पहले ही उन्होंने यह बगावत की थी, किन्तु उन्हें भारतीय इतिहास में वह शोहरत नहीं मिली, जिसके वे हकदार थे। चूँकि भारतीय इतिहास लेखन में हमेशा से उच्च वर्ग का वर्चस्व रहा है इसिये एक गरीब आदिवासी को इतिहास की किताबो में स्थान न मिलना कोई हैरानी की बात नही है ,, किन्तु भारत में स्वाधीनता संग्राम की प्रथम मशाल सुलगाने वाली और अंग्रेजी हुकूमत की जड़ें हिला देने वाली इन जंगली आदिवासी जातियां को कभी भुलाया नही जा सकता । इन्हीं आदिवासी जातियों में तिलकामांझी का नाम प्रथम विद्रोही के रूप में लिया जाता है तिलकामांझी का जन्म 1750 में बिहार राज्य के भागलपुर के निकट एक आदिवासी परिवार में हुआ था। बचपन से ही वह जंगली सभ्यता की छाया में तीर धनुष चलाने, बड़े-बड़े वृक्षों पर चढ़ने उतरने और जंगली जानवरों का शिकार करने में निपुण थे। जंगली जीवन ने उसे वीर बना दिया था। किशोर जीवन से ही उन्होंने अपने परिवार और जाति पर अंग्रेजी सत्ता का अत्याचार देखा था। ये सब देखकर उनका खून खौल उठता और अंग्रेजी सत्ता से टक्कर लेने के लिए उनके मन में विद्रोह की लहर पैदा होती। गरीब आदिवासियों की भूमि, खेती, जंगली वृक्षों पर अंग्रेजी शासक अपना अधिकार किये हुए थे। जंगली आदिवासियों के बच्चों, महिलाओं, बूढ़ों को अंग्रेज तरह-तरह से यातनाएं देते थे। पहाड़ों के इर्द-गिर्द बसे हुए जमींदार अंग्रेजी सरकार को धन के लालच में खुश किये हुए थे। अंततः ,इन सब से तंग आकर तिलका मांझी ने अंग्रेजी सरकार के विरूद्ध विद्रोह शुरू कर दिया। वीर तिलका मांझी के नेतृत्व में आदिवासी वीरों के विद्रोही कदम भागलपुर, सुल्तानगंज तथा दूर-दूर तक जंगली क्षेत्रों की तरफ बढ़ रहे थे। उन्होंने अपने साथ अंग्रेजो द्वारा सताये गए बहुत सारे आदिवासियों से मिलकर एक सेना तैयार कर ली थी हिन्दू मुस्लिम में फूट डालकर शासन करने वाली ब्रिटिश सत्ता को तिलका मांझी ने ललकारा शुरू कर दिया था । स्थिति का जायजा लेकर अंग्रेजी सरकार ने क्लीव लैंड को मैजिस्ट्रेट नियुक्त कर तिलकामांझी को गिरफ्तार करने भेजा। क्लीव लैंड की सेना और पुलिस दल के साथ वीर तिलका की कई स्थानों पर जमकर लड़ाई हुई। तिलका अंग्रेजो से जमकर मुकाबला करते थे , जिससे अंग्रेजो में दहशत फैलने लगी । उसके सैनिक छिप-छिपकर अंग्रेजी सेना पर अस्त्र प्रहार करने लगे। एक रात तिलका मांझी और उसके क्रान्तिकारी साथी जब एक उत्सव में नाच गाने की उमंग में खोए थे कि अचानक क्लीव लैंड की सेना ने इन वीरों पर आक्रमण कर दिया। इस अचानक हुए आक्रमण से तिलका मांझी तो बच गये किन्तु अनेक देशभक्त वीर शहीद हो गए और कुछ को बन्दी बना लिया गया। तिलका मांझी के वहां से बचकर निकलने पर अंग्रेजो ने भागलपुर से लेकर सुल्तानगंज व उसके आसपास के पर्वतीय इलाकों में उन्हें पकड़ने के लिए जाल बिछा दिया। और एक समय ऐसा भी आया जब अंग्रेजी सेना ने मैजिस्ट्रेट क्लीव लैंड के नेत्रत्व में तिलका को जंगल में चारो तरफ से घेर लिया वीर तिलका का अब बच के निकलना संभव नही था तो उन्होंने तय कर लिया के मैं तो मरूँगा लेकिन इस अंग्रेज अफसर को साथ लेकर मरूँगा और मौका पाकर वो एक ताड के पेड़ पर चढ़ गए पेड़ पर चड़कर उन्होंने अपने आप को पत्तो में छुपा लिया वे अपने निचे अंग्रेज सैनको को इधर से उधर घूमते हुए साफ़ साफ़ देख रहे थे उन सभी अंग्रेजो के हाथो में बंदूके थी और वे कुत्ते के तरह तिलका को ढूंड रहे थे तिलका के पास हथियार के रूप में सिर्फ धनुष बाण था वे बिना कोई आवाज़ किये साँस रोके पेड़ पर छुपे हुए इन्तजार कर रहे थे के कब अंग्रेज अफसर क्लीव लैंड उस पेड़ के करीब आये और वे अपना मिशन पूरा कर सके उन्हें एहसास था के उनके पास हमले का सिर्फ एक ही मौका होगा और वे उस मौके को गवाना नही चाहते थे इन्तजार करते करते घंटो बीत गए और आखिरकार क्लीव लैंड अपने घोड़े पर सवार होकर उस पेड़ के निचे आ खड़े हुए, मांझी को तो बस इसी मौके का इन्तजार था उन्होंने बिना किसी देरी के तीर धनुष का निशाना उस अफसर पर लगाया। और अगले ही पल उनके धनुष से तीर छुटा जो की सरसराते हुए अंग्रेज अफसर के सेने को चीरता हुआ आर पार हो गया अफसर तुरंत घोड़े से गिर पड़ा और कुछ ही समय में उसने छट पटाकर अपने प्राण त्याग दिए ,, कुछ समय के लिए वहा मोजूद सभी अंग्रेज सैनिक घबराकर इधर उधर भागने लगे किसी की समझ में नही आया के बिजली से रफ़्तार सा ये तीर कहाँ से आया है लेकिन थोड़े ही समय उपरांत तिलका मांझी को घेर कर गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में अंग्रेजी हुकूमत ने उस वीर सपूत को एक पेड़ पर ही लटका कर फांसी दे दी और इस तरह से हमारे देश के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी सदा के लिए अमर हो गए References - http://www.nationaldastak.com/story/view/tilkamanjhi-bhagalpur-forget-british-government-
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दुनिया को खत्म करने की तैयारी हो चुकी है !
 
07:40
जब से इंसानो की प्रजाति ने होश संभाला है तब से वह हथियार बनाता आया है पहले पत्थरों के हथियार दुसरे जानवरों से अपनी रक्षा करने के लिए फिर धातुओं के हथियार दुसरे जानवरों को मारने के लिए और बाद में बारूदी हथियार बने जिनका मुख्य उद्देश्य जानवरों को मारना नही बल्कि खुद अपनी ही नस्ल के दुसरे इंसानों को मारना था - दुसरे देशो को जीतना था,, लेकिन july 16 , 1945 के दिन इंसानों ने मक्सिको के रगिस्तान में एक नई ताकत को जन्म दिया ये ताकत किसी को मारने का ही नही बल्कि पूरी मानवता और पर्यावरण को खत्म करने का दम रखती थी ये ताकत थी परमाणु हथियार की music credit - https://www.youtube.com/channel/UCQKGLOK2FqmVgVwYferltKQ
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मुग़लो के घुटने टिकवा दिए थे एक कुत्ते ने !
 
03:08
मुगलों के घुटने टिकवा दिए थे एक कुत्ते ने I creat this video from google labeled for reuse with modification images इसमें कोई शक नही की कुत्ता इंसान का सबसे सच्चा दोस्त है इसकी वफादारी की मिसाले हमेशा से दी जाती रही है इन्ही वफादार कुत्तो में से भारत के इतिहास में एक ऐसा कुत्ता भी हुआ था जिसमे अपनी मालिक के साथ मिलकर मुगलों से रणभूमि में लोहा लिया था | आज से लगभग 350 साल पहले पहले जब मुग़ल बादशाह औरंगजेब हिन्दुओ पे अपनी क्रूरता के लिए विख्यात था उस समय औरंगजेब ने सभी हिन्दू राजाओ पे हमला करके उन्हें अपने राज्य में मिला लिया था तभी लोहारू रियासत के एक बहादुर शाशक मदन सिंह ने मुगलों से लोहा लेने की ठान ली उसने औरंगजेब को राजस्व देने से मना कर दिया | जब औरंगजेब को इस बात की खबर लगी तो उसने हिसार में नियुक्त अपने गर्वनर अलफु खान को आदेश दिया कि वो लोहारु पर आक्रमण कर उनसे राजस्व छीन ले | अलफु खान अपनी सेना लेकर लोहारू पहुच गया और भीषण युद्ध शुरू हो गया मदन सिंह की सेना में उनका बहादुर सैनिक बख्तावर सिंह पुरी ताकत से लड़ाई कर रहा था | बख्तावर सिंह के साथ साथ उनका वफादार कुत्ता भी रणभूमि में बना हुआ था | वो कुत्ता इतना वफादार था कि अपने मालिक को जख्मी करने वाले मुगल सैनिक को नोच डालता था | वो कुत्ता ना केवल अपने मालिक की रक्षा करने बल्कि अपनी मातृभूमि की रक्षा करने के लिए लड़ रहा था जिसमे मुगलों के 28 सैनिको को बड़ी बेरहमी से मार डाला था |जब मुगल सैनिको ने उस कुत्ते को मुगल सैनिको पर आक्रमण करते देखा तो वो भी दंग रह गये | अब उनके सामने कुत्ता बड़ी चुनौती थी जिसे कोई एक मुगल सैनिक नही सम्भाल सकता था इसलिए सभी मुगल सैनिको ने एक साथ उस कुत्ते पर हमला कर दिया उन सैनिको के साथ बीरता से लड़ते हुए वो कुत्ता वीरगति को प्राप्त हो गया | उस कुत्ते की मृत्यु के कुछ ही समय बाद उसके मालिक बख्तावर सिंह की भी सभी मुगलों ने एक साथ हमला करके मार डाला | उन दोनों की बाहुदरी के कारण मुगल सेना को घुटने टेकने पड़े थे जिसके कारण अंत में मदन सिंह के आते ही अलफु खान को भागना पड़ा | युद्ध खत्म होने के पश्चात ठाकुर साहब ने उस बहादुर वफादार कुत्ते की याद में एक गुम्बद का निर्माण करवाया जहा पर उस कुत्ते ने वीरगति पायी थी | और जब उस वफादार कुत्ते के मालिक का अंतिम संस्कार किया गया तो उनकी पत्नी भी उन्ही के साथ सती हो गई उनकी याद में भी एक मंदिर बनवाया गया
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अद्भुत प्राक्रतिक घटनाये जिनका विज्ञान के पास कोई जवाब नही !!
 
04:09
इस विडियो में ऐसे घटनाये दिखाई गयी है जो प्राक्रतिक तौर पर होती है लेकिन उनके घटित होने का कारण वैज्ञानिक आज तक नही समझ पाए है ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright. music credit - "Ever Mindful" Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/
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भूलकर भी न करे इन नशीले पदार्थो का सेवन ! !
 
12:01
कभी तनाव दूर करने के बहाने कभी कुछ नया प्रयोग करने की इच्छा या फिर कभी दोस्तों के साथ मौजमस्ती करने की ख्वाहिश ये सभी ऐसे कारण है जिनकी वजह से आज के युवा तेजी से नशे की चपेट में आ रहे है लेकिन नशे के लिए प्रयोग होने वाले ये पदार्थ बेहद खतरनाक होते है और इनमे से कुछ तो जानलेवा होते है तो दोस्तों इस विडियो में कम खतरनाक से ज्यादा खतरनाक नशीले पदर्थो के बारे में क्रमशः जानकारी दी गयी है भांग भांग हिंदुस्तान में प्रयोग होने वाले सबसे प्राचीन मादक पदार्थो में से एक है भांग एक प्रकार का पौधा है जिसे अंग्रेजी में कैनाबिस कहते है इसी पौधे की पत्तियों को पीस कर भांग तैयार की जाती है। इसे भगवान् शिव का प्रसाद भी कहा जाता है आयुर्वेद ने भांग के सेवन को सही माना है। गांजा या सुल्फा ये दोनों मादक पदार्थ भी भांग के पोधे से ही प्राप्त होते है जब मादा भांग के पौधे की ,फूल, पत्तियाँ एवं तने को सुखा दिया जाता है तो वह गांजा कहलता है इसे हशीश या मारिजुआना नाम से भी जाना जाता है वहीं दूसरी और जब भांग के पौधे की पत्तियों को तोड़कर मसाला जाता है तो उनसे एक तरह का स्राव निकलता है जिसे चरस या 'सुल्फा' कहते हैं। इन्हें आमतौर पर तम्बाकू के साथ मिलाकर स्मोकिंग के रूप में लिया जाता है इसी वजह से इसके नुकसान भांग की तुलना में ज्यादा होते है क्योंकि इसका धुवा बहुत गाढ़ा होता है और ये खून में जाकर जम जाता है एम् डी एम् ए ये आज के युवाओ के बीच एक बहुत ही लोकप्रिय नशा है। इसका एक निश्चित बिंदु तक प्रयोग करने से शरीर को कोई हानि नहीं होती। लेकिन लंबे समय तब का इस्‍तमाल तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। कई देशों में एमडीएमए का इस्‍तमाल अवैध है। इसे लोग पार्टी के दौरान लेना पसंद करते हैं क्‍योंकि यह उनके अंदर उत्‍साह बढाता है। अगर आप इसे शराब के साथ लेंगे तो यह विनाशकारी हो सकती है। केटामाइन इसके साथ ही रोगी को आत्मविश्वास बढ़ने और स्वस्थ्य होने का भी एहसास होता है। ये सिर्फ प्रिस्क्रिप्शन पर ही दी जाती है। लेकिन नशेबाजों के बीच इसकी बढ़ती लोकप्रियता के कारण ये गैरकानूनी तरीके से दुनिया भर में बनाई और बेची जाती है। इसके लेने से हिंसक और आक्रामक प्रभाव भी देखने को मिलता है। इसको इंजेक्शन के रूप में लिया जाता है ये दिल के लिए बेहद नुकसानदायक है अल्कोहल अल्कोहल एक मादक पेय पदार्थ है यह बियर , वाइन , विह्स्की और स्प्रिट्स आदि रूप में उपलब्ध है तम्बाकू के बाद भारत में शराब की ही खपत सबसे ज्यादा है और आज हर तीसरा व्यक्ति शराब का आदि बन चूका है यह पार्टियों और अन्य सामाजिक घटनाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चूका है किसी शादी या बारात की कल्पना आज बिना अल्कोहल नही की जा सकती शराब पीने से आदमी खुद को बेहद खुश महसूस करता लेकिन ज्यादातर लोगो में इसके सेवन से आक्रामकता और गुस्से को बढ़ावा मिलता है ज्यादतर हिंसात्मक घटना या सडक दुर्घटना शराब पीने के बाद ही होती है हलाकि थोड़ी मात्रा में शराब का सेवन ज्यादा नुकसानदायक नही होता बल्कि ये ह्रदय के लिए काफी फायेदेमंद होता है कोकीन कोकीन सभी मादक पदार्थो में सबसे महगा होता है इसका सेवन फ़िल्मी एक्टर या बड़े पैसे वाले लोग करते है क्योंकि ये आप आदमी की पहुँच से बहार होता है इसका नशा बेहद उर्जावान होता है इसका सेवन करने वाला व्‍यक्ति अपने आपको बेहद उत्साही महसूस करता है इसके इस्तेमाल से थकान और नींद पल भर में गायब हो जाती है यही कारण है के बड़े खिलाडी खासकर के एथलीटो में ये बेहद लोकप्रिय है एल एस डी यह एक कृत्रिम रासायनिक पदार्थ है। यह नशीला पदार्थ इतना शक्तिशाली है कि इसकी एक तोले यानी करीब दस ग्राम मात्र से है तीन लाख डोज बनाये जा सकते हैं। नमक के दाने से भी कम इसकी मात्रा से ही इन्सान को काफी तेज नशा हो जाता है । इस पदार्थ के सेवन के 8 से 10 घण्टे तक नींद आना लगभग असम्भव है। एल.एस.डी. लेने के पश्चात गांजे के समान ही सपनो की दुनिया में पहुँचने का एहसास होता है रोहिपनॉल: रोहिपनॉल पूरी दुनिया में ‘डेट रेप ड्रग’के नाम से भी कुख्‍यात है। इसके इस्तेमाल से अल्कोहल जैसा ही प्रभाव होता है लेकिन अल्कोहल की तुलना में ये प्रभाव बेहद तेज होता है इसे इस्तेमाल करने वाला व्‍यक्ति खुद को काफी हल्का भी महसूस करता है। इसे ज्यादतर असमाजिक लोग किसी लड़की या महिला के साथ यौन सम्बन्ध बनाने के लिए इस्तमाल करते है इस ड्रग के बहुत अधिक मात्रा में सेवन करने से किसी महिला को महसूस तो सब कुछ होता है , किन्‍तु उसके विरोध करने की क्षमता समाप्‍त हो जाती है। यही कारण है कि इसे लेने के बाद लड़की या महिला को ये तो पता चल जाता है कि उसका यौन शोषण किया जा रहा है, किन्‍तु वह उसे रोकने में सक्षम नहीं हो पाती है। तंबाकू तम्बाकू निकोटियाना प्रजाति के पेड़ के पत्तों को सुखा कर नशा करने के लिए बनाई गयी वस्तु है। तम्बाकू भारत में कई रूप में प्रचलित है जैसे गुटखा , पान मसाला, खैनी , बीडी , सिगरेट , और हुक्का इत्यादि लेकिन हर रूप में ये बेहद घातक होता है जितने भी लोग तम्बाकू का सेवन करते है उनमे से कम से कम आधे लोगो की जान तम्बाकू से जुडी बीमारियों के कारण ही होती है इतना ही नही करीब 85 प्रतिशत कैंसर के मरीज तम्बाकू सेवन करने वाले ही होते है हिरोइन हेरोईन का निर्माण ओपियम पपी (Opium Poppy)नामक पौधे से किया जाता है। यह मॉर्फिन (Morphine) का ही एक रूप है, इसे अफीम भी कहा जाता है यह सफेद या भूरे पावडर के रुप में मिलता है। आमतौर पे हेरोईन के लती इसे इंजेक्शन के द्वारा लेते हैं, जिससे यह तुरतं असर दिखाती है। इसके अलावा इसे सूंघ कर या धुएं में उड़ाकर भी उपयोग में लिया जाता है। हेरोईन के उपयोग से शरीर की क्रियाएं धीमी हो जाती है। सांस और दिल की धड़कन बेहद धीमी हो जाती है। इससे नशेड़ी को दर्द से मुक्ति मिलती है तथा आनंद की अनुभूति होती है।
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क्या प्राचीन भारत का ब्रह्मास्त्र आज के परमाणु बम से ज्यादा घातक था ??
 
06:18
दोस्तों अगर आपने महाभारत या रामायण को सुना पढ़ा या टेलीविज़न पर देखा है तो आपने ब्रह्मास्त्र के बारे में जरुर सुना होगा रामायण में कम से कम दो बार ब्रह्मास्त्र का प्रयोग हुआ था एक बार तब जब हनुमान ने अशोकवाटिका में सीता को राम का संदेश दिया तथा लंका नगरी में उत्पात खड़ा कर दिया था तो अंत में रावण ने मेघनाद को भेजा। मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करके हनुमान को बांध लिया क्योंकि हनुमान जी को खुद ब्रह्मा जी ने एक बार जीवन दान दिया था इसिलए ब्रह्मा के आशीर्वाद के कारण उनपे ब्रह्मास्त्र को कोई असर नही हुआ बल्कि इस अस्त्र के सम्मान के लिए हनुमान जी खुद ही बंध गये थे दूसरी बार ब्रह्मास्त्र के प्रयोग रामायण में युद्ध के दौरान हुआ था जब गुस्से में आकर लक्ष्मण जी ने मेघनाद के उपर वार करने के इस अस्त्र प्रकट किया था लेकिन उस समय श्री राम ने लक्ष्मण को ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करने से मना कर दिया महाभारत में भी दो बार ब्रह्मास्त्र का प्रयोग या आवाहन किया था एक बार अस्व्थामा ने पांड्वो पे ये अस्त्र चलाया था तो उसके जवाब में मजबूर होकर अर्जुन को भी ब्रह्मास्त्र चलाना पड़ा लेकिन ऋषि वेदव्यास ने दोनों अस्रतो के बीच में आकर उन्हें रोक दिया इससे पहले एक बार इस अस्त्र का प्रयोग दानवीर कर्ण ने भी करने की कोशिश कि थी ,,जब युद्ध के दौरान ब्राह्मण के श्राप के कारण कर्ण के रथ का पहिया भूमि में धंस गया था तो कर्ण ने ब्रह्मास्त्र का आहवान किया लेकिन अपने गुरु परशुराम से मिले श्राप के कारण कर्ण ब्र्हम्स्त्र को प्रकट नही कर पाया इन घटनाओ से साफ़ है के ब्र्ह्मत्र का प्रयोग इतिहास में जरुर हुआ है लेकिन इस अस्त्र की शक्ति का सही सही अंदाज़ा नही लगया जा सकता क्योंकि हर बार इसके प्रयोग के दौरान कुछ न कुछ रुकावट आ जाती थी ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright.
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दिल्ली का आखिरी हिन्दू सम्राट !
 
06:06
हमारा देश योद्धाओ का देश रहा है इस देश के इतिहास में कुछ ऐसे योद्धा रहे है जिनकी वीरता को दुनिया के आखिरी दिन तक याद किया जायेगा ऐसे ही एक महान योद्धा प्र्थिविराज चौहान थे , music credit - http://www.bensound.com/royalty-free-music पृथ्वीराज चोहान दिल्ली पे राज करने वाले आखिरी हिन्दू सम्राट थे वे बचपन से ही निडर और बहादुर थे कहा जाता है के एक बार उनका शेर से सामना हो गया था तो अपने हाथो से उन्होंने शेर का जबड़ा फाड़ कर शेर को मार दिया था सिर्फ इतना ही नहीं आंखें ना होने के बावजूद उन्होंने अपने शत्रु मोहम्मद गोरी को मौत के घाट उतार दिया था। पृथ्वी राज चौहान संयोगिता नामक राजकुमारी से बेहद प्यार करते थे संयोगिता कन्नोज के राजा जयचंद की पुत्री थी वह भी पृथ्वी राज चौहान की दीवानी थी लेकिन जयचंद को उन दोनों की शादी मंजूर नहीं थी इसिलिय पृथ्वी राज चौहान एक स्वयंवर के बीच में से संयोगिता को लेकर भाग गए और जयचंद कुछ ना कर पाया लेकिन इस घटना के कारण वो अपमान की आग में जल रहा था सो उसने मुहम्मद गोरी के साथ मिलकर पृथ्वीराज चौहान को मारने की साजिश रचाई मोहम्मद गोरी पहले ही से पृथ्वीराज को हराकर दिल्ली की सत्ता को हडपना चाहता था इसी वजह से उसने पृथ्वीराज से सोलह बार लड़ाइया की थी लेकिन हर बार उसे हार का मुह देखना पड़ा था पहली लड़ाई 1178 ईसवी में माउंट आबू के पास कायादरा पर लड़ा गयी थी और प्रथ्वी ने गोरी को बुरी तरह से हराया था। 1191 में तारोरी की लड़ाई में पृथ्वीराज चौहान ने गौरी और उसकी घुड़सवार सेना पर कब्जा कर लिया। गोरी ने अपने जीवन की भीख मांग ली । पृथ्वीराज ने उसे दोबारा ना घुसने की चेतावनी देकर उसे उसके सेनापतियों के साथ जाने की अनुमति दे दी। हर बार हारने पर गौरी पृथ्वीराज के पैरो में गिरकर खुद को न मारने की भीख मांगता था तो पृथ्वीराज दया करके उसे जिन्दा छोड़ देता था लेकिन पृथ्वीराज की यही भूल उसकी मौत का कारण बनी गद्दार जयचंद जब गौरी से मिलके अपने ही हिन्दू भाईयो के खिलाफ लड़ने और देशद्रोह करने को तैयार हो गया तो मुहम्मद गौरी ने एक बार और पृथ्वीराज पे हमला कर दिया गौरी ने इस बार धोके से युद्ध लड़ने की योजना बनाई वो अक्सर रात को हमला करता था और उसके साथ जयचंद गद्दार की भी सेना थी इसीलिए उसकी शक्ति काफी बढ चुकी थी फलस्वरूप इस युद्ध में पृथ्वीराज की हार हुई और गौरी ने उसे बंधक बना लिया जयचंद ये समझता था के पृथ्वीराज को मारने के बाद मुहम्मद गौरी दिल्ली का राज्य उसे इनाम स्वरूप दे देगा लेकिन युद्ध ख़त्म होने के बाद गौरी ने उसे भी मौत के घाट उतार दिया इस युद्ध से पहले पृथ्वीराज ने कन्नोज , पाटन और अन्य राजाओ से में मदद मांगी लेकिन उन राजाओं ने उस युद्ध में पृथ्वीराज का साथ नहीं दिया जो बाद में उन सबके मिटने का कारण बना। क्योंकि पृथ्वीराज को हराने के बाद गौरी ने उन राजाओं से भी युद्ध करके उनका राज्य कब्जा लिया और पहली बार हिंदुस्तान में मुस्लिम साम्राज्य की शुरुआत हुई पृथ्वीराज ने सत्रह बार मोहम्मद गौरी को हराकर भी उसे जीवन दान दे दिया था लेकिन ऐसी गलती गौरी ने नही की अपने असुरो वाले स्वभाव के अनुसार बंधक बनाते ही मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान की आंखों को गर्म सलाखों से जला दिया इसके आलावा और भी कई अमानवीय यातनाएं पृथ्वीराज को दी गईं। पृथ्वीराज चौहान, में एक जबरदस्त हुनर था वह आवाज सुनकर ही तीर से निशान लगा सकते थे गोरी ने पृथ्वीराज की आँखे फोड़ कर उसे अपनी यह कला दिखाने का आदेश दिया। उसने कई जगहो पर घंटे लटकवा दिए और उन्हें दूर से बजाने का इंतजाम किया। वह एक मंच के उपर बिलकुल शांत बैठा था क्योंकि उसे अहसास था के अगर उसके मुह से आवाज़ निकली तो कही पृथ्वीराज उसी पर बाण न चला दे खैर पृथ्वीराज ने अपनी कला का प्रदर्शन शुरू किया जिस भी तरफ का घंटा बजाया गया, उसी तरफ पृथ्वीराज ने वाण छोड़कर घंटे को गिरा दिया। हर बार पृथ्वीराज का निशाना अचूक रहा ये देखकर गौरी खुद को पृथ्वीराज की तारीफ करने से रोक नही पाया और उसके मुह से निकला वाह पृथ्वी वाह जैसे ही पृथ्वी राज ने आवाज़ सुनी वो समझ गए के ये गौरी की आवाज़ है और तुरंत उन्होंने उसी आवाज़ की तरफ निशाना साधा और बाण चला दिया अगले ही पल एक सरसराता हुआ बाण गौरी की तरफ आया और सीधा उस की गर्दन में धंस गया और वहीँ मौके पर ही उसकी मौत हो गई ये देखकर गौरी के सैनिक पृथ्वीराज को मारने के लिए दौड़े लेकिन कहते है के दुश्मन के हाथो मरने से अच्छा है के किसी अपने के हाथो से मरा जाये बस यही सोचकर भीड़ में मौजूद पृथ्वीराज के बचपन के दोस्त चन्दबरदाई ने खुद आगे बढकर पृथ्वीराज की छाती में खंजर भोक दिया और बाद में उसी खंजर को अपने सीने में भी मारकर उसने अपना जीवन भी खत्म कर लिया References https://s-media-cache-ak0.pinimg.com/736x/1a/b3/04/1ab304c3eb149de62a0ef7e7bd8ee47c.jpg https://www.pinterest.com/pin/36169603231433023/ http://images.speakingtree.iimg.in/files/rsz/crop_fc_1000x550/04-2015/979137/5d8d0c8fa442eb984b07d585014810ca_1428950074.jpg http://hinduhistory.blogspot.in/2008/02/prithviraj-chauhan.html http://www.rajras.in/index.php/battles-of-tarain/ https://wn.com/prithviraj_chauhan https://www.pinterest.com/explore/prithviraj-chauhan/
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15 अगस्त 1947 को मिली आजादी का सच जान कर चौंक जायेंगे आप !
 
06:33
दोस्तों 14 अगस्त 1947 की रात, रात जहा एक तरफ पंडित जवाहरलाल नेहरु अपना भाषण दे रहे थे और वही दूसरी ओर लाखो लोग दंगो की वजह से सूली चढ़ रहे थे .क्या 14 अगस्त की रात को जो कुछ हुआ वह वाकई आज़ादी थी . नहीं दोस्तों उस रात को जो कुछ हुआ वो आजादी नहीं, बल्कि ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट हुआ था पंडित नेहरु और लोर्ड माउन्ट बेटन के बीच में .हस्तांतरण की संधि ( Transfer of Power Agreement ) यानि भारत के आज़ादी की संधि: ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright. music credit - "At Rest" Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/
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नक्सलवाद क्या है इसकी शुरुआत कैसी हुई !
 
04:52
दोस्तों हाल ही में छतीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलवादियो के हमले की बहुत बड़ी घटना सामने आई तो आप सब के मन में ये सवाल जरुर उठता होगा की नक्सलवाद आखिर है क्या और इसकी शुरुआत कैसे हुई नक्सलवाद उस आंदोलन का अनौपचारिक नाम है जो भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन के फलस्वरूप उत्पन्न हुआ था । नक्सल शब्द की उत्पत्ति पश्चिम बंगाल के छोटे से गाँव नक्सलबाड़ी से हुई थी जहाँ भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता चारू मजूमदार और कानू सान्याल ने 1967 मे सत्ता के खिलाफ़ एक सशस्त्र आंदोलन की शुरुआत की थी । चारू मजुमदार चीन के कम्यूनिस्ट नेता माओत्से तुंग के बहुत बड़े प्रशंसकों में से थे और उनका मानना था कि भारतीय मज़दूरों और किसानों की दुर्दशा के लिये सरकारी नीतियाँ जिम्मेदार हैं जिसकी वजह से उच्च वर्गों का किसानो और मजदूरों पर वर्चस्व स्थापित हो गया है और अमीर आदमी गरीबो का शोषण करता है उनका मानना था के इस दमनकारी वर्चस्व को केवल सशस्त्र क्रांति से ही समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों की एक अखिल भारतीय समन्वय समिति बनाई। और सरकार के खिलाफ़ भूमिगत होकर सशस्त्र लड़ाई छेड़ दी। सन 1972 में मजुमदार की मृत्यु के बाद यह आंदोलन बिखर गया और अपने लक्ष्य और विचारधारा से भटक गया। नक्सलवादियो के शुरूआती विद्रोह में मजदूर और छोटे किसान शामिल होते थे जो बड़े जमींदारो के पास गिरवी राखी गई अपनी जमने वापस मांगते थे लेकिन धीरे धीरे इन आन्दोलनो ने हिंसात्मक रूप ले लिया जिसके चलते पुलिस दल ने मजदूर और किसानो को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया ऐसी में उन किसानो के मदद के लिए कुछ आदिवासी भी इन आंदोलनों में शामिल हो गए , आदिवासियों एवं अन्य ग़रीब लोगों का नक्सलियों को साथ मिलने से नक्सलवाद एक बड़ा संगठन बनता चला गया असल में नक्सलवाद की शुरुआत गरीबो के हक की लड़ाई के रूप में हुई थी और 1990 के दशक तक नक्सलवाद सिर्फ दलितों तक ही सीमित था क्योंकि उच्च जाति के लोग दलितों पर अमानवीय अत्याचार करते थे। लेकिन वक्त के साथ साथ इसमें कई सारे असमाजिक और राजनितिक तत्व जुड़ गए ।आज कई नक्सली संगठन वैधानिक रूप से स्वीकृत राजनीतिक पार्टी बन गये हैं और संसदीय चुनावों में भाग भी लेते है असल में कुछ लोगो के लिए नक्सलवाद बेहद फायदे का सौदा बन गया और कभी बड़े अत्यचारी जमींदारों के खिलाफ शुरू हुआ आन्दोलन आज बड़े जमींदारों की ही जागीर बन गया है अगर आपके पास बहुर सारा पैसा है तो आप नक्सलियों को रंगदारी देकर जैसे चाहें, जंगलों की कटाई कर सकते हैं और खनिज-संपदा का दोहन भी कर सकते है । अगर सरकार या सुरक्षा बल आपको रोकने की कोशिश करते है तो आपकी सुरक्षा में नक्सली सदैव तैनात मिलेंगे,, आज ये नक्सली कभी किसी बड़े सामंतों और पूंजीपतियों के विरुद्ध कार्यवाही नही करते बल्कि इनकी नृशंस हिंसा के शिकार हमेशा निहत्थे ग्रामीण, गरीब सिपाही तथा छोटे किसान ही होते रहे हैं और होते रहेंगे !नक्सलवाद की सबसे बड़ी मार आँध्र प्रदेश, छत्तीसगढ, उड़ीसा, झारखंड, और बिहार को झेलनी पड़ रही है। आज नक्सलवाद हमारे देश के लिए सबसे बड़ा अभिशाप बन चूका है सुरक्षा बलों के जितने जवान कश्मीर बॉर्डर पे मारे जाते है उससे कहीं अधिक नक्सलवादियो के हाथो मारे जाते है नक्सलवाद आज अपनी जड़े इतनी मजबूत कर चूका है के इसे किसी विचारधारा से ख़त्म नही किया जा सकता बल्कि इसके लिए सैन्यबल की आवश्यकता है जो जबरन इन नक्सलियों के गिरोह को उखड फैंके क्योंकि जब तक देश अन्दर से सुरक्षित नही होगा तब तक हम बाहरी ताकतों का सामना करने में भी सक्षम नही हो सकते
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इतिहास से हटा दिया गया भारत के सबसे महान सम्राट को ! !
 
06:07
भाइयो ये बड़े ही शर्म की बात है कि महाराजा विक्रमादित्य के बारे में देश को लगभग शून्य बराबर ज्ञान है, वो विक्रमादित्य जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था, और स्वर्णिम काल लाया था आज अगर भारत में सनातन धर्म जिन्दा है तो सिर्फ और सिर्फ महाराजा विक्रमादित्य की ही वजह से है नही तो एक समय था जब भारत में सनातन धर्म लगभग समाप्ति के कगार पर आ गया था, और देश में तेजी से लोग बौद्ध और जैन धर्म अपना रहे थे। रामायण, और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, महाराज विक्रम ने ही पुनः उनकी खोज करवा कर उन्हें स्थापित किया। music - Our Story Begins Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/ video credit - https://www.youtube.com/watch?v=yeTNsCtnQl8&t=122s vikram aur betal tv series by Ramanand Sagar 1985 music cd - Moser Baer
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प्राचीन भारत के अद्भुत अविष्कार जिन्हें अंग्रेज उठा ले गये ! !
 
06:41
दोस्तों हमारा देश भारत पूरी दुनिया का गुरु रहा है भारत के बिना ना धर्म का कल्पना की जा सकती है और न ही विज्ञान की महाभारत और रामायण जैसे ग्रन्थ ही अपने आप में सम्पूर्ण विज्ञानं को समेटे हुए है हमारे भारतीय ऋषि मुनियों ने ऐसी खोजे और जानकारी दुनिया को दी है जिनके कारण ही आज आधुनिक विज्ञानं का अस्तित्व है, थोमस एडिसन ने भी अपनी किताब में लिखा है के वे बिजली का अविष्कार ऋषि अगस्त्य द्वार लिखे गए ग्रन्थअगस्त्य सहिंता को पढने के बाद कर पाए हालाँकि भारत में की गयी अधिकरत खोजो को या भुलाया जा चूका है या उनका पेटेंट अंग्रेज अपने नाम करा चुके है तो दोस्तों आज में आपको 5 ऐसी ही खास अविष्कार या खोजो के बारे में बताने जा रहा हूँ जिनका जन्म भारत में हुआ अगर जानकारी पसंद आये तो मेरे चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलना ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright.
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भारत कैसे आज़ाद हुआ, ये जानकर आप हैरान रह जायेंगे How did India get Freedom ?
 
07:34
दोस्तों इस विडियो में ये बताया गया है के भारत को आज़ादी मिलने की असल वजह क्या थी बेशक से इस आज़ादी के लिए भारत के वीर क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया था लेकिन भारत को मिली आज़ादी की एक और वजह हिटलर भी था असल में हिटलर ने ही ब्रिटिश सरकार की कमर तोड़ी थी जिसकी वजह से अंग्रेजो को भारत को आज़ादी देने पर मजबूर होना पड़ा ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright.
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अगर सभी इंसान अमर हो जाये तो क्या हो ?
 
07:28
दोस्तों जब से इंसान इस धरती पर आया है तब से लेकर आज तक जिस सत्य से इंसान सबसे ज्यादा डरता है वो है मौत, चाहे कोई अमीर हो या गरीब नेता हो या अभिनेता मौत सभी के लिए अटल सत्य है, किन्तु हम इंसान हमेशा से इस सत्य से बचने की कोशिश करते आये है दुनिया भर में मौजूद सभी इंसानों ने अपनी जिन्दगी में कभी ना कभी अमर होने की कामना जरुर की होगी music credit - Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/
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कर्ण और अर्जुन में से कौन जीता ?
 
05:49
इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि महाभारत के प्रसिद्ध योद्धा और अंतिम दिनों में कौरवों के सेनापति दानवीर कर्ण अपने प्रतिद्वंदी अर्जुन से श्रेष्ठ धनुर्धर थे जिसकी तारीफ भगवान श्रीकृष्ण ने भी की थो लेकिन फिर भी कर्ण अर्जुन के हाथो क्यों मारे गए असल में इसका कारण कर्ण द्वारा की गई ये पांच गलतिया थी for the copyright matter plz contact me - bubblesnews00@gmail.com परशुराम का श्राप परशुराम ने प्रण किया था के वो कभी भी किसी क्षत्रिय को शिक्षा नहीं देंगे , क्योंकि तब तक कर्ण ये नहीं जानता था के वो कुंती पुत्र है इसीलिए कर्ण ने परशुराम से कहा के मैं क्षत्रिय नहीं हूँ अत: आप मुझे युद्ध विद्या सिखाए परशुराम राजी हो गऐ कर्ण को सभी अस्त्र-शस्त्रों की शिक्षा दी । एक बार परशुराम सो रहे थे तो कर्ण ने उनका सिर अपनी गोद में रख लिया। तभी कहीं से एक बिच्छू आया और वह कर्ण की जांघ पर डंक मारने लगा। लेकिन परशुराम की नींद खुल जाने के भय से कर्ण चुपचाप बैठा रहा, घाव से खून बहने लगा। बहते खून ने जब परशुराम को छुआ तो उनकी नींद खुल गई। उन्होंने कर्ण से पूछा कि तुमने उस बिच्छू को हटाया क्यों नहीं? कर्ण ने कहा कि आपकी नींद टूटने का डर था इसलिए। परशुराम ने कहा कि किसी ब्राह्मण में इतनी सहनशीलता नहीं हो सकती है। तुम जरूर कोई क्षत्रिय हो। और गुस्से पे आकर उन्होंने कर्ण को श्राप दे दिया के जब भी तुम्हें मेरी सिखाई विद्या की सबसे ज्यादा आवश्यकता होगी, तभी तुम इसे भूल जाओगे। कोई भी दिव्यास्त्र का उपयोग नहीं कर पाओगे। ब्राह्मण का शाप एक दिन जब कर्ण धनुरविद्या का अभ्यास कर रहे थे तब उन्होंने एक गाय के बछड़े को कोई खतरनाक वन्य पशु समझकर शब्दभेदी बाण चला दिया और उस बाण से बछडा़ मारा गया। तब उस बछड़े के स्वामी ब्राह्मण ने कर्ण को शाप दे दिया कि जिस रथ पे चड़कर उसने एक असहाय बछड़े को मारा है वह रथ एक दिन उसका साथ छोड़ जायेगा और हुआ भी यही था कि जब कर्ण का अर्जुन से घोर युद्ध चल रहा था तब उसके रथ का पहिया बार-बार भूमि में धंस जाता था ऐसे समय में जब वह अपना धनुष रख कर का रथ का पहिया निकाल रहा था उसी समय मौके का लाभ उठाकर अर्जुन ने निहत्थे कर्ण को मार दिया। कुंती को दिया वचन एक बार कुंती कर्ण के पास गई और उससे पांडवों की ओर से लड़ने का आग्रह करने लगी। कर्ण को मालूम था कि कुंती मेरी मां है। कर्ण कहा कि जिनके साथ मैंने अब तक का अपना सारा जीवन बिताया उसके साथ मैं विश्‍वासघात नहीं कर सकता। तब कुंती ने कहा कि क्या तुम अपने भाइयों को मारोगे? तो कर्ण ने कहा के सारी दुनिया आपको पांच पुत्रो की माता के रूप में जानती है अत: मैं आपको वचन देता हूं कि अर्जुन को छोड़कर मैं अपने अन्य भाइयों पर शस्त्र नहीं उठाऊंगा। और आपके पुत्रो की संख्या नही बिगड़ने दूंगा कवच और कुंडल भगवान कृष्ण और देवराज इन्द्र दोनों जानते थे कि जब तक कर्ण के पास पैदायशी कवच और कुंडल हैं, वह युद्ध में अजेय रहेगा तब कृष्ण ने देवराज इन्द्र को एक उपाय बताया और फिर देवराज इन्द्र एक ब्राह्मण के वेश में पहुचे इन्द्र ने कहा, आप जैसा दानी तो इस धरा पर दूसरा कोई नहीं है किन्तु में जो आपसे मांगने वाला हूँ वो आप मुझे नहीं दे पाएंगे कर्ण ने कहा- मैं पर्ण करता हूँ जो भी आप मुझसे मांगोगे, मैं निसंकोच दूंगा । तब इन्द्र ने कहा- राजन! आपके शरीर के कवच और कुंडल हमें दानस्वरूप चाहिए। दानवीर कर्ण ने बिना एक क्षण भी गंवाएं अपने कवच और कुंडल अपने शरीर से खंजर की सहायता से अलग किए और ब्राह्मण रुपी इंद्र को सौंप दिए। अर्जुन के साथ हुए युद्ध में अगर कर्ण के पास उसके कवच और कुंडल होते तो निहथे कर्ण का भी, अर्जुन बाल भी बांका नहीं कर सकता था अर्जुन को जीवनदान देना महाभारत के युद्ध में एक बार अर्जुन से सामना होने पर कर्ण ने अर्जुन के साथ घनघोर युद्ध किया इस युद्ध में कर्ण अर्जुन से हर तरह से भारी सिद्ध हुए उसने अपनी घातक बाणो के वर्षा से अर्जुन के धनुष की डोर काट डाली और अर्जुन को बेबस कर दिया यहाँ तक के कर्ण ने अपने बाणो से श्रीकृष्ण को भी घायल कर दिया और अर्जुन के रथ को छलनी कर दिया ठीक उसी समय कर्ण ने अर्जुन के दोनों हाथो पे तीर चलाए वे तीर अर्जुन के हाथो में से होते हुए रथ में धंस गए जिसकी वजह से अर्जुन के दोनों हाथ रथ से बंद गए अब लाचार अर्जुन के पास अपने बचाव का कोई विकल्प नहीं बचा था वो अपनी बेबस आँखों से कर्ण को देखने लगा कर्ण ने एक और बाण अपने धनुष में चढ़ाया और उसका निशाना अर्जुन की गर्दन के तरफ कर दिया लेकिन उसी समय कर्ण की नजर अस्त होते सूर्य पे पड़ी उसे लगा के जब तक वो बाण अर्जुन के गर्दन तक पहुचेगा सूर्य अस्त हो चूका होगा और क्योंकि युद्ध के नियमो के अनुसार सूर्यास्त के बाद युद्ध करना वर्जित था इसीलिए कर्ण ने वो बाण वापिस अपने तरकश में रख के अर्जुन को जीवनदान दे दिया
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हिन्दू और मुस्लिम के बीच नफरत क्यों है ?
 
06:52
भाइयो हमारा देश भारत हम सबका देश है चाहे कोई हिन्दू हो या मुस्लिम सिख या इसाई , चाहे किसी भी जात या धर्म से हो हम सभी को अपने आपसी झगडे छोड़ कर देश को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाना चाहिए इस विडियो में यही बताया गया है के कोई भी मजहब ये नही सिखाता के दुसरे मजहब के लोगो से बैर रखो . ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright.
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2035 तक मंगल ग्रह पहुँच जाएगा इंसान ! Could human live on Mars ?
 
10:05
whenever we think of finding life on a planet other than the Earth, first of all, we think our neighbor planet Mars but can we live on Mars? Is it possible for human to reach to the Planet Mars. Let's try to know the answers to some such questions. music credit - Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/
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महाभारत के युद्ध ने किया था मोहनजोदड़ो का खात्मा ! !
 
07:21
मोहनजोदड़ो एक ऐसी सभ्यता और इतिहास का नाम है जिसे जानने के बाद आप भारतीय इतिहास पर गर्व करने लगेंगे जो लोग भारत को पिछड़ा हुआ समझते है भारत के कला अस्त्र शास्त्र और अविष्कारों आदि को सिर्फ झूठी कहानिया बताते है उन सबको हडपा संकृति के मोहनजोदड़ो शहर के बारे में जरुर जानना चाहिए दोसोत मोहनजोदड़ो के रूप में भारत ने दुनिया को एक ऐसा कला का खजाना दिया है जिसे जानने के बाद आप हमारे महान देश भारत को एक अलग ही नजरिये से देखने लंगेंगे तो मित्रो आपसे विनती है के अगर आपको ये विडियो पसंद आये तो क्रप्या चैनल को सब्सक्राइब जरुर करले ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright. References - https://www.youtube.com/watch?v=SdGbamPgf8o&t=177s
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पिरामिडस और एलियंस के बीच का रहस्य !! एक नया अध्ययन !!!
 
08:27
मनुष्य आज धरती से चांद, मंगल ग्रह और अंतरिक्ष तक पहुंच गया है, मगर इन सभी के बावजूद उसके इर्द-गिर्द ऐसी कई रहस्यमयी चीज़े हैं, जो आज भी एक अबूझ पहेली ही बनी हुई हैंहमारी दुनिया रहस्यों से भरी है?? यह पता लगाना बेहद मुश्किल है की प्राचीन विश्व में चीज़े कैसे होती थी हम सिर्फ अंदाज़ा लगा सकते है और सत्य के पास पहुचने की कोशिश कर सकते है परन्तु जिन चीजों क बारे में हम नहीं जान पाते वही चीज़े रहस्मयी कहलाती है. music credit "Expeditionary" Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0
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सभी वैज्ञानिक पुरुष ही क्यों हुए है ? Are men more intelligent then woman ?
 
07:29
दोस्तों आपको क्या लगता है के महिला या पुरुष में से कौन ज्यादा होशियार होता है इनमे से कौन विपरीत परिस्तिथियों को सुलझाने में ज्यादा सक्षम होता है आइये इस विडियो के जरिये इन सवालों का जवाब ढूँढने की कोशिश करे music credit - Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/
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भारतीय इतिहास के सबसे बड़े झूठ जो किताबो में पढाये जाते है ! !
 
07:20
तीन सबसे बड़े झूठ जो किताबो में पढाये जाते है 1. भारत की खोज वास्कोडिगामा ने की 2. हम (हिन्दू) भारतीय नही है 3. राजा विक्रमादित्य का कोई आस्तित्व नही था ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright.
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जोम्बी हमले के दौरान खुद को कैसे बचाए ?
 
11:14
दोस्तों एक समय था जब डरावनी फिल्मो में दर्शको को डराने के लिए भूत, प्रेत और चुड़ैल आदि का इस्तेमाल होता था लेकिन वक्त के साथ साथ जब लोग इन भूत प्रेतों से बोर हो गए तो फिल्ममेकरो ने कुछ नया करने की सोची और भूत प्रेतों की जगह वो एक नये पात्र जोम्बी को ले आये music credit - https://www.youtube.com/watch?v=ZOrxwqvfD2E (Creative Commons Attribution licence (reuse allowed) (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/
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महावीर हनुमान की उड़ने की रफ़्तार कितनी तेज थी ?
 
07:52
दोस्तों आप सभी जानते है के लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए बजरंग बली को एक ही रात में रावण की नगरी लंका से हिमालय के पर्वतों तक का सफ़र तय करना था एक ही रात में इतना लम्बा सफ़र तय करने के लिए हनुमान जी की रफ़्तार कितनी तेज थी इसी को जानने के लिए मैंने ये विडियो बनाई है अगर ये जानकारी पसंद आये तो विडियो को लाइक और शेयर जरुर करना All credit goes to - Ramayan (1987) by Great (Late) Ramanand Sagar ji
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सोने की चिड़िया 'पर' क्यों पड़ी बेड़िया !
 
08:06
दोस्तों अगर आप इतिहास के बारे में जानकारी रखते है तो आप निश्चित तौर पर प्राचीन भारत की आर्थिक मजबूती के साथ साथ सभ्यता , भाषा एवं विज्ञान के क्षेत्र में प्राचीन भारत द्वारा दिए गए के महत्वपूर्ण योगदानो के बारे में अनभिज्ञ नही होंगे तमिल दुनिया की सबसे पुरानी भाषा मानी जाती है जिसकी शुरुआत भारत में हुई इसके अलावा संकृत को भी ना सिर्फ हिंदी के बल्कि सभी यूरोपियन भाषाओ की जननी माना जाता है जाहिर है भारत ने ही पूरी दुनिया को पढना लिखना सिखाया ना जाने कितने ही गणितज्ञ और अविष्कारक प्राचीन भारत में हुए है , music credit - Anguish Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/b...
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हिन्दू धर्म के वो रहस्य जो विज्ञान की समझ से परे है !
 
06:53
हमारा महान और प्राचीन देश भारत अनेक प्राचीन सभ्यताओ , धर्म,और संस्क्र्तियो को अपने अन्दर समेटे हुए है, हमारे देश में सनातन धर्म जुड़े कुछ ऐसे रहस्य रहे है जिन्हें आधुनिक विज्ञानं या तो मानता नही या फिर हो सकता है जनता ही नही दोस्तों आज में आपको सनातन धर्म से जुड़े 4 ऐसे रहस्य बताता हूँ जो आज तक सुलझाये नही जा सके है अगर जानकारी पसंद आये तो मेरे चैनल को सब्सक्राइब जरुर करना इच्छाधारी नाग संजीवनी बूटी सोमरस क्या है पुनर्जन्म की धारणा ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright.
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भारत में देखा गया था पहला UFO (उड़नतश्तरी) first ufo found in india
 
02:00
ufo यानी अन-आइडेंटिफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट शब्द पहली बार 1940 के दशक में निर्मित किया गया था ये ऐसी वस्तुओं को दर्शाने या बताने के लिए प्रयुक्त किया गया था जिनके उस दशक में बहुतायत में देखे जानें के मामले प्रकाश में आए। तब से लिकर अब तक इन अज्ञात वस्तुओं के रंग-रूप में बहुत परिवर्तन आया है लेकिन ufo शब्द अभी भी प्रयोग में है और ऐसी उड़ती वस्तुओं के लिए प्रयुक्त होता है जो दिखनें में किसी तश्तरी जैसी दिखाई देती हैं और जिन्हें धरती की आवश्यकता नहीं होती। ...भारत सहित पुरे विशव में यूएफओ ((UFO) देखे जाने की घटनाएं सुनने में आती है। 3 oct, 2014 को जेट एयरवेज की एक पायलट ने शुक्रवार दोपहर आसमान में एक (यूएफओ) देखने का दावा किया पायलट ने दावा किया था कि लगभग 26,300 फुट की ऊंचाई पर वह ऑब्जेक्ट चमक रहा था। उस समय प्लेन 26,000 फुट की ऊंचाई पर 310 डिग्री के ऐंगल से उड़ रहा था। पायलट ने ऑब्जेक्ट का रंग हरा और सफेद बताया था । हालांकि अधिकतर घटनाओं की तरह इस घटना की भी कोई फोटो या वीडियो उपलब्ध नहीं है इसी वर्ष भारत-चीन सीमा पर लद्दाख सेक्टर में यूएफओ देखा गया था । सेना मुख्यालय को स्थानीय लोगों ने इसकी जानकारी दी है। इसके बाद सेना के जवानों ने भी इसे देखा। यूएफओ ((उडऩे वाली अज्ञात चीज)) भारत-चीन की सीमा में करीब पांच घंटे तक पीली आभा के साथ उड़ता रहा। उसके बाद गायब हो गया। इस संबंध में साइंस रिसर्च इंस्टीट्यूट का कहना है कि यह यूएफओ नहीं बल्कि बृहस्पति और शुक्र गृह हैं। इसके अलावा 12 जुलाई को शामली में भी आकाश में यूएफओ ((UFO) देखे जाने की घटना हुई जिसकी की तस्वीर भी खींची गई। यह यूएफओ ((UFO) स्वयं खगोलविदों ने देखा था।
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ऐसे रहस्यमयी प्राणी जिन्होंने पूरी दुनिया को दहशत में डाल दिया था ! !
 
06:23
ये दुनिया रहस्यों की दुनिया है ,दुनिया भर के अजीब जीव जिन्होंने एक समय में कौफ कायम कर दिया था खतरनाक जानवर किसी और समय से समय यात्रा करके आये थे या इनके पीछे क्या रहस्मयी कहानी थी कोई नही जानता ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright. music credit - Darkest Child var A Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/
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इंसान और भगवान् में कोई अंतर नही रहेगा अगर ये रहस्य सुलझ गए तो !
 
06:36
धरती पर अनगिनत रहस्य है और उससे भी ज्यादा रहस्य समुन्द्र में छुपा है लेकिन इनसे कई गुणा ज्यादा रहस्मयी अन्तरिक्ष है जहा अनगिनत रहस्य छुपे हुए है नमस्कार दोस्तों आज मैं आपको ऐसे ही रहस्यो के बारे में बताने जा रहा हूँ जिनकी खोज जारी है और जिनके खुलने पर इंसान ही नहीं, धरती का संपूर्ण भविष्य बदल जाएगा। ALL footage used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright.
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हमारी धरती से बड़ा तो उनका अन्तरिक्ष यान है , चाँद के आकर के होते है एलियन !!
 
05:45
दुनिया भर में लोगो को यह जानने की इच्छा रहती है के की क्या हमारी पृथ्वी के आलावा भी कहीं जीवन है लेकिन ये भी सच है के सृष्टि की सरंचना मानव मस्तिष्क की सोच और समझ से परे है इस तरह से हो सकता है पृथ्वी का अंत !! https://www.youtube.com/watch?v=aHC7an48CHI&t=13s इंसान और भगवान् में कोई अंतर नही रहेगा अगर ये रहस्य सुलझ गए तो ! https://www.youtube.com/watch?v=OL-1X0pEjnM&t=17s ALL footage used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright.
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विचित्र समुन्द्र की विचित्र जानकारी !
 
05:37
vichitr samundr ki vichitr jaankari Know About Ocean Formation Strangest Things about Ocean Background Music: Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License: https://creativecommons.org/licenses/...
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क्या समुन्द्र की निचे पाताल लोक में है एलियंस की दुनिया ??
 
06:36
दोस्तों हमारी पृथ्वी के करीब 70 प्रतिशत हिस्से पर समुदर है और प्रथ्वी पर जितने भी परकार के जीव जंतु है उनमे से 90 प्रतिशत जीव समुंदरी जीव है मतलब वे समुन्द्र में रहते है और मानव सहित सिर्फ 10 % जीव है धरती पर वास करते है समुद्र बेहद रहस्मयी होते है इंसान ने आज तक सिर्फ 5 प्रतिशत समुन्द्र की ही खोज की है समुद्र का 95 प्रतिशत हिस्सा अभी भी हमारे लिए अनजाना है कुछ वैज्ञानिको का तो यहाँ तक मानना है के हम चाँद के बारे ज्यादा जानते है और समुन्द्र के बारे में कम तो दोस्तों आज में आपके लिए 3 ऐसी ही अनसुलझे समुंदरी रहस्य लेके आया हु जिन्हें जानकार आप दंग रह जायेंगे अगर जानकारी पसंद आये तो मेरे चैनल को सब्सक्राइब जरुर करना ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright. music credits - Mystery by GoSoundtrack http://www.gosoundtrack.com/ Creative Commons — Attribution 4.0 International — CC BY 4.0 https://creativecommons.org/licenses/... Music provided by Audio Library https://youtu.be/8TKy9bzrk24
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इस पानी को जिसने भी छुआ वो पत्थर का बन गया ! Natron Lake in hindi !
 
02:38
दोस्तों आपने किस्से कहानियो में जरुर के किसी साधू या संत के पास ऐसी शक्तिया या श्राप था जिससे वो किसी भी जिन्दा जीव या इंसान को पत्थर में बदल देता था लेकिन लेकिन क्या आपने ऐसी झील के बारे में सुना है जिसके पानी को जो भी छुता है वो पत्थर बन जाता है? आज मैं आपको एक ऐसी ही झील के बारे में बताने जा रहा हाउ जिसके पानी को कोई अगर गलती से छू ले तो वो पत्थर का बन जाता है अगर जानकारी पसंद आये तो मेरे चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलना दोस्तों यह झील है उत्तरी तंजानिया में और इसका नाम है नेट्रान लेक। ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright.
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आप दुनिया के सबसे खुशनसीब इंसान है !!
 
10:37
दोस्तों दुःख और निराशा हमारे जीवन का अभिन्न अंग है कई बार आपको लगता होगा के आपका समय बहुत ख़राब चल रहा है आप बहुत हताश हो जाते होंगे , लाख कोशिशे करते होंगे अपने दुःख से उभरने की लेकिन रह रहकर वो बुरे पल आपको याद आते ही रहते होंगे लेकिन आज इस विडियो को देखकर आप समझ पाओगे के हमारा वर्तमान समय पृथ्वी के इतिहास का सबसे बेहतरीन समय है और आप बेहद खुशनसीब इंसान है जो इस समय में पैदा हुए music credit - Anguish Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License
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ऐसी जगह, जहाँ जाना सख्त मना है. Places On Earth Where You Not Allowed
 
07:21
दोस्तों आज विज्ञान इतनी तरक्की कर चूका है के हम इंसानों के कदम चाँद तक पहुँच चुके है लेकिन हमारी दुनिया में अद्भुत और अविश्वसनीय चीजो की कोई कमी नही है आज भी प्रकृति की भव्यता और इंसानों की सोच को समझ पाना कई बार बेहद मुश्किल हो जाता है हम इंसानों ने अपनी तेज बुद्धि और हिम्मत की वजह से कई बेहद दुर्गम इलाको को फ़तेह किया है लेकिन फिर भी दुनिया में बहुत सारी ऐसी जगह है जहा पहुँच पाना आम इंसानों की पहुँच से बाहर है तो दोस्तों आज के इस विडियो में मैं आपको कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में बताऊंगा जहाँ या तो आप जा नही सकते या फिर आपको जाना ही नही चाहिए music credit - Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/
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चमार जाति का इतिहास
 
03:54
हिन्दू समाज की सबसे बड़ी समस्या है जातपात का भेदभाव इसी भेदभाव की वजह से हिन्दू हजारो सालो तक गुलाम रहे है जब हिनुस्तान पे मुगलों ने हमला किया तो उसका मिलके सामना करने की बजाय हम लोग बंट गए के जो क्षत्रिय है वो लडेगा जो नीची जाती से वो बहार बैठ कर तमाशा देखेगा असल में जिन्हें हम नीची जाती समझते रहे है और चमार कहके सम्भोधित करते है और जिने कुछ समय पहले तक हिन्दू छूने से भी कतराते थे , असल में वो चंवरवंश के क्षत्रीय हैं इस बात का खुलासा डॉक्टर विजय सोनकर की एक पुस्तक – हिन्दू चर्ममारी जाति एक स्वर्णिम गौरवशाली राजवंशीय इतिहास में हुआ है। इस किताब में डॉ विजय सोनकर ने लिखा है कि विदेशी विद्वान् कर्नल टॉड ने अपनी पुस्तक राजस्थान इतिहास में चंवरवंश के बारे में बहुत विस्तार पूर्वक वर्णन किया है। इतना ही नहीं महाभारत के अनुशासन पर्व में भी इस वंश का उल्लेख किया गया है। वर्ण व्यवस्था को क्रूर और भेद-भाव भरने वाले लोग विदेशी आक्रमणकारी थे! जब भारत पर तुर्कियों का शाशन था, उस सदी में इस वंश का शासन भारत के पश्चिमी भाग में था और उस समय उनके प्रतापी राजा चंवर सेन थे। आज के समाज में जिनको चमार बुलाया जाता है, इतिहास में कहीं भी उनका कोई उल्लेख नहीं है। लेकिन प्राचीनकाल में ना तो यह शब्द पाया जाता है, ना हीं इस नाम की कोई जाति है। चमार शब्द का उपयोग सबसे पहली बार सिकंदर लोदी ने किया था। मुस्लिम आक्रमणकारीयो के धार्मिक उत्पीड़न का सबसे पहले जवाब देने की पहल इस जाती ने की थी …. उन्हें दबाने के लिए सिकंदर लोदी ने बलपूर्वक उन्हें चरम के काम में धकेल दिया था। और उनका अपमान करने के लिए पहली बार उनके लिए “ चमार “ शब्द का उपयोग किया था। इस जाती के गुरु संत रैदास थे जिन्होंने सारी दुनिया के सामने मुल्ला सदना फ़क़ीर को लड़ाई में हरा दिया था। मुल्ला फ़क़ीर ने तो अपनी हार मान ली और वह हिन्दू बन गए थे, लेकिन सिकंदर लोदी गुस्से से आग बबूला हो गए। सिकंदर लोदी ने संत रैदास को जेल में डाल दिया था, पर जल्द ही चंवर सेन के वीरों ने दिल्ली को चारो ओर से घेर लिया और सिकंदर लोदी को संत रैदास को छोड़ना पड़ा। इस वर्तमान पीढ़ी की विडंबना देखिये की हम इस महान संत के बलिदान से अनभिज्ञ हैं। कमाल की बात तो यह है कि इतने ज़ुल्म सहने के बाद भी इस वंश के वीर हिंदु ही बने रहे और उन्होंने इस्लाम को नहीं अपनाया गलती हमारे समाज में है। हम हिन्दुओं को अपने से ज्यादा भरोसा वामपंथियों और अंग्रेजों के लेखन पर है। उनके इस झूठ के चलते हमने अपने भाइयों और दोस्तों को अछूत बना लिया। आज हमारा हिन्दू समाज अगर टिका हुआ है, तो उसमें बहुत बड़ा बलिदान इस वंश के वीरों का है। जिन्होंने नीचे काम करना स्वीकार किया, पर इस्लाम धर्म को नहीं अपनाया। उस समय या तो आप इस्लाम को अपना सकते थे, या सिर्फ मौत को गले लगा सकते थे , यह पढने के बाद अब तो आपको विश्वास हो जाना चाहिए की हमारे बीच कोई भी चमार अथवा कोई अछूत नहीं है, हम सब एक जैसे है।
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क्या होता है बादल का फटना ! ! What is Cloud Bursting ! !
 
05:15
बादल फटने की अधिकतर आपदाएं पहाड़ी क्षेत्रों में ही होती हैं। इस तरह की घटना में भारी नमी से लदी हवा अपने रास्ते में खड़ी पहाड़ियों से टकराती है जिससे एक खास तरह के बादलों का निर्माण होता है। नमी से भरे इन बादलों को ऊपर की ओर धकेलने वाली वायु जब कमजोर पड़ जाती है तो अचानक ही इन बादलों से मूसलाधार बारिश शुरू हो जाती है जिसे बादल का फटना कहते हैं। मतलब बादलों के फटने के लिए खास तरह के बादल जिम्मेदार होते हैं। music credit - "Malicious" Kevin MacLeod (incompetech.com) Licensed under Creative Commons: By Attribution 3.0 License http://creativecommons.org/licenses/by/3.0/ ALL footage and picture used is either done under the express permission of the original owner, or is public domain and falls under rules of Fair Use. We are making such material available for the purposes of criticism, comment, review and news reporting which constitute the 'fair use' of any such copyrighted material as provided for in section 107 of the US Copyright Law. Not withstanding the provisions of sections 106 and 106A, the fair use of a copyrighted work for purposes such as criticism, comment, review and news reporting is not an infringement of copyright.
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द रियल बाहुबली !! महाराणा प्रताप !!!!
 
16:25
बचपन में शिक्षा लेते समय एक बार प्रताप के भाई शक्तिसिंह के ऊपर बाघ ने हमला कर दिया था डर के मारे शक्ति सिंह हिल भी नही पा रहे थे और ना ही उन दोनों के गुरु शक्ति सिंह को बचने के लिए कुछ कर पा रहे थे तभी जैसे ही बाघ ने शक्ति सिंह के ऊपर छलांग लगाईं तो प्रताप ने बिजली सी फुर्ती देखते हुए एक हाथ से शक्ति सिंह को धकेलते हुए दुसरे हाथ से भाला उठाकर बाघ के साइन में भोंक दिया और हवा में ही बाघ का काम तमाम कर दिया माना जाता है के महाराणा प्रताप का कद 7 फीट 5 इंच था और वजन 135 किलो उनका भाला 81 किलो का था और उनके सीने का कवच 72 किलो का एक सामान्य इंसान इतना वजन उठा भी नही सकता लेकिन महाराणा प्रताप भाले , कवच ,और अपने ढाल समेत करीब 208 किलो वजन लेकर युद्ध के मैदान में जाते थे प्रताप ने महारज बनते ही मुहम्मद जल्लालुद्दीन अकबर के हाथो हारे गए अपने पिता राणा उदय सिंह के राज्य चितौड़ को वापिस हासिल करने का प्रण किया उन्होंने सोगंध लेते हुए कहा के जब तक मेवाड़ का चप्पा-चप्पा भूमि को इन विदेशियों से स्वतंत्र नहीं करा लूँगा, चैन से नहीं बैठूँगा। प्रताप उन दिनों हल्दीघाटी में कुम्भलगढ़ के किले में रहा करते थे जो चारो और पहाडियों से गिरा हुआ था उन्होए अपने सैनिको से कहा एक भी शत्रु सैनिक यहाँ से जीवित बचकर नहीं जा पायेगा. हम एक एक को कुमाल्मेर की पहाड़ियों में दफ़न कर देंगे. आओ प्रतिज्ञा करें की हम एक एक सैनिकों को मुगलों के पच्चीस पच्चीस सैनिकों के सिर काटने है, हमारे जीते जी शत्रु हमारी मातृभूमि पर कदम नहीं रख सकेगा, महाराणा प्रताप की जोरदार आवाज से सैनिकों में प्रोत्साहन भरा जाने लगा,सबने जोरदार अपने तलवारे खिंचीली और इस तरह से हल्दीघाटी का युद्ध आरम्भ हुआ भीलो का समूह जहर बुझे तलवार से मुग़ल सेना का संहार करने लगी. पहले ही हमले में राणा प्रताप ने मुग़ल सेना के छक्के छुड़ा दिए, देखते ही देखते मुग़ल सेना की लाशे बिछनी लगी. मुग़ल सेना में हडकंप मच गया तो उन्होंने तोंपे चलाना शुरू कर दिया. तोंपो के गोले जब आग उगलने लगे तो राणा प्रताप के सेना के पास मुग़ल सेना के तोपों का कोइ जवाब ना था. उनकी ढालें, तलवारे, बरछे और भाले उनके तोपों के आगे बौने पड़ने लगे. अचानक से लड़ाई का रुख ही बदल गया और राजपूतों की लाशे बिछनी लगी. अपने जांबाज सैनिकों के लाशों के अम्बार देखकर महाराणा प्रताप गुस्से से आग बबूला हो गए ऐसी में राणा प्रताप अकेले ही पूरी फ़ौज बन गए थे अपनी तलवार के वार से वो मुगलों को गाजर मुली की तरह काट रहे थे उनकी विशाल ढाल को मुगलों के तोप के गोले भी भेद नही पा रहे थे महाराणा प्रताप एक बेहद खुबसुरत और विशाल ,, सफ़ेद रंग के घोड़े चेतक पे सवार होक शत्रुओं का संहार करते करते मानसिंह को ढूँढने लगे. देखते ही देखते उन्होंने सैंकड़ो मुगलों की लाशे बिछा दी वो जिधार निकल जाते थे मुग़ल सेना में हाहाकार मच जाता था, मुग़ल युद्ध भूमि को छोड़ भागने को मजबूर हो जाते थे, मुग़ल सेना अब उनसे सीधे सीधे लड़ाई करने में भयभीत हो रही थी महाराणा प्रताप मुग़ल सेना को चीरते हुए सेना में बहुत अन्दर तक जा चुके थे जहाँ पर उनके अलावा उनका कोई दूसरा सैनिक मौजूद नही था इस मौके का लाभ उठाकर सैकड़ो मुग़ल सैनिको ने उनपर एक साथ हमला कर दिया लेकिन महाराणा जैसे वीर को काबू करना बेहद कठिन था उनकी विशाल कद काठी के सामने सभी मुग़ल बच्चे दिखाई पड़ते थे जब वे भाला फेंकते तो वो भाला एक के बाद एक कई सारे मुगलों के सीने को चीर देता था उनके तलवार का वार इतना भयंकर होता था के मुग़ल सैनिक की ढाल को भी चीरते हुए वह उनके शरीर के दो टुकड़े कर देते थे तभी एक तलवार महाराणा की भुजा से आकर लगी ,,उनका प्रिय घोडा भी मुगलों की तलवारों के प्रहार से घायल हो चूका था लेकिन अश्वों की माला कहा जाने ये वाला अश्व दुसरे घोड़ो की तरह घायल हो जाने पर युद्ध भूमि में थककर बैठ जाने वालों में से नहीं था. वो लगातार चारो और घूम कर महाराणा प्रताप का साथ दे रहा था उसी समय एक बरछी भी महाराणा के शरीर में धंस गयी और वो बुरी तरह से घायल हो गए महाराणा का घोडा चेतक अत्यंत संवेदनशील और समझदार था, अपने स्वामी के प्राण को संकट में देख तुरंत ही वो महाराणा को युद्ध क्षेत्र से दूर ले गया युद्ध के मैदान से निकलने के बाद चेतक की गति कुछ धीमी पड़ गयी थी..चेतक के पैर से भी रक्त की धारा बहे जा रही थी. महाराणा प्रताप लगभग लगभग अछेत की स्थिति में हो चुके थे अपने स्वामी को मुर्छित होते देख रहा था लेकिन जैसे ही चेतक नाले के किनारे पर पहुंचा उसने अपनी सारी बची हुई ताकत लगा दी लेकिन थक जाने की वजह से नाले के उस पार जाते ही चेतक जमींन पर गिर गया और दुबारा फिर कभी नहीं उठ पाया, महाराणा प्रताप तो सकुशल थे पर एक मूक जीव ने अपने स्वामीभक्ति दिखाते हुए वीरगति को प्राप्त किया और अपना नाम इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में लिखवा गया. \refrences music - https://www.youtube.com/watch?v=kt-2jO4s1GI animations - https://www.youtube.com/watch?v=KYXof-c6owA script - http://www.hindpatrika.com/maharana-pratap-history-in-hindi
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