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Symptoms of Depression in Hindi - अवसाद के लक्षण | Depression Symptoms | Signs of Depression
 
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Symptoms of Depression - अवसाद के लक्षण | Depression Symptoms in Hindi | Signs of Depression in Hindi Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ डिप्रेशन के लक्षण जानिए और उसे दूर करिए अत्यधिक सिर दर्द – किसी बात के लिए जरुरत से अधिक हमारी चिंता हमारे दिमाग पर बुरा असर डालती है और इसी वजह से हमे सिर दर्द होने लगता है जब हमे किसी समस्या के लिए लगता है कि सब दरवाजे बंद है और कोई समाधान नहीं दिखता है तो अक्सर हम इसके शिकार हो जाते है जिसे सघन उदासी छा जाती है | पाचन क्रिया में असंतुलन – जानकार और बुजुर्ग मानते है हमारी सभी तरह की बीमारियों की शुरुआत हमारे पेट से होती है और जब हम मानसिक तौर पर स्वस्थ नहीं होते तो इसका असर हमारे पाचन क्रिया पर भी पड़ता है इसलिए तो अपने देखा होगा कि लम्बे समय तक डिप्रेशन के दौर से गुजरने वाले लोग अक्सर अपनी सेहत खोने लगते है और यह भी एक डिप्रेशन के लक्षण है | लोगो से मिलने में असहज महसूस करना – ऐसा होता है जब व्यक्ति किसी गहरी चिंता में होता है तो वो बाहरी दुनिया से खुद को तोड़ देना चाहता है और बहुत हद तक कुछ introvert हो जाता है वो दुनिया की और अपने आस पास घटित हो रही चीजों में फिर चाहे वो अच्छी सलाह हो या कोई बुरी घटना रस खोने लगता है और खुद में ही रहने लगता है और यह भी डिप्रेशन के लक्षण है | इन्टरनेट का अधिक इस्तेमाल – इन्टरनेट हमारी जीवनशैली का एक बहुत ही इम्पोर्टेन्ट पार्ट बन गया है जिसके बिना जिन्दगी में हमे सहूलियत कम दिखती है और तनाव से ग्रस्त लोग अपनी जिन्दगी का अकेलापन दूर करने के लिए सोशल साइट्स का इस्तेमाल करते है और धीरे धीरे वो इनकी आदत में शुमार हो जाती है और वो अपना बहुत सा समय इन्हें देने लगते है | ऐसे में व्यक्ति को रियल लाइफ की अपेक्षा वर्चुअल वर्ल्ड को अधिक प्राथमिकता देने लगता है जिसकी वजह से उसे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है | यह भी डिप्रेशन के मुख्य लक्षण है | नींद की आदत में बदलाव – डिप्रेशन से ग्रस्त व्यक्ति की नींद की आदत में बहुत तरह के बदलाव देखने को मिलते है या तो उसे बिलकुल नींद नहीं आती या फिर वो अपनी चिन्ताओ को दूर करने के लिए अधिक नींद का सहारा लेता है और दोनों ही स्थितियां खतरनाक होती है | अत्यधिक संवेदनशील हो जाना – डिप्रेशन से ग्रस्त व्यक्ति छोटी छोटी चीजों के लिए अजीब तरह से रियेक्ट करने लगता है और वह
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आयुर्वेद के अनुसार दिनचर्या - Ayurvedic Daily Routine | स्वस्थ्य दिनचर्या | Healthy Lifestyle Tips
 
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आयुर्वेद के अनुसार दिनचर्या - Ayurvedic Daily Routine | स्वस्थ्य दिनचर्या | Healthy Lifestyle Tips | Health Daily Routine | Dincharya Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ आयुर्वेद के अनुसार दिनचर्या (Daily Routine) - ⦁ आज भारत में लगभग 80% लोग रोगी हैं। आज से 3000 वर्ष पूर्व महर्षि बागभट्ट द्वारा रचित अष्टांग हृदयं के अनुसार, बीमार व्यक्ति ही अपना सबसे अच्छा चिकित्सक हो सकता है, बीमारियों से मुक्त रहने के लिए दैनिक आहार विहार द्वारा स्वस्थ रहने के निम्न सूत्र हैं - ⦁ सुबह उठ कर गुनगुना पानी बिना कुल्ला किए बैठ कर, घूँट-घूँट (Sip-Sip) करके पीये । एक-दो गिलास जितना आप सुविधा से पी सकें, उतने से शुरुआत करके, धीरे-धीरे बढा कर सवा लिटर (1-1/4 Ltr.) तक पीना है । ⦁ भोजनान्ते विषमबारी अर्थात भोजन के अंत में पानी पीना विष पीने के समान है । इस लिए खाना खाने से आधा घंटा पहले और डेढ घंटा बाद तक पानी नहीं पीना । डेढ घंटे बाद पानी जरूर पीना । ⦁ पानी के विकल्प मे आप सुबह के भोजन के बाद मौसमी फलो का ताजा रस पी सकते हैं, दोपहर के भोजन के बाद छाछ और अगर आप ह्रदय रोगी नहीं हैं तो आप दहीं की लस्सी भी पी सकते हैं । शाम के भोजन के बाद गर्म दूध। यह आवश्यक है की इन चीजो का क्रम उलट-पुलट मत करें । ⦁ पानी जब भी पीये बैठ कर पीये और घूँट-घूँट कर पीये । ⦁ फ्रिज (रेफ्रीजिरेटर) का पानी कभी ना पियें । गर्मी के दिनो में मिट्ठी के घड़े का पानी पी सकते हैं । ⦁ सुबह का भोजन सूर्योदय के दो से तीन घंटे के अन्दर खा लेना चाहिए । अपना मनपसंद भोजन सुबह पेट भर कर खाएं । ⦁ दोपहर का भोजन सुबह के भोजन से एक तिहाई कम करके खाएं, जैसे सुबह अगर आप तीन रोटी खाते हैं तो दोपहर को दो खाएं । ⦁ इसके विपरीत शाम को भोजन के तुरंत बाद नहीं सोना । भोजन के बाद कम से कम 500 कदम जरूर सैर करें । संभव हो तो रात का खाना सूर्यास्त से पहले खा लें । ⦁ भोजन बनाने मे फ्रिज, माइक्रोवेव ओवन, प्रैशर कूकर, तथा एल्युमिनियम के बर्तनों का प्रयोग ना करें । ⦁ खाने में रिफाइन्ड तेल का इस्तेमाल ना करें । आप जिस क्षेत्र में रहते हैं वहाँ जो तेल के बीज उगाये जाते है उसका शुद्ध तेल प्रयोग करें, जैसे यदि आपके क्षेत्र में सरसों ज्यादा होती है तो सरसों का तेल, मूंगफली होती है तो मूंगफली का तेल, नारियल है तो नारियल का तेल । ⦁ खाने में हमेशा सेंधा नमक का ही प्रयोग करना चाहिए, ना की आयोडिन युक्त नमक का । ⦁ चीनी की जगह गुड़, शक्कर या धागे वाली मिश्री का प्रयोग कर सकते है । ⦁ कोई भी नशा ना करें, चाय, काफी, मांसाहार, मैदा, बेकरी उत्पादों का उपयोग नहीं करना चाहिए । ⦁ रात को सोने से पहले हल्दी वाला दूध दाँत साफ करने के बाद पीयें । ⦁ सोने के समय सिर पूर्व दिशा की तरफ तथा संबंध बनाते समय सिर दक्षिण दिशा की तरफ करना चाहिए । according to ayurveda daily routine , ayurveda daily routine , dinacharya in ayurveda ,ayurveda dinacharya , ayurvedic tips , daily activities ,my daily routine ,routine ,daily work schedule, the daily life ,best daily routine ,healthy daily routine ,daily routine for good health, daily routine for healthy life ,daily habits ,स्वस्थ्य दिनचर्या, आयुर्वेद के अनुसार दिनचर्या, Ideal Daily Routine, Ayurvedic Daily Routine
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Symptoms of Thyroid in Hindi - थायराइड के लक्षण | Thyroid Symptoms in Hindi | Signs of Thyroid
 
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Symptoms of Thyroid - थायराइड के लक्षण | Thyroid Symptoms | Signs of Thyroid in Hindi | Signs You May Have a Thyroid Problem Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ Symptoms of Thyroid - थायराइड के लक्षण जोड़ों में दर्द - जोडों में दर्द और शरीर में दर्द होना आम लक्षण है। इससे आपको चलने फरने में अधिक पेरशानी महसूस होने लगेगी। बालों का अधिक झड़ना - जब शरीर में थायरॉक्‍सिन लेवल बढ जाता है तो बाल बहुत ज्‍यादा झड़ना शुरु हो जाते हैं। कभी कभी तो गंजापन भी हो जाता है। मोटापा बढना - जब शरीर में थायरायड बढने लगता है तो शरीर बिना खाना खाये ही फूलने लगता है। अगर आपका भी वजन एकदम से बढ रहा हो तो अभी अपना थायरायड चेकअप करवाएं। थकान - जब बिना काम के ही थकान लगे और पिस्‍तर से उठा ना जाए तो समझ लें कि आपका थायरायड हाई हो चुका है। अनियमित पीरियड्स - महिलाओं में थायरायड बढ़ने का आम कारण है, तुरंत तुरंत पीरियड हो जाना। थायरायड ग्रंथी रिप्रोडक्‍टिव हार्मोन को उत्‍तेजित करता रहता है , खासतौर पर इस्‍ट्रोजेन को जो, कि अंडों को काफी जल्‍दी विकसित करता है। गले में सूजन होना - गले में जहां थायरायड ग्रंथी होती है, वह जगह अपने आप ही फूलने लगती है। इसे घेंघा भी बोला जाता है। यह कभी कभी आयोडीन की कमी से भी होता है। डिप्रेशन होना - शरीर में किसी भी प्रकार का हार्मोनल इमबैलेंस होने से इंसान का मूड बदलने लगता है और वह अवसाद के घेरे में आ जाता है। प्रेगनेंसी में परेशानी - थायरायड का हाई लेवल महिलाओं को बाझ बना सकता है। डॉक्‍टर की माने तो वे उन महिलाओं को प्रेगनेंट होने से रोकते हैं जिनका थायरायड बढ़ा हुआ है। हाई कोलेस्‍ट्रॉल - अगर आपका कोलेस्‍ट्रॉल लेवल अच्‍छी डाइट लेने के बावजूद भी सही लेवल तक नहीं आता है तो, थायरायड टेस्‍ट करवाएं। कब्‍ज - जिन्‍हें हाई लेवल का थायरायड होता है उन्‍हें भयंकर कब्‍ज की परेशानी होती है क्‍योंकि यह पाचन तंत्र पर असर डालता है। Symptoms of thyroid in hindi, hypothyroidism , thyroid , thyroid symptoms , thyroid disease , thyroid problems , thyroid cancer ,hypothyroidism symptoms , thyroid levels , low thyroid , symptoms of hypothyroidism , Signs of thyroid, Thyroid ke lakshan in hindi, Signs You May Have a Thyroid Problem, Self-Test for Thyroid Problems, thyroid in hindi , thyroid problems , natural remedies for thyroid ,natural remedies for thyroid ,hyperthyroidism treatment
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Broken Friendship Quotes | Sad Friendship Quotes | Friendship Breakup Quotes | Part - 1
 
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Broken Friendship Quotes | Sad Friendship Quotes | Friendship Breakup Quotes Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Healthcareforyou.in/ Website - http://www.healthcareforyou.in/ Describe heartache of a friend breakup into words Sometimes, even the best of friendships can fall apart. Whether you and your bestie had a blowup fight or just slowly drifted away over time, platonic relationships can end just like romantic relationships — and they can hurt just as badly. For those times when you’ve lost a good friend and it’s hard to describe what you’re feeling, these poignant friendship quotes put the heartache of a friend breakup into words. 1 Being busy is not an excuse. “No one is really busy. It all depends on what number you are on their priority list.” — Author Unknown 2 Let me explain friendship to you, since you don’t seem to understand. “Friendship means understanding, not agreement. It means forgiveness, not forgetting. It means the memories last, even if contact is lost.” — Author Unknown 3 TRUTH. “I guess what they say is true/Friends come and go/But I never thought that wold apply to you.” — Author Unknown 4 Some people just use you. “Some people aren’t loyal to you. They are loyal to their needs of you. Once their needs change, so does their loyalty.” — Author Unknown 5 Friends can hurt you more than your enemies ever can. “In the end, we will remember not the words of our enemies, but the silence of our friends.” — Martin Luther King, Jr. 6 We both have moved on. “We are neither on good terms or bad. We are no longer anything.” — Author Unknown 7 You’re someone that I used to know. “Somebody asked me if I knew you. A million memories flash through my mind, but I just smiled and said I used to.” — Author Unknown 8 You have to know when to quit. “Sometimes you have to give up on people. Not because you don’t care, because they don’t.” — Author Unknown to be continued.....
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Pimple Treatment in Hindi - Pimple के  लिए  घरेलू उपचार | Home Remedies for Pimples | Acne Treatment
 
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Pimple Treatment - Pimple के लिए घरेलू उपचार | Home Remedies for Pimples in Hindi | Acne Treatment in Hindi | how to cure acne | how to cure pipples Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ Pimple के लिए घरेलू उपचार - 1. खीरा - खीरे में तुरंत मुंहासे को ठीक करने और साफ करने की शक्‍ति होती है। खीरे को कस लें और अपने चेहरे पर एक घंटे के लिए लगाएं और फिर ठंडे पानी से चेहरा धो लें। इससे न केवल पिंपल साफ होता है बल्कि यह पिंपल को होने से रोकता भी है। 2. शहद - इसको पिंपल के दाग वाली जगह पर लगाएं और 45 मिनट तक ऐसे ही रहने दें। इसको सूखने के बाद ठंडे पानी से धो लें। शहद हर प्रकार के दाग को ठीक कर सकता है। 3. गुलाब जल और नींबू का रस - 1 चम्‍मच नींबू के रस में 2 चम्‍मच गुलाब जल मिलाएं। इस घोल से अपने चेहरे को पोंछ लें और 20 मिनट तक ऐसे ही रहने दें। इसको रेगुलर लगाने से चेहरा बेदाग हो जाएगा। 4. चंदर पाउडर और गुलाब जल - इस मिश्रण को रात में सोने से पहले लगाएं और सुबह उठने के बाद धो लें। अगर आपको लगे की चेहरा ड्राइ हो गया है तो चंदन पाउडर में दूध मिला कर लगाएं। 5. आइस क्‍यूब - मुंहासे होने की वजह से त्‍वचा के पोर्स काफी बड़े हो जाते हैं। इसको कम करने के लिए और दाग को हटाने के लिए चेहरे पर 15 मिनट तक बर्फ से मालिश करनी चाहिये। 6. नारियल पानी - इस पानी से मुंह धोने से चेहरे के दाग साफ हो जाते हैं। यह एक घरेलू उपचार है, पिंपल हटाने का। home remedies for pimples , acne treatment , home remedies for acne , best acne treatment , pimple treatment , acne scars , natural acne treatment , acne home remedies , acne scar treatment , pimple remedies , home acne treatment , treatment for pimples , how to treat pimples , how to get rid of spots , how to cure acne , how to cure pimples , treatment for acne ,how to get rid of blackheads , get rid of acne scars
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Foods for Eye Sight - आँखों की रोशनी बढ़ाने वाले आहार | Improve Eyesight | HEALTH FORYOU
 
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Foods for Eye Sight - आँखों की रोशनी बढ़ाने वाले आहार | Improve Eyesight | Home remedies to improve Eyesight | HOW TO IMPROVE YOUR EYESIGHT Please Subscribe, Share and like. Facebook -https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ आज-कल बच्‍चों की आंखें भी बडी़ ही तेजी से खराब हो रहीं हैं और ऐसा केवल उनकी बदलती हुई दिनचर्या की वजह से है क्‍योंकि पहले तो बच्‍चे पार्क और सड़क आदि पर बाहर खेलने चले भी जाते थे पर अब तो कंप्‍यूटर पर लगातार गेम खेलने और पास से टीवी देखने की वजह से वे अपनी आंखों की रौशनी खोते जा रहे हैं। आंखों को निरोगी रखने के लिये विटामिन ए, बी, सी एंव डी विशेष लाभकारी होते हैं। आपको दिन में दो फल और खूब सारी हरी सब्‍जियां तो खानी ही चाहिये क्‍योंकि इसमें आवश्‍यक विटामिन एवं खनिज लवण भारी मात्रा में पाये जाते हैं। यदि शरीर में विटामिन ए की कमी हो गई तो आपको रतौधी तथा धुंधला दिखाई पड़ने लगेगा, कई बार तो इंसान अंधा तक बन जाता है। विटामिन ए पर्याप्‍त मात्रा में लेने से आंखों की रौशनी बनी रहती है। आइये जानते हैं कि आंखों की रौशनी बनाएं रखने के लिये कौन से आहार लेने चाहिये। Foods for Eye Sight - आँखों की रोशनी बढ़ाने वाले आहार हरी पत्‍तेदार सब्‍जियां - पालक का साग, पत्‍ता गोभी तथा हरी पत्‍तेदार सब्‍जियों में कैरोटिनॉइड पाया जाता है जो पीले रंग का पदार्थ होता है और यह मैक्‍युला( रेटिना का क्षेत्र जो कि सेंट्रल विजन के लिये जिम्‍मेदार होता है) को बचाता है। विटामिन ए, सी, ई वाले आहार - ऐसे फल और सब्‍जियां जिनमें अधिक मात्रा में विटामिन ए, सी, ई और बीटा कैरोटीन शामिल होता है, उन्‍हें अपनी डाइट में शामिल कीजिये। पीले रंग की सब्‍जियां हमें दिन की रौशनी में ठीक से देखने की क्षमता देती हैं। लहसुन और प्‍याज - लहसुन और प्‍याज में सल्‍फर भारी मात्रा में पाया जाता है जो कि आंखों के लिये एंटीऑक्‍सीडेंट पैदा करता है। सोया मिल्‍क - सोया मिल्‍क में वसा कम और प्रोटीन अधिक होता है। इसमें महत्‍पूर्ण फैटी एसिड, विटामिन ई और सूजन कम करने वाले तत्‍व होते हैं। अंडा - अंडे में अमीनो एसिड, प्रोटीन, सल्‍फर, लैक्‍टिन, ल्‍युटिन, सिस्‍टीन और विटामिन बी2 होता है। विटामिन बी सेल के कार्य करने में महत्‍वपूण होता है। गाजर और शिमला मिर्च - हरी, लाल, पीली और नारंगी रंग की सब्‍जियों और फलों में अच्‍छा पोषण पाया जाता है और इनमें विटामिन सी तथा ए होता है, जो कि एंटीऑक्‍सीडेंट होते हैं। एंटीऑक्‍सीडेंट से आंखों की सुरक्षा होती है। मेवे - मेवा खाने से हाई विटामिन मिलता है जो कोलेस्‍ट्रॉल को लो रखता है और सेलुलर मेम्‍बरेन में स्थिरता बनाए रखता है। साथ ही यह लीवर में से विटामिन ए को आंखों के प्रयोग के लिये इस्‍तमाल करने के लिये उसे बाहर निकालता है। डेयरी प्रोडक्‍ट - दूध, बटर, मलाई, चीज़ और पनीर आदि, में विटामिन ए की अच्‍छी मात्रा होती है। यदि आंखों में विटामिन ए कि कमी हो गई तो आंखों से रात के समय धुंधला दिखाई पड़ने लगेगा। इसकी कमी आपको अंधा तक बना सकती है। मछली - मछली में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है जो कि छोटी-छोटी खून की नलियों को खराब होने से बचाती हैं। कोशिश करें कि हफ्ते में दो दिन जरुर मछली खाएं।
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Types of Cancer In Hindi | कैंसर के प्रकार | Cancer Types | Different Types Of  Cancer In Hindi
 
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Types of Cancer In Hindi | कैंसर के प्रकार | Cancer Types | HEALTH FORYOU Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ कैंसर के प्रकार ( Types of Cancer ) - 1. मुंह का कैंसर ( Mouth Cancer ) 2. फेफड़े में कैंसर ( Lung Cancer ) 3. स्तन कैंसर ( Breast Cancer ) 4. हड्डियों में कैंसर ( Bone Cancer ) 5. स्किन कैंसर ( Skin Cancer ) 6. ब्लड कैंसर ( Blood Cancer ) 7. पेट में कैंसर ( Stomach Cancer ) 8. दिमाग में कैंसर ( Brain Cancer ) 9. लीवर कैंसर ( Liver Cancer ) 10. गर्भाशय कैंसर ( Uterus Cancer ) Types of Cancer, Types of Cancer In Hindi, Cancer Types, कैंसर के प्रकार , skin cancer, melanoma, liver cancer , thyroid cancer,bone cancer, brain cancer , cancer , breast cancer , what is cancer, cancer symptoms , symptoms of cancer , signs of cancer , uterine cancer , symptoms of cancer in hindi ,cancer symptoms, lung cancer symptoms , breast cancer symptoms, throat cancer symptoms, symptoms of ovarian cancer, symptoms of lung cancer , symptoms of breast cancer, symptoms of colon cancer , blood cancer symptoms
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Symptoms of Diabetes in Hindi - मधुमेह के सामान्य लक्षण | Signs of Diabetes | Diabetes Symptoms
 
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Symptoms of Diabetes - मधुमेह के सामान्य लक्षण | Signs of Diabetes | Diabetes Symptoms | What are the symptoms of diabetes | Signs and symptoms of diabetes Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ मधुमेह के लक्षणों को ऐसे पहचाने- 1. थकान महसूस होना- मधुमेह के शुरुआती दौर में आप सारा दिन थकान महसूस करेगें। सुबह उठते ही आपको ऐसा लगेगा कि आपकी नींद पूरी नहीं हुई है और शरीर में थकान सी महसूस होगी। इससे पता चलता है की खून में शुगर का लेवल लगातार बढ़ रहा है। 2. लगातार पेशाब लगना और अत्‍यधिक प्‍यास लगना- इस बीमारी में व्‍यक्ति को बार बार प्‍यास और पेशाब लगती है। अक्‍सर लोग इस चक्र को हल्‍के में ले लेते हैं और समझ ही नहीं पाते कि उनकी बीमारी की शुरुआत अब हो चुकी है। 3. आंखें कमज़ोर होना- मधुमेह में आंखों पर काफी बुरा असर देखने को मिलता है जिसमें रोगी को धुंधला दिखाई पडने लगता है और किसी भी वस्‍तु को देखने के लिए उसे आंखों पर ज़ोर डालना पडता है। 4. अचानक वज़न कम होना- वज़न में तेज़ी के साथ कमी आ जाना और साथ ही साथ ज़ोरों की भूंख भी लगना मधुमेह का सबसे बड़ा लक्षण है। 5. घाव का जल्‍दी न भरना- अगर आपके शरीर में चोट या कहीं घाव लग जाए तो यह जल्‍दी से नहीं भरेगा। चाहे कोई भी छोटा सी खरोंच क्‍यों ना हो, वह धीरे-धीरे बडे़ घाव में बदल जाएगी और उसमें संक्रमण के लक्षण साफ-साफ दिखाई देने लग जाएगें। 6. तबियत खराब रहना- शरीर में किसी भी तरह का संक्रमण जल्दी से ठीक ना होगा। यानी की अगर आपको वायरल, खॉसी-जुखाम या कोई भी बैक्‍टीरियल इंफेक्‍शन हो गया हो तो आपको राहत नहीं मिलेगी। कान का संक्रमण जो खुद ही ठीक हो जाना चाहिए, उसमें भी आपको एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग करना पड़ेगा। 7. आनुवंशिक कारण- अगर आपके परिवार में किसी अन्‍य सदस्‍य को भी मधुमेह हो चुका है या है। तब भी आपको सावधान हो जाने की जरुरत है क्‍योंकि यह बीमारी आनुवंशिक होती है। symptoms of diabetes , diabetes symptoms , diabetes , signs of diabetes , diabetes mellitus , type 2 diabetes symptoms , what are the symptoms of diabetes , diabetes symptoms in women , what is diabetes ,symptoms of type 2 diabetes , diabetes care , blood sugar levels , signs and symptoms of diabetes, signs of diabetes in women , diabetic diet ,
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How To Improve Eyesight -  दृष्टि में कैसे सुधार करें ? | Exercise for Eyes  | Improve Eyesight
 
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How To Improve Eyesight - दृष्टि में कैसे सुधार करें ? | Exercise for Eyes | Improve Eyesight | Home remedies to improve Eyesight | HOW TO IMPROVE YOUR EYESIGHT | कैसे आँखों की रोशनी तेज करें Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ 1. एक पेंसिल लें, और बीच में कहीं एक निशान बना दें: पेंसिल के साइड में एक अक्षर, संख्या या डॉट बना दें। इस अभ्यास में, आप पेंसिल को आंखों से दूर या आंखों की ओर चलाएंगे और डॉट पर ध्यान केंद्रित करेंगे। पेंसिल पुश-अप, डबल विजन और क्रॉस्ड आई को सही करने के लिए माना गया है,[१] लेकिन यह अन्य मुद्दों में भी प्रयोग किया जा सकता है और आपको नुकसान नहीं पहुंचाएगा। यह फ्री, दर्द रहित है, और आपको केवल ध्यान केंद्रित करना है। 2. एक हाथ की दूरी पर, अपने चेहरे के सामने पेंसिल पकड़ें: पेंसिल को खड़ा रखें, ताकि रबड़ छत या फर्श की तरफ इशारा कर रही हो। यदि आपके साथ कोई और व्यायाम में मदद करने के लिए है और पेंसिल पकड़ सकता है, तो अपना हाथ बाहर निकालकर दूरी निर्धारित करें कि इसे कितनी दूर होना चाहिए। 3. पेंसिल पर बनाए गए निशान पर अपनी आँखें केंद्रित करें: तब तक अगले चरण के लिए आगे नहीं बढ़ें, जब तक आपकी आँखें मजबूती से केंद्रित नहीं हो जाएँ। 4. धीरे-धीरे अपने चेहरे की ओर पेंसिल ले जाएँ, निशान पर ही अपना ध्यान केंद्रित रखें: अपनी नाक की ओर, एक सीधी रेखा में इसे स्थानांतरित करने का प्रयास करें। जब पेंसिल करीब आती है, आँखों को उसी स्तर तक केंद्रित रखने के लिए समायोजित करें। 5. जब आपको दो पेंसिल दिखने लगें बंद कर दें: जैसे ही पेंसिल डबल हो जाएँ, इसे अपने चेहरे के करीब लाना बंद कर दें। 6. कुछ सेकंड के लिए कही और देखें, या अपनी आँखें बंद कर लें: सिर या पेंसिल को चलाए बिना एक पल के लिए पेंसिल से कहीं दूर अपना ध्यान केंद्रित करें। अपने दृश्य क्षेत्र में किसी और चीज पर ध्यान दें, और अगर आप कम से कम 5 सेकंड के लिए पेंसिल पर देख भी लेते हैं, तो कोई बात नहीं। अगर आप नहीं कर पा रहे हैं, तो अपनी आँखें बंद कर लें। 7. वापस पेंसिल को देखें: एक बार आपकी आंखें ताजा हो जाएँ, फिर पेंसिल पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें, ताकि आपको डबल नहीं दिखें। अगर आपको अभी भी दो पेंसिल दिख रही हैं, तो कुछ और सेकंड के लिए अपनी आँखें को आराम दें और फिर कोशिश करें। अगर आपको अभी भी अपनी दूसरी कोशिश के बाद दो पेंसिल दिखती हैं, तो निराश मत हो - आप कर पाएंगे! बस अगले कदम पर चलें। 8. धीरे-धीरे अपने चेहरे से पेंसिल को दूर ले जाएँ: जब पेंसिल वापस आती है, तो आप पेंसिल पर बनाए निशान पर अपना ध्यान केंद्रित रखें। इसे फिर से हाथ की दूरी तक चलाते रहें। 9. व्यायाम को दोहराएँ: जब पेंसिल पुश अप को आप बार-बार एक दैनिक दिनचर्या के भाग के रूप में करते हैं, तब वे सबसे अच्छा काम करेंगे। पहली बार में इसे एक दिन में पांच मिनट के लिए निर्धारित करें, फिर 10 तक बढ़ाने की कोशिश करें। यदि आप समय का ट्रैक रखने में या मनोरंजन के लिए संघर्ष करते हैं, तो आप अभ्यास करते समय संगीत सुन सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक गाना मोटे तौर पर पांच मिनट के बराबर है, और दो गाने मोटे तौर पर 10 मिनट के बराबर हैं। How To Improve Eyesight, eye exercises , improve eyesight, How To Improve Eyesight naturally, eye exercises to improve vision , improve eyesight naturally , eyesight improvement , how to increase eyesight , eye exercises for myopia , exercise for eyes, Eye Sight, चश्मा छुड़ाने के लिए घरेलु उपाय, Foods for Eye Sight, How To Improve Eyesight Without Glasses, Yoga For Eye Exercises, Vision Improvement, Improve Vision, Natural Vision Improvement
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पथरी - Kidney Stone | Kidney Stone Treatment in Hindi | Kidney Stone Symptoms | Kidney Stones Causes
 
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पथरी : कारण, लक्षण, बचाव तथा घरेलू उपाय - Kidney Stone : Causes, Symptoms, Prevention and Treatment | Kidney Stone Treatment | Pathri Ka Ilaz | गुर्दे की पथरी | گردے پتھر | home remedies for kidney stones Please Subscribe, Share and like. Website - http://www.healthcareforyou.in/ पथरी (Kidney Stone) - गुर्दे की पथरी मूत्रतंत्र की एक ऐसी स्थिति है जिसमें, गुर्दे के अन्दर छोटे-छोटे पत्थर के बराबर कठोर वस्तुओं का निर्माण होता है। गुर्दें में एक समय में एक या अधिक पथरी हो सकती है। सामान्यत: ये पथरियाँ बिना किसी तकलीफ मूत्रमार्ग से शरीर से बाहर निकाल दी जाती हैं, किन्तु यदि ये पर्याप्त रूप से बड़ी (2-3 मिमी) हो जाएं, तो ये मूत्रवाहिनी में अवरोध उत्पन्न कर सकती हैं। इस स्थिति में मूत्रांगो के आसपास असहनीय पीड़ा होती है। यह स्थिति आमतौर से 30-60 वर्ष के आयु के व्यक्तियों में पाई जाती है और स्त्रियों की अपेक्षा पुरूषों में 3 गुना अधिक पाई जाती है। बच्चों और वृद्धों में मूत्राशय की पथरी ज्यादा बनती है, जबकि वयस्को में अधिकतर गुर्दो और मूत्रवाहक नली में पथरी बन जाती है। पथरी होने के कारण - खान-पान की गलत आदतों के कारण हमारे शरीर का पेशाब गाढ़ा होने लगता और इसके कण हमारे शरीर में जमा होने लगते हैं, कुछ समय बाद यह बड़े होकर पथरी का रूप ले लेते हैं। खान-पान की गलत आदतें ही पथरी रोग को न्यौता देती है। बचाव के कुछ उपाय - पर्याप्त जल पीयें ताकि 2 से 2.5 लीटर मूत्र रोज बने। विटामिन-सी की भारी मात्रा न ली जाये। नारंगी आदि का जूस लेने से पथरी का खतरा कम होता है। कोका कोला एवं इसी तरह के अन्य पेय से बचें। आहार में प्रोटीन, नाइट्रोजन तथा सोडियम की मात्रा कम हो। ऐसे पदार्थ न लिये जाएं जिनमें आक्जेलेट् की मात्रा अधिक हो; जैसे चाकलेट, सोयाबीन, मूंगफली, पालक आदि ।
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Winter Foods To Keep You Warm in Hindi | सर्दियों में शरीर में गर्मी पैदा करने के लिए खाद्य पदार्थ
 
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Winter Foods To Keep You Warm | सर्दियों में शरीर में गर्मी पैदा करने के लिए खाद्य पदार्थ | Winter Foods to Generate Body Heat | सर्दी भगाने के लिये खाएं ये आहार Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ सर्दियों में शरीर में गर्मी पैदा करने के लिए अच्छे खाद्य पदार्थ (Best heat generating food for winter) ऐसे खाद्य पदार्थ जो शरीर में गर्मी पैदा करें सर्दियों में खाने से सर्दियां अच्छी लगने लगती है। यहाँ पर कुछ ऐसे पदार्थ दिए गए हैं। सर्दियों में सेहत के लिए लहसुन (Garlic) जिन लोगों को उच्च कोलेस्ट्रोल का खतरा होता है उन्हें डॉक्टर लहसुन खाने की सलाह देते हैं। लहसुन से शरीर में गर्मी पैदा होती है। सर्दियों में आप फ्लू और खाँसी से परेशान हो सकते हैं। लहसुन कीटाणुरोधी होता है। गले की खराश कम करने के लिए लहसुन की 2-3 कलियाँ चबाकर खाएं। शरीर को अंदरुनी रूप से गर्म रखने के लिए शहद (Honey) सर्दियों में जुकाम और खाँसी के लिए दादी माँ एक चम्मच शहद लेने की सलाह देती हैं। शहद से शरीर की प्रतिकार शक्ति बढती है। सर्दियों में हर दिन 1 चम्मच शहद लेने से आप सर्दियों से सुरक्षित रहते हैं। शहद में प्राकृतिक शक्कर होती है और शहद खाने से साधारण चीनी के हानिकारक परिणाम नहीं दिखते। शरीर में गर्मी के लिए अदरक (Ginger) अदरक आपके भोजन का स्वाद बढाने के काम आता है। यह सर्दियों में आपके शरीर को गरम रखता है। कच्चा अदरक या सुखा अदरक नमक के साथ खाने से सर्दियों के दौरान आपका हाजमा सही रहता है। चाय में अदरक डालकर पिने से शरीर में गर्मी बढती है। सर्दी का इलाज दालचीनी में (Cinnamon) दालचीनी स्वाद में मीठी होती है और शरीर में गर्मी बढ़ाती है। खाने में दालचीनी डालने से खाने का स्वाद बढ़ता है। चाय, कॉफ़ी में दालचीनी डालकर ली जा सकती है। सर्दी के उपाय सूखा मेवा से (Nuts) अक्रोड, सिंगदाना और बादाम खाने से शरीर को विटामिन, तंतु मिलते हैं और शरीर में गर्मी बढती है। सर्दियों में सेहत के लिए मेथी (Fenugreek / Methi) यह एक हरी पत्तेदार सब्जी है जो आयरन और फोलिक एसिड (iron and folic acid) से भरपूर होती है। यह शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (red blood cells) का उत्पादन बढाने में सहायता करती है। मेथी ठण्ड में पाई जाने वाली एक काफी जानी मानी सब्जी है जिसका आप कई तरीकों से प्रयोग कर सकते हैं। इससे कई तरह के नमकीन और पराठे बनाए जा सकते हैं तथा इसका प्रयोग अन्य सब्जियों जैसे आलू, गाजर और मटर के साथ किया जा सकता है। सर्दी का इलाज सूखे फल और मेवे में (Dry Fruits And Nuts) सूखे फल जैसे खुबानी (apricot), खजूर, किशमिश, बादाम, काजू, मूंगफली तथा अखरोट ठण्ड के समय आपके शरीर को शक्ति प्रदान करते हैं। ये विटामिन इ (vitamin E), मैग्नीशियम (magnesium) तथा जिंक (zinc) से भरपूर होते हैं तथा आपको बेचैनी, तनाव और थकान से दूर रखते हैं। तिल तथा पटसन के बीज (Sesame, Flax seeds) तिल के बीज कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन और विटामिन इ (calcium, magnesium, iron and Vitamin E) का काफी अच्छा स्त्रोत होते हैं। इनमें ओमेगा 3 फैटी एसिड (omega 3 fatty acid) भी होता है जो त्वचा, बालों तथा दिल के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है। इनका सेवन करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि इन्हें पीसें तथा इसमें आटा, दूध तथा दही मिलाएं। शरीर में गर्मी के लिए पालक (Spinach) पालक एक और प्रसिद्ध पत्तेदार सब्जी है, जो फोलिक एसिड, (folic acid), विटामिन्स (vitamins) तथा मिनरल्स (minerals) का काफी अच्छा स्त्रोत होते हैं। पालक में मौजूद विटामिन सी (vitamin C) आपको फ्लू (flu) तथा सर्दी से बचाने में सहायता करता है। आप इसे अन्य सब्जियों के साथ भी पका सकते हैं, या फिर इसका प्रयोग रोटियाँ तथा पराठे बनाने में भी कर सकते हैं। ठण्ड में पालक का सूप (spinach soup) आपको शक्ति प्रदान करने का काफी प्रभावशाली ज़रिया बन सकता है। winter food , winter meals, winter foods to keep you warm, keep food warm , winter warmer recipes, healthy winter recipes, winter foods, सर्दियों में शरीर में गर्मी पैदा करने के लिए खाद्य पदार्थ, Winter Foods To Keep You Warm in Hindi, keeping food warm on the go , warming food , recipes for winter , warm food , food keep warm , to keep food warm , how to keep food warm , things to keep food warm , food for winter , something to keep food warm , food to keep warm , keep your food warm
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Symptoms of Acidity in Hindi - Acidity के लक्षण | Signs of Acidity | Symptoms of Acid Reflux
 
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Symptoms of Acidity - Acidity के लक्षण | Signs of Acidity in Hindi | Symptoms of Acid Reflux in Hindi | Acidity Symptoms in Hindi Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ गैस के लक्षण – बदहज़मी के लक्षण (Symptoms of Acidity) गैस के लक्षण – सीने में जलन (heartburn) सीने में जलन होने का मुख्य कारण आपके ईसोफेगस (esophagus) में पेट के एसिड का टकराना होता है। यह दर्द कई बार सामान्य से ज़्यादा समय तक भी रह सकता है। गैस के लक्षण – भोजन करने के बाद दर्द (Post-meal pain) कई बार अधिक भोजन कर लेने की वजह से पेट पूरी तरह भर जाता है, और अन्य कोई भी चारा ना होने की वजह से इस भोजन को ऊपर आना पड़ता है, जो बाद में बदहजमी की शक्ल ले लेता है। मुंह में कड़वा स्वाद आना (Bitter taste) बदहजमी का यह भी एक मुख्य लक्षण है। इसका कारण पेट के एसिड का आपके गले तक पहुँच जाना है, जिसके फलस्वरूप आपका मुंह कड़वा हो जाता है। कफ (Cough) साँसों की कई बीमारियाँ, जैसे कफ और खांसी भी सीने में जलन की वजह से ही होती है, जिसका मुख्य कारण पेट के एसिड का आपके फेफड़ों तक पहुंचना है। मुंह में अतिरिक्त थूक का भरना (Extra saliva) अगर आपके मुंह के अन्दर अचानक ही बिना किसी वजह से काफी मात्रा में थूक का उत्पादन होना शुरू हो जाए तो यह भी आपके पेट की बदहजमी की वजह से हो सकता है। बदहजमी होने पर हमारा शरीर इस अजीब द्रव्य को शरीर से निकालने का प्रयास करता है, और इसके लिए थूक का सहारा लेता है। home remedies for acidity , heartburn , acid reflux , home remedies for heartburn , heartburn remedies , heartburn relief , acid reflux remedies, heartburn symptoms , home remedies for acid reflux , heartburn cures , heartburn home remedy, acid reflux cure , acid reflux symptoms , symptoms of heartburn , cure for heartburn , acid reflux treatment , what causes heartburn , symptoms of acidity
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एलर्जी : कारण, लक्षण तथा घरेलू उपाय - Allergies: Causes, Symptoms and Home Remedy | Allergy Ka ilaz
 
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एलर्जी : कारण, लक्षण तथा घरेलू उपाय - Allergies: Causes, Symptoms and Home Remedy | Allergy in Hindi | Allergy Ka ilaj in Hindi | Allergy Treatment in Hindi | الرجی: کی وجہ سے، علامات اور گھریلو اقدامات Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Healthcareforyou.in/ Website - http://www.healthcareforyou.in/ एलर्जी ( Allergy ) - हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति की कुछ बाहरी तत्वों के प्रति अस्वाभाविक प्रतिक्रिया का नाम एलर्जी है। पूरे विश्व में यह रोग तेजी से फैल रहा है। आजकल युवा अवस्था एवं बाल्यावस्था में भी एलर्जी रोग देखने में आता है । एलर्जी प्रतिक्रिया करने वाले तत्वों को एलरजेन कहा जाता है । ये एलर्जी पैदा करने वाले तत्व वास्तव में कोई हानिकारक कीटाणु या विषाणु नहीं बल्कि अहानिकर तत्व होते हैं, जैसे- बादाम, पराग कण या कुछ प्राकृतिक तत्व । एलर्जी का कारण - मौसम – मौसम में आने वाले अचानक बदलाव के कारण एलर्जी हो सकती हैं । अनुवांशिक – अनुवांशिक कारणों से भी कुछ परिवारों में सभी लोगो को एलर्जी के कारण एलर्जिक अस्थमा हो सकता हैं । प्रदुषण – गाड़ी, मोटर और कारखानों से निकलने वाले धुए और केमिकल से हवा और पानी प्रदूषित हो जाते हैं। ऐसे प्रदूषित हवा या पानी से संपर्क में आने से एलर्जी हो जाती हैं । पराग कण – फूलों के छोटे-छोटे पराग कणो के कारण कई लोगो को एलर्जी हो जाती हैं । कीड़े – बिस्तर और घर में रहने वाले छोटे किटक, कीड़े और कॉकरोच के कारण भी एलर्जी हो सकती हैं। सौंदर्य प्रसादन – ज्यादातर लोग आजकल ज्यादा सुन्दर दिखने के लिए कई किस्म के केमिकल युक्त सौंदर्य प्रसाधनो का इस्तेमाल करते हैं । केमिकल युक्त पाउडर, शैम्पू, साबुन इत्यादि से एलर्जी के मामलों में बढ़ोतरी होती हैं । खाद्य पदार्थ – कुछ लोगो को खाद्य पदार्थो ( दूध, खीरा, टमाटर, बदाम, अंडा, मछली ) से भी एलर्जी होती हैं । दवा – दर्दनाशक दवा, सल्फा ड्रग्स, पेनिसिलीन जैसी कई दवा से एलर्जी हो सकती हैं । एलर्जी के लक्षण - एलर्जी का सबसे सामान्य लक्षण हैं - त्वचा पर दाने या फुंसियाँ और गले में घरघराहट या साँस लेने में कठिनाई । अन्य लक्षण एलर्जी के कारण पर निर्भर करते हैं, और इनमें ये शामिल हो सकते हैं - नाक में खुजली, बहती या बंद नाक, साइनस पर दबाव, छींकना, आँखों में खुजली, लाली, सूजन, जलन या पानी बहना, गले में खुजली या खाँसी, स्वाद या गंध में कमी, सिरदर्द, मिजली या उल्टी, पेट में दर्द या मरोड़, दस्त लगना, मुँह के आसपास सूजन या निगलने में कठिनाई
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Causes of White Hairs - सफेद बाल के कारण | Reasons of White Hairs | Why does your hair turn gray?
 
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Causes of White Hairs In Hindi - सफेद बाल के कारणों | Reasons of White Hairs in Hindi| Why does your hair turn gray? Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ उम्र बढ़ने के साथ-साथ बालों का सफेद होना बेहद स्वाभाविक है लेकिन बदलती जीवनशैली, प्रदूषण और खानपान की गड़बड़ी जैसी बहुतेरे बदलावों के फलस्वरूप बालों का कम उम्र में सफेद हो जाना आज हर चार में से एक व्यक्ति की समस्या तो है ही। आप बालों की लाख कलरिंग कर लें, डाइ से छुपा लें या सफेद बाल हटा लें, ये सब आपकी समस्या का प्रभावी हल कभी नहीं हो सकते हैं। इसके लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि इस समस्या की जड़ क्या है, तो ही इससे निपटने में आपको आसानी होगी। क्यों होते हैं समय से पहले सफेद बाल समय से पहले बाल सफेद होने के पीछे कोई एक कारण हो, ऐसा जरूरी नहीं है। इस समस्या के पीछे इन संभावित कारणों में से कुछ भी आपके बालों को समय से पहले सफेद कर सकता है। -खानपान में गड़बड़ी की समस्या से भी बाल समय से पहले सफेद हो जाते हैं। विटामिन बी, आयरन, कॉपर और आयोडीन जैसे तत्वों की कमी से अक्सर यह समस्या होती है। - जो लोग छोटी-छोटी बातों पर बहुत अधिक तनाव लेते हैं उनके बाल भी कम उम्र में ही सफेद हो जाते हैं। इतना ही नहीं, जिन्हें घबराहट, पैनिक अटैक, डर, जलन आदि समस्याएं बहुत अधिक होती हैं, उनके साथ भी यह समस्या अधिक होती है। - कुछ लोगों को यह समस्या अनुवांशिक रूप से होती है। ऐसी स्थिति में इस समस्या से निपटा बेहद मुश्किल होता है। - जो लोग अपनी स्वच्छता में अक्सर कोताही बरतते हैं उन्हें भी यह समस्या अधिक होती है। खासतौर पर अगर बालों की सफाई सही तरीके से नहीं होती है, तो भी यह समस्या हो सकती है। - लंबे समय तक बीमार रहने वाले लोगों के बाल भी जल्द सफेद होते हैं। - पर्यावरण में मौजूद प्रदूषण से भी कम उम्र में बाल सफेद होते हैं। - बहुत अधिक केमिकल वाले शैंपू, केमिकल डाइ या रंग और महक वाले तेल से भी बाल सफेद होते हैं।
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Causes of Blood Cancer in Hindi - रक्त कैंसर के कारण | Reasons of Blood Cancer | Blood Cancer Causes
 
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Causes of Blood Cancer in Hindi - रक्त कैंसर के कारण | Reasons of Blood Cancer in Hindi | Blood Cancer Causes in Hindi | What Causes Blood Cancer in Hindi Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ ब्लड कैंसर कोशिकाओं में उत्पवरिवर्तन के कारण शुरू होता है जो कि खून या अस्थि मज्जा (बोन मैरो) में होता है। यह खून में धीरे-धीरे फैलती है। रक्त कैंसर की ये कोशिकाएं समाप्त नहीं होती हैं, बल्कि और गंभीर हो जाती हैं। रक्त कैंसर के तीन प्रमुख रूप होते हैं : ल्यूकेमिया, लिम्फोमा और मल्टीपल मायलोमा। रक्त कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन 30 साल के बाद रक्त कैंसर होने का खतरा ज्यादा होता है। ब्लड कैंसर होने पर हड्डियों और जोडों में दर्द होने लगता है। बुखार आना, चक्कार आना, बार-बार संक्रमण, रात को पसीना और वजन कम होना रक्त कैंसर के प्रमुख लक्षण हैं। रोग-प्रतिरोधक क्षमता का कम होना ब्लड कैंसर होने का सबसे प्रमुख कारण शरीर की रोग-प्रतिरोधक (इम्यून सिस्टम) क्षमता का कम होना है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली कैंसर के फैलने का कारण होती है। शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने के कारण शरीर में अन्य रोग जैसे गठिया या अर्थराइटिस हो जाता है जो कि ब्लड कैंसर को बढने में मदद करता है। रेडिएशन के संपर्क में आना एक्सर-रे या अन्य रेडिएशन किरणों के संपर्क में आने से रक्त कैंसर होता है। सीटी-स्कैन और रेडिएशन थेरेपी भी ब्लड कैंसर होने के खतरे को बढाते हैं। रेडिएशन की तेज किरणें ब्लड कैंसर के खतरे को दुगना कर देती हैं। रेडिएशन द्वारा किरणें ब्लड सेल्स में प्रवेश करके स्वस्थ कोशिकाओं को समाप्त कर देती हैं जिससे ब्लड कैंसर होता है। कीमोथेरेपी कीमोथेरेपी कराने के बाद रक्त कैंसर होने का खतरा बढ जाता है। लीवर कैंसर या ब्रेस्ट कैंसर का कीमोथेरेपी से इलाज कराने के बाद रक्त कैंसर होने का खतरा बढ जाता है, क्योंकि कीमोथेरेपी की दवाएं कैंसर के सेल्स और अन्य सेल्स (जैसे – खून और बाल के सेल्स में) में अंतर नहीं कर पाते हैं। केमिकल्स के संपर्क में आना आज का वतावरण बहुत ही प्रदूषित है जिसमें वातावरण में कई प्रकार के हनिकारक केमिकल मिले हुए हैं। कीटनाशकों (मच्छर और कॉक्रोच मारने की दवा) और नाइट्रेटयुक्त पानी का प्रयोग करने से ब्लंड कैंसर होने का खतरा बढता है। पेट्रोल और सिगरेट के धुएं से भी ब्लड कैंसर होने का खतरा होता है। संक्रमण एचआइवी व एड्स से ग्रस्त होने पर ब्लड कैंसर होने का खतरा बढ जाता है। क्योंकि एड्स का संक्रमण खून में ज्यादा होता है। इसके अलावा अगर आपको अन्य बीमारियां भी हैं तो उसके संक्रमण से रक्त कैंसर होने का खतरा रहता है। आनुवांशिक अगर घर में किसी को रक्त कैंसर है तो उसके बच्चे को भी कैंसर होने का खतरा बना रहता है। ब्लड कैंसर शरीर में धीरे-धीरे कई सालों में फैलता है। इसलिए इसका प्रभाव घर में अन्य लोगों को खासकर बच्चों को ज्यादा हाता है। उम्र बढना बच्चों की तुलना में ज्यादा उम्र के लोगों को रक्त कैंसर होने की ज्यादा संभावना होती है। रक्त कैंसर 30 साल या उससे अधिक होने पर होता है। रक्त कैंसर के मरीज नौजवानों की तुलना में बूढे लोग ज्यादा हैं। धूम्रपान धूम्रपान करने से शरीर के अंदर निकोटीन प्रवेश करता है जो कि कई प्रकार के कैंसर के लिए उत्तररदायी होता है। धूम्रपान और तंबाकू का सेवन भी रक्त कैंसर के लिए उत्तरदायी होते हैं। blood cancer symptoms , symptoms of blood cancer , causes of blood cancer, blood cancer causes , signs of blood cancer , what causes blood cancer ,cancer of the blood symptoms , blood cancer in hindi , symptoms of blood cancer in women , blood cancer prognosis , symptoms of blood cancer in men , blood cancer symptoms in women , blood cancer treatment in hindi , reason for blood cancer , symptoms for blood cancer , blood cancer stages , signs and symptoms of blood cancer , symptoms of blood cancer in female , blood cancer symptoms in hindi , causes for blood cancer ,cancer in hindi , blood cancer , symptoms of cancer of the blood , symptoms of blood cancer in hindi , blood cancer treatment , blood cancer types
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Home Remedy for Itching in Hindi - खुजली से निपटने के घरेलू उपाय | Treatment For Itchy Skin
 
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Home Remedy for Itching in Hindi - खुजली से निपटने के घरेलू उपाय | Itching - Natural Home Remedies | itch relief | treatment for itchy skin | itchy skin relief | itchy skin Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ इचिंग स्किन (Itching Skin) को मेडिकल भाषा में प्रूरिट्स (Pruritus) कहा जाता है। त्वचा में खुजलाहट के अनुभव को ही इचिंग स्किन कहा जाता है। ऐसी स्थिति में हम स्किन में हो रही खुजली को शांत करने के लिए त्वचा को नोचने तक पर मजबूर हो जाते हैं। स्किन में खुजली की शिकायत के कई कारण हैं। अगर खुजली लगातार हो रही है तो यह लिवर और किडनी की बीमारी भी हो सकती है। वैसे आमतौर पर स्किन मे इचिंग एलर्जी, स्किन रैशज और डर्माटिटीस (चर्म रोग) की वजह से होती है। इचिंग पूरे बदन में या किसी खास एक अंग में भी हो सकती है। एलोपैथी के अनुसार खुजली, माइक्रोब्स यानि अत्यंत सूक्ष्म जीवाणुओं के संक्रमण से होती है। कई-कई दिन तक स्नान नहीं करने, त्वचा पर धूल-मिट्टी जमने से त्वचा में खुजली की शिकायत आम है। डॉक्टरों के मुताबिक खुजली कोई स्वतंत्र रोग नहीं है। शरीर के दूसरे रोगों के कारण, स्किन ड्राई हो जाने या रक्त दूषित होने पर खुजली होती है। ब्लड इंफेक्शन होने पर फोड़े-फुंसियां निकलती हैं जिससे खुजली होती है। पेट में कीड़े (Worm) होने से भी खुजली होती है। खुजली की ईलाज के लिए घरेलू उपाय (Home Remedies of Itching Skin) स्किन को हाइड्रेटेड रखने के लिए मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें बेकिंग सोडा, खुजली की समस्या को कम करता है एंटी इचिंग ओटीसी क्रीम का इस्तेमाल कर सकते हैं ब्लड इंफेक्शन से खुजली होने पर नीम के पत्ते और काली मिर्च के दाने पीसकर पानी के साथ सेवन करें नीम के पत्तों को पानी में उबालकर, छानकर स्नान करने से खुजली खत्म होती है नारियल के तेल में कपूर मिलाकर मालिश करने से खुजली से राहत मिलती है नीम के पेड़ पर पकी निबौली खाने से खुजली कम होती है सुबह-शाम टमाटर का रस पीने से खुजली खत्म होती है डॉक्टर की सलाह से एंटी एलर्जिक दवाई लें खुजली से निपटने के लिए सामान्य टिप्स (Tips for Itching Skin) अधिक फल-सब्जियों का सेवन करें खुजली वाले जगह को ज्यादा नोचें या स्क्रैच नहीं करें साबुन, डिटर्जेंट, और परफ्यूम से दूर ही रहें जाड़े में प्रतिदिन स्नान से पहले सरसों व तिल के तेल से मालिश करें चमेली के तेल में नीबू का रस मिलाकर मालिश करने के बाद स्नान करें
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Benefits of Garlic in Hindi - लहसुन के लाभ | Garlic Benefits | Garlic Health Benefits
 
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Benefits of Garlic - लहसुन के लाभ | Garlic Benefits | Garlic Health Benefits Health Benefits of Garlic | Use of Garlic | Garlic Health Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ जाने लहसुन के गुणकारी प्रभाव- 1. लहसुन का रस लेने से शरीर की सारी गंदगी त्‍वचा के रोम छिद्र के द्रारा बाहर निकल जाती है। 2. दिल के रोगियों के लिए लहसुन बहुत ही अच्‍छा होता है। इसमें सल्‍फाइड पाया जाता है, जो एलडीएल कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कम कर के हार्ट अटैक और ब्‍लॉकेज को रोकता है। 3. अगर आप मधुमेह रोगी हैं, एक लहसुन हर रोज खाएं। यह जड़ी बूटी खून में इंसुलिन के स्तर को बढ़ाती है जिससे स्‍वास्‍थ्‍य अच्‍छा होता है। 4. इसमें पाया जाने वाला एलिसिन संक्रमण से लड़ता है। यह एंटी फंगल होता है जो शरीर को संक्रमण से बचा कर एंटीबॉडी पैदा करता है। 5. लहसुन शरीर क़ी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है। लहसुन क़ी कलीयों को पानी में तबतक उबालें जबतक ये मुलायम न हो जायें,इसके बाद इस उबले पानी में सिरका मिला दें ,तथा थोडी मात्रा में शक्कर मिलकर सीरप बना लें,हो गयी दमा के रोगियों के लिए रामबाण औषधि तैयार। 6. अगर आपके कानों में संक्रमण या दर्द हो रहा है, तो बस 2-3 गरम बूंदे लहसुन के तेल की डाल लें। यह एंटीऑक्‍सीडेंट, कान के बैक्‍टीरिया को मार कर उसमें जितना भी अधिक वैक्‍स होगा, तेल उसे बाहर निकाल देगा। 7. लहसुन ब्‍लड सर्कुलेशन को भी बेहतर करता है। यह त्‍वचा को भी बेहतरीन बनाता है और शरीर से गंदगी को भी बाहर निकालता है। 8. यह फेफड़ों की जकड़न को ठीक करने में मदद करता है, श्वसन मार्ग में श्लेष्मा (म्यूकस) को ढीला करता है तथा सर्दी जुकाम को रोकने में सहायक है। 9. अपने पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के लिए हर दिन खाना खाने के बाद कुछ कलिया लहसुन की जरुर खाएं। जब भी मीट या वसा वाला भोजन करें तब भी इसको खाएं, यह जरुर असर दिखाएगा। 10. जुखाम और ठंड हो गई हो तो लहसुन को पीस लें और आंच पर गरम कर लें। इस पेस्‍ट को खा लें जिससे सर्दी जुखाम में आराम मिल सके। health benefits of garlic, garlic benefits, benefits of garlic, garlic , garlic health benefits , garlic pills , garlic supplements , garlic oil benefits , garlic uses , garlic capsules benefits , garlic vitamins , use of garlic , raw garlic, eating raw garlic benefits , raw garlic benefits, benefits of garlic supplements , garlic tablets benefits ,garlic supplement benefits , eating raw garlic , benefits of garlic oil raw garlic health benefits , garlic health , garlic oil uses , benefits of garlic tablets
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Breast Cancer in Hindi - स्तन कैंसर | Breast Cancer Symptoms | Breast Cancer Awareness
 
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Breast Cancer in Hindi - स्तन कैंसर | Breast Cancer Symptoms in Hindi | Breast Cancer Awareness in Hindi | Signs of Breast Cancer | Breast Cancer Treatment | برےسٹ کینسر Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ स्तन कैंसर (Breast Cancer) - स्तन कैंसर स्तन की कोशिकाओं में शुरू होने वाला एक ट्यूमर है (जो शरीर के अन्य उत्तकों एवं बाकी हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है।) यह महिलाओं एवं पुरूषों दोनों में हो सकता है, यद्यपि पुरूषों में यह दुर्लभ ही मिलता है । स्तन रचना (Breast Anatomy) - महिला के स्तन में विशेष ग्रथियाँ (लोब्यूल्स) होती हैं जो दुग्ध का उत्पादन करती हैं । स्तन में दूध के उत्पादन की संरचना में 15-20 खण्ड होते हैं । प्रत्येक खण्ड में अनेक छोटे लोब्यूल्स होते हैं, जिनमें सूक्ष्म ग्रन्थियां होती हैं; जो दूध का उत्पाद करती है । स्तन की संरचना में छोटी छोटी दुग्ध नलिकाओं का जाल होता है, जिनके द्वारा दूध निप्पल से आता है । निप्पल के आसपास का परिवेश जो गहरे रंग का होता है, उसे ‘एरिओला‘ कहते है । स्तन में रक्त व लसीका वाहिकाओं और लिम्फ नाड्स भी होते हैं । स्तन कैंसर के जोखिम कारक (Breast Cancer Risk Factors) - स्तन कैंसर के लिए जोखिम कारक वह है जो स्तन कैंसर ग्रसित होने की संभावना को बढ़ाता है । जोखिम कारक होने का यह आशय नहीं है कि आपको निश्चित रूप से स्तन कैंसर होगा । जोखिम कारक या तत्व ( "संशोधन योग्य नहीं" ) - लिंग : महिलाओं में स्तन कैंसर पुरूषों की अपेक्षा ज्यादा पाया जाता है । स्तन कैंसर की कोशिकाओं की वृद्धि के लिये हार्मोन (इस्ट्रोजन और प्रोजेस्टरोन) जिम्मेदार है । उम्र : उम्र बढ़ने के साथ स्तन कैंसर का खतरा भी बढ़ता जाता है । उत्तर भारत में किये गये एक अध्ययन के अनुसार स्तन कैंसर ग्रसित महिलाओं की औसत आयु 45 से 50 वर्ष के बीच है । पारिवारिक इतिहास : यदि आपके परिवार में किसी को कम आयु में कैंसर हुआ हो तो स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है । ज्यादातर स्तन कैंसर के मामलों में पारिवारिक इतिहास कारक नहीं पाया जाता है । आनुवंशिक कारक : यदि आपको अपने माता पिता से कुछ दुर्लभ जीन उत्परिवर्तन विरासत में मिले हैं तो आप स्तन कैंसर की वृद्धि के जोखिम में हैं । सबसे सामान्य जीन उत्परिवर्तन जो स्तन कैंसर के मरीजों में पाये जाते हैं वे हैं ‘‘बी.आर.सी.ए.1‘‘ और बी.आर.सी.ए.2 । मासिक धर्म : कम उम्र में मासिक धर्म की शुरूआत होना (12 साल की उम्र से पहले) स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ाता है । इसी तरह अधिक उम्र में रजोनिवृति होने से भी स्तन कैंसर का खतरा बढ़ता है । जोखिम कारक या तत्व ( "संशोधन योग्य" ) - मोटापा : अत्याधिक मोटापा स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ा देता है । गर्भावस्था : महिलायें जिन्होंने कभी गर्भधारण न किया हो उन्हें स्तन कैंसर का खतरा अधिक रहता हैं उन महिलाओं की तुलना में जिन्होनें एक या एक से अधिक बार गर्भधारण किया हो । स्तनपान : स्तनपान न कराने या कम कराने से भी स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है । मद्यपान : अत्याधिक मात्रा में शराब का सेवन स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ाता है । हार्मोन का सेवन : “संयुक्त एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन” हार्मोन थेरेपी दवाओं (हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी) का सेवन स्तन कैंसर के खतरे को बढ़ता है । यह थेरेपी महिलाओं को रजोनिवृति के लक्षणों से राहत पाने के लिये दी जाती है । स्तन कैंसर के संकेत एवं लक्षण (Signs And Symptoms of Breast Cancer) - आइये हम जानें की स्तन कैंसर के कौन-कौन से लक्षण होते हैं - 1. स्तन में गाँठ - स्तन में गाँठ स्तन कैंसर होने का एक बहुत हीं महत्वपूर्ण लक्षण माना जाता है । आपको महीने में कम से कम एक बार अपने स्तन की जांच अवश्य करनी चाहिए । आप यह टटोलने की कोशिश करें कि आपके स्तन में किसी प्रकार कि कोई गाँठ तो नहीं । इस प्रकार का गाँठ दर्दरहित हो सकता है और आपके स्तन के पास कहीं भी हो सकता है। 2. निपल में परिवर्तन - अगर आप अपने निपल में असामान्य परिवर्तन पातें हैं जिसका कोई कारण आपकी समझ में न आता हो तो शीघ्र अपने डॉक्टर से संपर्क करें । अगर आपका निपल उलट गया हो या उसकी दिशा बदल गई हो या वह अपनी जगह पर सामान्य रूप से न हो तो यह स्तन कैंसर होने का लक्षण हो सकता है । 3. स्तन में पीड़ा - अगर आपके स्तन में असामान्य पीड़ा रहती हो तो इसे भी कैंसर के एक लक्षण के रूप में देखा जा सकता है। 4. त्वचा में असामान्य घाव - अगर आपकी त्वचा में कोई घाव है जो साधारण नहीं है यानि असामान्य है एवं उसका कारण भी आपकी समझ से परे है तो यह स्तन कैंसर होने का संकेत हो सकता है । 5. बांह में दर्द रहना - अगर आपकी बांह में अक्सर दर्द रहता हो जिसका कारण आपकी समझ में नहीं आ रहा हो तो ये स्तन कैंसर का लक्षण हो सकता है । 6. हड्डियों में पीड़ा - हड्डियों में पीड़ा का अक्सर रहना भी स्तन कैंसर होने का संकेत दे सकता है । 7. वजन कम होना - अगर आपका वजन असामान्य रूप से कम हो रहा हो जिसका कारण आपकी समझ में न आ रहा हो ( यानि बिना व्यायाम किये या बिना खुराक में कमी किये अगर वजन कम हो ) तो यह किसी गंभीर बीमारी मसलन स्तन कैंसर का सूचक हो सकता है । स्तन कैंसर की रोकथाम (Breast Cancer Prevention) - शरीर के वजन को संतुलित बनाये रखें । नियमित रूप से व्यायाम करें । धूम्रपान एवं अत्याधिक शराब से बचें । स्तनपान कराएं । अनावश्यक विकिरण जोखिम से बचें । स्तन कैंसर का उपचार (Breast cancer treatment) - स्तन कैंसर के उपचार के लिये विभिन्न विधियाँ है : सर्जरी रेडियोथेरेपी (बिजली की सिकाई) कीमोथेरेपी (दवाओं द्वारा) हार्मोनथेरेपी
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Symptoms of  Cancer in Women in Hindi - महिलाओं में कैंसर के लक्षण | Signs of Cancer in Women
 
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Symptoms of Cancer in Women - महिलाओं में कैंसर के लक्षण | Signs of Cancer in Women in Hindi | Cancer Symptoms in Women Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ महिलाओं में कैंसर के लक्षण - स्तन में गांठ अगर कोई महिला अपने किसी भी एक स्तन में कोई गांठ महसूस करती है (जिसमें भले हीं कोई दर्द न हो) तो यह उस महिला में स्तन कैंसर का लक्षण हो सकता है। स्तन के अलावा अजीब तरह की गांठ स्तन के आस पास यानी बगल वगैरह में भी पाई जा सकती है। महिलाओं को चाहिए कि वे महीने में कम से कम एक बार अपने स्तनों की स्वयं जांच अवश्य करें और किसी प्रकार की गांठ महसूस करने पर उसका परिक्षण करवाएं। श्रोणि दर्द (पेल्विक पेन) नाभि के नीचे होने वाले दर्द को श्रोणि दर्द कहते है। यूं तो मासिक धर्म शुरू होने के दौरान या उसके नजदीक के दिनों में पेल्विक पेन यानि श्रोणि दर्द होना आम बात है लेकिन यदि यह दर्द आम दिनों में भी बरकरार रहता है तो यह कैंसर का लक्षण हो सकता है। श्रोणि दर्द एंडोमेट्रियल कैंसर, डिम्बग्रंथि के कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर, फैलोपियन ट्यूब के कैंसर और योनि के कैंसर के लक्षण को दर्शा सकता है। अतः इसकी जांच करवाएं। पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द का रहना अगर किसी महिला की पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द रहता हो तो इसे हल्के से नहीं लेना चाहिए और उचित जांच करवानी चाहिए। कुछ महिलाएं इस दर्द को प्रसव पीड़ा की तरह महसूस करती हैं। यूं तो यह दर्द लम्बे समय तक बैठे रहने से भी हो सकता है या किसी अन्य कारणों से भी, लेकिन कई मामलों में यह डिम्बग्रंथि के कैंसर का एक लक्षण भी हो सकता है। अतः इसकी जांच करवाएं। पेट की सूजन और पेट फूला फूला रहना पेट की सूजन और पेट फूला फूला रहना डिम्बग्रंथि के कैंसर के आम लक्षणों में से एक है। यह एक ऐसा लक्षण है जिसे आमतौर पर महिलाएं नजरअंदाज कर देती हैं। यह सूजन या पेट का फूलना कई बार मरीज को पैंट पहनने में यानि पैंट के बटन बंद करने में भी मुश्किलें पैदा करता है। असामान्य रूप से योनि से खून का स्राव जब महिलाओं में गाईनेकोलिक कैंसर होता है तो उनकी योनी से असामान्य रूप से खून का स्राव होता है। मासिक धर्म के दौरान बहुत ज्यादा खून बहना या दो मासिक धर्म के बीच खून का निकलना या यौन संबंध के दौरान या बाद में योनी से खून का निकलना गाईनेकोलिक कैंसर के लक्षण के रूप में देखा जाता हैं। ये गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर, गर्भाशय के कैंसर अथवा डिम्बग्रंथि के कैंसर के लक्षण भी हो सकते हैं। अक्सर बुखार का रहना बुखार जो जल्दी जाने का नाम नहीं लेता या जो लगभग 7 दिनों तक रहता हो या किसी को बार बार बुखार लगता हो और उसका कारण समझ में नहीं आता हो तो यह कैंसर का लक्षण हो सकता है। बुखार जो ठीक होने का नाम हीं नहीं लेता, कैंसर होने का संकेत देता है। हालांकि अक्सर रहने वाला बुखार और भी कई दूसरी बीमारियां होने का संकेत देता है इसलिए घबराएं नहीं और अपनी जांच करवाएं। लगातार पेट खराब रहना यदि आपका पेट अक्सर खराब रहता है या आप अक्सर दस्त, गैस, पतले दस्त, या कब्ज के शिकार रहते हैं या आपके मल में रक्त का अंश रहता हो तो आपको किसी योग्य डॉक्टर से मिलना चाहिए क्योंकि ये कोलोन कैंसर या गाईनेकोलिक कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। अज्ञात कारणों से वजन कम होना अगर आपका वजन आश्चर्यजनक रूप से कम हो रहा हो यानि आपको इसका कारण पता न हो तो यह सामान्य बात नहीं है। व्यायाम करने से या खाने की खुराक कम करने से वजन कम होना स्वाभाविक है लेकिन बिना कुछ किये यदि आपका वजन तेजी से कम हो रहा हो तो यह कैंसर का लक्षण हो सकता है। हालांकि महीने भर में महिलाओं के वजन में कई बार उतर चढ़ाव आता है लेकिन अगर यह आपको असामान्य लगे तो आप डॉक्टर से मिलें। योनि में उत्पन्न असामान्य बातें अगर आपकी योनी में किसी तरह का घाव, छाला रह रहा हो या वहां की त्वचा के रंग में असामान्य परिवर्तन हो रहा हो या असामान्य स्राव होता है तो आपको योनि की किसी योग्य डॉक्टर से परिक्षण करवाना चाहिए क्योंकि ये कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। थकान थकान कैंसर का एक आम लक्षण है। यह आमतौर पर तब होता है जब कैंसर उन्नत अवस्था में पहुंच जाता है। लेकिन यह लक्षण प्रारंभिक अवस्था में भी उभर सकता है। अगर आपको बिना काम किये या बिना परिश्रम किये बहुत ज्यादा थकान लगे या थकान जो आपको सामान्य दैनिक गतिविधियों को करने से रोके, कैंसर का लक्षण हो सकता है। अतः आप योग्य चिकित्सक द्वारा मूल्यांकन यानी अपनी जांच करवाएं। symptoms of cancer in women , महिलाओं में कैंसर के लक्षण, Signs of Cancer in Women, cervical cancer , ovarian cancer , cancer symptoms , ovarian cancer symptoms , colon cancer symptoms , lung cancer symptoms , breast cancer symptoms , skin cancer , throat cancer symptoms , prostate cancer symptoms , lung cancer , symptoms of cancer , symptoms of ovarian cancer , symptoms of lung cancer , cancer in women , breast cancer awareness ,
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Home Remedies For Cough in Hindi - खांसी के लिए घरेलू उपचार | Cough Remedies | Cough Home Remedy
 
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Home Remedies For Cough - खांसी के लिए घरेलू उपचार | Cough Remedies in Hindi | Natural Remedies for Cough in Hindi | Cough Home Remedy in Hindi Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ खांसी से बचाव के लिए घरेलू उपचार - 1. गाय के दूध का 15-20 ग्राम घी और काली मिर्च को एक कटोरी में लेकर हल्की आंच में गरम कीजिए। जब काली मिर्च गरम हो जाए तो उसे थोडा सा ठंडा करके लगभग 20 ग्राम पीसी मिश्री मिला दीजिए। उसके बाद काली मिर्च निकालकर खा लीजिए। इस खुराक को दो-तीन दिन तक लेने से खांसी बंद हो जाएगी। 2. तुलसी के पत्ते 5 काली मिर्च, 5 नग काला मनुक्का, 5 ग्राम चोकर (गेहूं के आटे का छान), 6 ग्राम मुलहठी, 3 ग्राम बनफशा के फूल लेकर 200 ग्राम पानी में उबाल लीजिए। जब पानी आधा हो जाए तो उसे ठंडा करके छान लीजिए। फिर गर्म करें और बताशे डालकर रात को सोते समय गरम-गरम पी लीजिए। इस खुराक को 3-4 दिन तक लेने से खांसी ठीक हो जाती है। 3. खांसी होने पर सेंधा नमक की डली को आग पर अच्छे से गरम कर लीजिए। जब नमक की डली गर्म होकर लाल हो जाए तो तुरंत आधा कप पानी में डालकर निकाल लीजिए। सोने से पहले इस पानी को पीने से खांसी में काफी आराम मिलता है। 4. एक ग्राम सेंधा नमक और 125 ग्राम पानी को आधा होने तक उबालिये। सुबह-शाम इस पानी को पीने से खांसी में आराम मिलता है। 5. शहद, किशमिश और मुनक्के को मिलाकर खाने से खांसी ठीक हो जाती है। 6. त्रिफला में बराबर मात्रा में शहद मिलाकर पीने से खांसी में फायदा होता है। 7. तुलसी, कालीमिर्च और अदरक की चाय पीने से भी खांसी समाप्त होती है। 8. हींग, त्रिफला, मुलेठी और मिश्री को नींबू के रस में मिलाकर चाटने से भी खांसी में फायदा मिलता है। 9. खांसी आने पर सोंठ को दूध में डालकर उबाल लीजिए। शाम को सोते वक्त इस दूध को पी लीजिए। ऐसा करने से कुछ दिनों में खांसी ठीक हो जाती है। cough remedies , cough , cough syrup , dry cough , cough medicine , persistent cough , dry cough remedies , home remedies for cough , cough treatment , home remedies for dry cough , natural remedies for cough , cough home remedy , dry cough treatment , cure for cough , herbal medicine for cough , home remedies for a cough , best remedy for cough , cough remedies for kids , dry cough home remedies , chesty cough ,
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Cancer in Hindi - कैंसर के सभी सवालों के जवाब | All About Cancer | Cancer Information in Hindi
 
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Cancer in Hindi - कैंसर से सम्बंधित सभी जानकारी | All About Cancer | All Information Related To Cance | Cancer Information in Hindi | cancer kya hai | Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ आयुर्वेद में कैंसर का इलाज - https://youtu.be/p-p8Aari-hY स्तन कैंसर के लक्षण - https://youtu.be/XMCi_hW1zVo महिलाओं में कैंसर के लक्षण - https://youtu.be/u3YHVI3K-X4 पुरुषों में कैंसर के लक्षण - https://youtu.be/kM-Kshao6NE Symptoms of Cancer in Hindi, cancer symptoms in hindi , cansar hindi , cancer treatment in hindi , blood cancer in hindi , breast cancer symptoms in hindi , cencer in hindi , symptoms of breast cancer in hindi , causes of cancer in hindi , cancer ke lakshan , cancer , all about cancer , cancer symptoms , what is cancer , Cancer Treatment in Ayurveda, cancer kya hai , cancer ka ilaj , breast cancer symptoms in hindi , what is cancer in hindi , cancer ka desi ilaj in hindi,
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Benefits of Apple Cider Vinegar in Hindi - सेब के सिरके के फायदे | Apple Cider Vinegar Benefits
 
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Benefits of Apple Cider Vinegar - सेब के सिरके के फायदे | Apple Cider Vinegar Benefits | Advantages of Apple Vinegar | Health Benefits of Apple Cider | Vinega Seb k Sirke k Fayde Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ Benefits of Apple Cider Vinegar - सेब के सिरके के फायदे 1- शर्करा स्तर कम करता है सेब के रस वाले सिरके में ऐसेटिक अम्ल होता है, जो मण्ड के पाचन को मन्द करता है जिससे रक्तवाहिनियों में शर्करा का स्तर कम होता है। 2- व्यर्थ कोलेस्ट्रॉल स्तर कम करता है सेब के रस वाले सिरके में पेक्टिन की उपस्थिति से शरीर में व्यर्थ का कोलेस्ट्रॉल कम होता है। कुठ लोगों को पेक्टिन से एलर्जी होती है इसलिये उन्हे सेब के रस वाले सिरके से बचना चाहिये। 3- खनिज लवण होता है सेब के रस वाले सिरके में पोटैशियम, मैग्नीशियम और कई अन्य खनिज लवण होते हैं। पोटैशियम शरीर में जल संतुलन के साथ-साथ हृदय की धड़कन को नियन्त्रित करता है। मैग्नीशियम कई प्रकार की प्रक्रियाओं में उत्प्रेरक का कार्य करता है जिससे पाचन में मदद मिलती है और कैल्शियम का अवशोषण बढ़ा कर स्वस्थ हड्डियों के निर्माण में सहायक है। 4- ऑस्टियोआर्थराइटिस में मददगार होता है ऑस्टियोआर्थराइटिस शरीर में ऐसिड कणों के निर्माण के कारण होता है और सेब के रस वाले सिरके से ये कण विसरित हो जाते हैं और शरीर का पीएच सन्तुलित होता है। हलाँकि इसके कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं लेकिन डॉ जार्विस ने सेब के रस वाले सिरके से ऑस्टियोआर्थराइटिस के कई रोगियों का सफल इलाज का दावा किया है। 5- ऐन्टीऑक्सीडेन्ट प्रभाव सेब के रस वाले सिरके में बीटा-कैरोटीन होता है जिसकी मेयो क्लीनिक के अनुसार ऐन्टीऑक्सीडेन्ट गुण होते हैं जो मुक्त रैडिकल द्वारा होने वाले नुक्सान को निष्प्रभावी कर प्रतिरक्षण तन्त्र को मजबूत बनाता है। 6- ऐन्टीफंगल बालों में रूसी की कारक फंगस मैलेसेजिया फरफर को सेब के रस वाले सिरके के ऐन्टीफंगल गुण के कारण समाप्त किया जा सकता है। जल तथा सेब के रस वाले सिरके की आधी-आधी मात्रा लेकर बने विलयन को रूसी समाप्त होने तक नियमित रूप से सिर में लगायें। 7- सूजन कम करता है सेब के सिरके नहाने के पानी में मिलाने पर उसकी सूजन कम करने की क्षमता से धूप के कारण झुलसी त्वचा में राहत मिलती है। जब इसे सलाद या पानी के साथ ग्रहण किया जाता है तो यह आहारनाल की आन्तरिक सूजन को भी कम कर देता है। 8- वजन कम करने में सहायक सेब के रस वाले सिरके से रक्त शर्करा के नियन्त्रित होने के कारम यह वजन कम करने में सहायक है क्योंकि इन्सुलिन मुक्त शर्करा को वसा के रूप में संचित नहीं कर पायेगी। 9- त्वचा को स्वस्थ बनाता है सेब के रस वाले सिरके एक ऐस्ट्रिन्जेन्ट होता है जिसके कारण यह चेहरे और गले की त्वचा को स्वस्थ बनाता है। इसे आँखों से दूर रखें क्योंकि इससे जलन हो सकती है। 10- यीस्ट संक्रमण का उपचार दो चम्मच सेब के रस वाले सिरके को लेने से महिलाओं में यीस्ट संक्रमण कम होता है। हलाँकि सभी महिलाओं में यह असरदार नहीं होता है और इसे सावधानीपूर्वक प्रयोग करना चाहिये। benefits of apple cider vinegar, apple cider vinegar , cider vinegar, apple cider vinegar benefits , braggs apple cider vinegar , apple vinegar, apple cider vinegar uses , apple cider vinegar with mother , apple cider vinegar drink , uses for apple cider vinegar , braggs apple cider vinegar benefits , vinegar health benefits , benefits of vinegar , health benefits of apple cider vinegar , health benefits of vinegar , apple vinegar benefits , best apple cider vinegar
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Symptoms of Cancer in Men in Hindi - पुरुषों में कैंसर के लक्षण | Signs of Cancer in Men
 
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Symptoms of Cancer in Men - पुरुषों में कैंसर के लक्षण | Signs of Cancer in Men | Cancer Symptoms in Men Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ पुरुषों में कैंसर के लक्षण - 1 - जिन लोगों को कैंसर होता है उनका वजन असामान्य रूप से कम होने लगता है। अगर बिना किसी प्रयास के शरीर का वजन 10 पौंड से ज्यादा कम हो जाये तो इसे कैंसर का प्राथमिक लक्षण के रूप में देखा जा सकता है। 2 - बुखार कैंसर का एक सामान्य लक्षण होता है। कैंसर मरीज की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, इसलिए मरीज को अक्सर बुखार रहने लगता है। ब्लड कैंसर, ल्यूकीमिया इत्यादि में अक्सर बुखार के लक्षण नजर आते हैं। 3- थकान कैंसर का एक प्रमुख लक्षण माना जाता है। इसमें मरीज बिना वजह थका थका महसूस करता है। कभी-कभी तो वह हाथ पांव से काम करने लायक भी नहीं रहता। 4- हड्डियों के कैंसर या टेस्‍टीकुलर कैंसर में पीड़ा यानि दर्द होना कैंसर होने का संकेत है। ब्रेन ट्यूमर के मरीजों को सर दर्द की शिकायत रहने लगती है। ऐसा सर दर्द जो प्राथमिक उपचार से या दवा से भी न ठीक हो, उसे ब्रेन ट्यूमर का लक्षण माना जा सकता है। 5- त्वचा में असामान्य परिवर्तन कैंसर के संकेत हो सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति की त्वचा बेवजह सांवली या काली पड़ने लगी हो तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है। त्वचा का पीला पड़ना भी कैंसर होने का संकेत देता है। 6- अगर किसी को लम्बे समय से कब्ज की शिकायत रहती हो अथवा कोई लम्बे समय से डायरिया से परेशान हो तो ये कोलोन कैंसर या उदर के कैंसर के संकेत हो सकते हैं। 7- मूत्र त्याग के वक्त यदि पीड़ा होती हो अथवा मूत्र में रक्त की मौजूदगी पाई जाती हो तो ये प्रोस्टेट कैंसर अथवा डिम्बग्रंथि कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। 8- स्‍तनों में गांठ होना ब्रेस्‍ट कैंसर के लक्षण हैं। ब्रेस्‍ट कैंसर केवल महिलाओं को ही नही होता, पुरुष भी इसकी गिरफ्त में आते हैं। 9- लिम्फ नोड्स में परिवर्तन होना भी कैंसर का संकेत है। लिम्फ नोड्स में या गले में एक गांठ या सूजन हो तो चिंता का विषय है। 10- सर्दी और जुकाम में कफ होना लाजमी है, लेकिन यदि लगातार चार हफ्ते से कफ आ रहा है तो यह कैंसर का संकेत है, इसे नकारना नही चाहिए। 11- निगलने में परेशानी होना भी कैंसर का लक्षण है। खाते और पीते वक्‍त निगलने में दिक्‍कत हो तो इसे नजरअंदाज मत कीजिए। 12- ऐसे हिस्‍से से खून निकलना जहां से खून निकलने की संभावना न हो। खांसी, मल त्‍याग, पेशाब के दौरान यदि खून निकले तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है। 13 - यदि स्‍मोकिंग और तंबाकू चबाने के दौरान मुंह या जीभ में सफेद दाग व धब्‍बे दिखे तो यह कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। यह ओरल कैंसर के लक्षण हैं। 14- कैंसर होने पर पाचन क्रिया भी प्रभावित होता है। यदि खाना अच्‍छे से पच नही रहा है, तो यह पेट के कैंसर का लक्षण हो सकता है। 15- टेस्टिकल्‍स में बदलाव होना टेस्टिकुलर कैंसर का लक्षण हो सकता है। टेस्टिकुलर कैंसर ज्‍यादातर 20 से 39 साल की उम्र में होता है। symptoms of cancer in men, ovarian cancer symptoms , colon cancer symptoms , lung cancer symptoms , breast cancer symptoms , throat cancer symptoms ,prostate cancer symptoms , cancer symptoms , Cancer Symptoms in Men, signs of cancer in men ,symptoms of lung cancer , symptoms of breast cancer, symptoms of colon cancer , blood cancer symptoms, cancer, cancer in men, Symptoms of Cancer in Hindi, पुरुषों में कैंसर के लक्षण, कैंसर के लक्षण, what is cancer, cancer symptoms , symptoms of cancer
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Home Remedies For High Blood Pressure in Hindi - उच्च रक्त चाप का उपचार | High BP Treatment
 
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Home Remedies For High Blood Pressure - उच्च रक्त चाप का उपचार | High Blood Pressure Treatment | Treatment of High Blood Pressure | ہائی بلڈ آرک علاج | How to reduce blood pressure Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ आयुर्वेद के अनुसार उक्त रक्तचाप का इलाज़ - उच्च रक्तचाप की बीमारी ठीक करने के लिए घर मे उपलब्ध कुछ आयुर्वेदिक दबाईया है जो आप ले सकते है । दालचीनी (Cinnamon) • उच्च रक्तचाप की बीमारी ठीक करने के लिए एक बहुत अच्छी दवा आप के घर में है दालचीनी, जो मसाले के रूप में उपयोग होता है । • दालचीनी को पत्थर में पिसकर पाउडर बनाकर, आधा चम्मच दालचीनी को, आधा चम्मच शहद के साथ रोज सुबह खाली पेट गरम पानी के साथ लीजिये, ये हाई रक्तचाप के लिए बहुत अच्छी दवा है । मेंथी (Fenugreek) • एक ग्लास गरम पानी में आधा चम्मच मेंथी दाना लेकर उसे रात को भिगो दीजिये, पानी में रात भर भीगने दीजिये और सुबह उठ कर पानी को पी लीजिये और मेंथी दाने को चबा कर खा लीजिये । • ये बहुत जल्दी आपकी उच्च रक्तचाप (High Blood Presure) कम कर देगा, डेढ़ से दो महीने में एकदम स्वाभाविक कर देगा । अर्जुन की छाल (Arjuna bark) • उच्च रक्तचाप के लिए एक तीसरी दवा है वो है अर्जुन की छाल । अर्जुन एक वृक्ष होता है उसकी छाल को धुप में सुखा कर पत्थर में पिस के इसका पाउडर बना लीजिये । • आधा चम्मच पाउडर को आधा गिलास गरम पानी में मिलाकर उबाल लें, और खूब उबालने के बाद इसको चाय की तरह पी लें । • ये उच्च रक्तचाप को ठीक करेगा, कोलेस्ट्रोल को ठीक करेगा, मोटापा कम करता है, हार्ट में आर्टरीज में अगर कोई ब्लोकेज है तो वो ब्लोकेज को भी निकाल देता है ये अर्जुन की छाल । • डॉक्टर अक्सर ये कहते है ना की दिल कमजोर है आपका, अगर दिल कमजोर है तो आप जरुर हर दिन अर्जुन की छाल लीजिये, दिल बहुत मजबूत हो जायेगा, आपका ESR ठीक होगा, बहुत अच्छी दवा है ये अर्जुन की छाल । लौकी का रस (Gourd Juice) • एक ओर अच्छी दवा है हमारे घर में वो है लौकी का रस । सुबह एक कप लौकी का रस रोज पीना खाली पेट नाश्ता करने से एक घंटे पहले । • या इस लौकी की रस में पाँच धनिया पत्ता, पाँच पुदीना पत्ता, पाँच तुलसी पत्ता मिलाकर, तीन-चार काली मिर्च पिस के ये सब डाल के पीना । ये बहुत अच्छा है आपके रक्तचाप को ठीक कर देगा । • लौकी का रस ह्रदय को भी बहुत व्यवस्थित कर देता है, कोलेस्ट्रोल को ठीक रखेगा, डायबिटीज में भी काम आता है। बेलपत्र के पत्ते (Belptr Leaves) • एक ओर दवा है बेलपत्र की पत्ते - ये उच्च रक्तचाप में बहुत काम आते है । पांच बेलपत्र के पत्ते लेकर पत्थर में पिस कर उसकी चटनी बनाइये, अब इस चटनी को एक ग्लास पानी में डाल कर खूब गरम कर लीजिये, इतना गरम करिए कि पानी आधा हो जाये, फिर उसको ठंडा करके पी लीजिये। • ये सबसे जल्दी उच्च रक्तचाप को ठीक करता है और ये बेलपत्र आपके सुगर को भी सामान्य कर देगा । जिनको उच्च रक्तचाप और सुगर दोनों है, उनके लिए बेलपत्र सबसे अच्छी दवा है । देसी गाय का मूत्र (Cow Urine) • ये गोमूत्र बहुत अद्भत है, ये हाई रक्तचाप को भी ठीक करता है और निम्न रक्तचाप को भी ठीक कर देता है - दोनों में काम आता है और यही गोमूत्र डायबिटीज को भी ठीक कर देता है । Arthritis (गठिया) को भी ठीक कर देता है । • अगर आप गोमूत्र लगातार पी रहे है तो दमा भी ठीक होता है, अस्थमा भी ठीक होता है । • इसमें दो सावधानियाँ ध्यान रखनी है कि गाय शुद्ध रूप से देशी हो और वो गर्भावस्था में ना हो ।
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Home Remedies For Fever In Hindi - बुखार के लिए घरेलू उपचार | Fever Treatment  | Fever Home Remedies
 
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बुखार के लिए घरेलू उपचार - Home Remedies For Fever | Fever Treatment | Fever Home Remedies | Natural Remedies For Fever Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ वैसे तो Fever सभी को आती है परन्तु सिंपल symptoms से पहचान कर bhukar का treatment किया जा सकता है | Fever का इलाज भी आसान है, अगर आप पूरी सावधानी बरते | हर बदलते मौसम के साथ हमारे शरीर के रोग प्रतिरोधक छमता में भी उतार – चढ़ाव होता रहता है | जिसके कारण बुखार, खांसी जैसी रोग हमारे शरीर को जकड़ने लगती है | बदलते मौसम के साथ सबसे अधिक viral fever होने का संभावना होता है | बुखार के लक्षण (Symptoms of Fever – Bukhar Ke Lakshan) - शरीर में थकान महसूस होना (weakness in body) शरीर का तापमान में अचानक वृद्धि हो जाना (raise in body temperature) शरीर के मांसपेशियों में और हड्डियों के जोड़ो पर दर्द महसूस होना (feel pain in bones and muscles) सर में दर्द होना (head pain) जीभ का स्वाद चला जाना (no taste in tongue) Viral बुखार के लिए कुछ जिम्मेदार तत्व - मौसम में परिवर्तन के कारण (change in season) ज्यादा कम करने से थकान के कारण (weakness due to heavy work) अपने छमता से अधिक कम करने से | (physical work more than capacity) रात में कम नींद लेने से | (less sleep) शरीर को अगर रेस्ट (body rest) न मिले तो भी बुखार हो जाता है | (Fever also start due to no rest to body) Fever के समय क्या नहीं खाना चाहिये – List of Food not to eat during Fever - ठन्डे पानी को पिने से परहेज करे (avoid drinking chilled water) कोई भी ठंडी खाने तथा पिने की चीजे जैसे ice cream, cold drink आदि का भी सेवन से बचे | दही का सेवन बिलकुल भी न करे | (never ever eat curd, this will make your worst condition) खली बदन या खाली पैर बाहर न निकले | (never walk outside without clothes) कुछ फलो जैसे केला अदि का भी सेवन करने से बचे | (avoid eating banana, this might increase cough) Boiled egg – अगर आप अंडा खाना चाहते है, तो सिर्फ उबले अंडा ही खाए | (you can have 1-2 boil eggs a day) home remedies for fever , fever symptoms , fever treatment , fever temperature, treatment for fever , fever medicine, fever remedies, remedies for fever, fever relief, fever home remedies, fever cure, cure for fever , reduce fever , natural remedies for fever , treating a fever , homeopathic remedies for fever, home remedies for a fever
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Symptoms of Breast Cancer in Hindi - स्तन कैंसर के लक्षण | Breast Cancer Symptoms in Hindi
 
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Symptoms of Breast Cancer - स्तन कैंसर के लक्षण | Breast Cancer Symptoms | Signs of Breast Cancer in Hindi | Breast Cancer Signs | Causes of Breast Cancer Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ स्तन कैंसर महिलाओं के लिए एक अभिशाप है. क्योंकि यह जानलेवा तो है हीं, और बच जाने पर भी स्तनों को ऑपरेशन के जरिये निकलना पड़ता है. और स्तनों के बिना किसी भी महिला का व्यक्तित्व अपना आकर्षण खो देता है. तो अगर आप महिला हैं और स्तन कैंसर को लेकर जागरूक नहीं हैं, तो जागरूक हो जाइए…. ताकि आप इस बीमारी से बची रहें. तो आइए जानते हैं कि स्तन कैंसर के प्रारम्भिक लक्षण क्या हैं, शुरुआत में हीं इसकी रोकथाम कैसे की जा सकती है. और हम यह भी जानेंगे कि इस मामले में लापरवाही की आपको क्या-क्या कीमत चुकानी पड़ सकती है. हम स्तन कैंसर के इलाज के बारे में भी जानेंगे. स्तन कैंसर के लक्षण - शुरुआत में स्तन कैंसर के लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन जैसे-जैसे यह बढ़ता जाता है…… इसके कुछ लक्षण उभरने लगते हैं. स्तन या कांख में कोई गांठ होना. ऐसे गांठ में सामान्यतः दर्द नहीं होता है, लेकिन कभी-कभी हल्की सी चुभन हो सकती है. कांख में सूजन हो जाना. शुरुआत में गांठ का आकार चावल के दाने के बराबर होता है. स्तन में दर्द होना या स्तनों का सामान्य से ज्यादा मुलायम हो जाना या स्तनों का सख्त हो जाना. स्तनों पर खुद-ब-खुद खरोंच पड़ना. स्तनों का रंग, आकार या तापमान बदलना. निप्पलस का आकार या रंग बदल जाना, या उनमें दाने आ जाना. निप्पलस में खुजली होना या झनझनाहट होना. निप्पलस से तरल पदार्थ या खून का निकलना, हाँलाकि कभी-कभी ऐसा दूसरे कारणों से भी हो सकता है. जानकारी की कमी और शर्म की वजह से ज्यादातर महिलाएँ स्तन कैंसर के गम्भीर रूप लेने के बाद हीं डॉक्टर के पास जाती है. symptoms of breast cancer in hindi , स्तन कैंसर के लक्षण , breast cancer , breast cancer symptoms , breast cancer awareness , signs of breast cancer, what is breast cancer , breast pain , breast cancer signs , breast cancer stages , symptoms of breast cancer in women, breast cancer symbol , breast cancer facts , what are the symptoms of breast cancer , breast cancer treatment , signs of breast cancer in women , signs and symptoms of breast cancer , causes of breast cancer ,breast cancer care ,
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Benefits of Flaxseed in Hindi - अलसी के फायदे | Flax Seed Benefits  | Flax Seeds Benefits
 
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Benefits of Flaxseed - अलसी के बीजों के स्वास्थ्य लाभ | Alsi k Beej | Alsi k Beej K Fayde | Flax Seed Benefits | Flax Seeds Benefits | Benefits of Flax Seeds Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ Benefits of Flaxseed - अलसी के फायदे | हृदय के लिए फायदेमंद है अलसी (Alsi ka bij promotes better cardiovascular) अलसी का सबसे पहला और खास गुण यह है कि, यह शरीर में हृदय कि सुरक्षा के लिए काम करता है। यह दिल को कई तरह की बिमारियों से बचाकर सुरक्षित रखता है। अलसी के बीज में पॉलीअनसैचुरेटेड फैट (polyunsaturated fat) होता है जो रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रण में रखता है और ब्लड प्रेशर को भी काबू में रखता है। दिल कि सुरक्षा के साथ हार्ट अटैक के खतरे को भी यह कम करता है। डायबिटीज़ के नियंत्रण में सहायक अलसी का बीज (Alsi seeds helps in controlling diabetes) अलसी डायबिटीज़ के नियंत्रण में भी सहायक होती है। इसमें मौजूद लिग्नेंस (lignans) को डायबिटीज़ के लिए लाभदायी माना जाता है। एक स्टडी के अनुसार यह बताया गया है कि, रोज़ अलसी के दानों का सेवन करने से दोनों तरह से डायबिटीज़ पर कंट्रोल किया जा सकता है और यह शरीर में ग्लूकोज कि संवेदनशीलता को बढ़ा देता है। साथ ही यह ब्लड शुगर के स्तर (blood sugar level) को भी बेहतर करता है। कैंसर से दूर रखने में अलसी का प्रयोग (Flax seeds to keep cancer at bay) अलसी के बीजों में उच्च मात्रा में ओमेगा 3 फैटी एसिड (Omega 3 fatty acid) और लिग्नन (Lignan) मौजूद होते हैं जो साथ मिलकर कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं। यह लिग्नन ऐसे होर्मोंस को नियंत्रित कर के रखते हैं जो कैंसरजनित होते हैं या कैंसर को बढ़ावा देने में मदद करते हैं। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट बढ़ती उम्र के प्रभावों को कम कर आपकी त्वचा को भी युवा बनाए रखता है। संक्रमण की रोकथाम के लिए सहायक होती है अलसी के बीज का उपयोग (Flax seeds can limit common infection) अलसी के बीज़ में पॉलीफेनाल (Polyphenol) होता है। जो प्रोबायोटिक्स को बढ़ाने में सहायक होते हैं। यही तत्व हमारे पेट में पाचन को ठीक कर पेट से जुड़े इन्फेक्शन (Infection) आदि को दूर रखता है। लिग्नन में उपस्थित एंटीवाइरल (Anti viral) और एंटीबैक्टीरियल (Anti bacterial) गुण सामान्य इन्फेक्शन जैसे सर्दी खांसी आदि को दूर रख हमारे प्रतिरक्षा प्रणाली को भी बेहतर करता है। अलसी के बीज के लाभ है अच्छे पाचन में सहायक (Alsi ke beej ke labh for better digestive health) अलसी के बीजों का यह सबसे महत्वपूर्ण और खास गुण है की यह हमारे पाचन को ठीक रखने में मदद करता है। इसके अलावा यह शरीर के बाकी कामों को भी ठीक से संचालित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। अल्फा लिनोलेनिक एसिड (Alpha linolenic acid) अलसी के दानों में मौजूद होता है जो पेट के विभिन्न हिस्सों को ठीक तरह से कार्य करने के लिए प्रेरित करता है और पेट की क्रियाओं को भी बेहतर बनाए रखता है। लंबे समय से हो रही पेट की समस्याओं जैसे पेट में जलन आदि को अलसी के प्रयोग से दूर किया जा सकता है। benefits of flaxseed, flax seed , flax seeds , flaxseed oil , ground flaxseed , flaxseed oil benefits, flax oil , flax seed benefits , flax seeds benefits , ground flax, alsi seeds ,flax seed nutrition, benefits of flax seeds, benefits of flaxseed oil , flaxseed oil capsules, flax seed powder, health benefits of flaxseed,अलसी के बीजों के स्वास्थ्य लाभ, अलसी के फायदे, flax seeds uses,
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Benefits of Sprouted Grains - अंकुरित अनाज के फायदे | Sprouted Grains | Sprouted Grains Benefits
 
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Benefits of Sprouted Grains - अंकुरित अनाज के फायदे | Sprouted Grains | Sprouted Grains Benefits Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ Benefits of Sprouted Grains - अंकुरित अनाज के फायदे | अंकुरित अनाज से करें पाचन को बेहतर (Sprouts ke labh promotes digestion) हमारे पाचन तंत्र का सीधा संबंध हमारे स्वास्थ्य से होता है। अनाज के अंकुरित दानों को चबाकर आप इनसें होने वाले सबसे खास लाभ को ले सकते हैं। अंकुरित अनाज में एंजाइम्स की उच्च मात्रा होती है जो हमारे पेट में भोजन को जल्दी पचने में मदद करते हैं। इनके नियमित सेवन से भोजन में मौजूद पोषण का शरीर में सही तरीके से अवशोषण होता है साथ ही ये हमारे आंतों की क्रियाओं को भी सही करने में मदद करते हैं। हृदय की क्रियाप्रणाली को सुधारने में उपयोगी (Promotes healthy cardiovascular system) हमें स्वस्थ रखने में हमारे दिल का बड़ा योगदान होता है। अगर हमारा दिल सेहतमंद होगा तो हमारा बाकी शरीर भी स्वस्थ बना रहता है। अंकुरित अनाज ओमेगा3 फैटी एसिड का बड़ा स्रोत होते हैं। इनके सेवन से सीधे हमारे हृदय को लाभ पहुंचता है। ओमेगा 3 फैटी एसिड (omega 3 fatty acid) हमारे शरीर के अंदर कॉर्डियोवस्कुलर (cardiovascular) या दिल की सेहत के लिए बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके साथ ही सम्पूर्ण शरीर के पोषण का भी कार्य करता है। यह शरीर के भीतरी अंगों के साथ त्वचा का भी खास ख़याल रखता है। रक्त में कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए भी इसका खास योगदान होता है। अंकुरित अनाज उच्च पोटेशियम के गुणों से भरे होते हैं जो दिल की सम्पूर्ण कार्यप्रणाली पर प्रभाव डालते हैं। हाइ ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक जैसे खतरों को इसके सेवन से कम किया जा सकता है। स्प्राउट खाने के फायदे शरीर को ऊर्जा का स्रोत (Sprouts offers great energy) अंकुरित अनाज को प्राकृतिक ऊर्जा प्राप्ति का स्रोत माना जाता है। ये हमारे शरीर को तुरंत ऊर्जा देने में मदद करते हैं। अंकुरित अनाज में प्रोटीन की उच्च मात्रा होती है जिसकी वजह से यह शरीर में ऊर्जा का संचार करने में समर्थ होते हैं। अंकुरण के बाद अनाज में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है साथ ही इसमें मौजूद इंजाइम्स भी सक्रिय हो जाते हैं जो शरीर में जाकर हमारे मेटाबोलिस्म को बढ़ा देते हैं। मेटाबोलिस्म के बढ़ने से शरीर को ज़्यादा एनर्जी मिलती है। अंकुरित अनाज खाने के फायदे , एनीमिया से लड़ने में सहायक (Sprouts are ideal for fighting anemia) शरीर में आयरन तत्व की कमी एनीमिया या खून की कमी का कारण होती है। खून की कमी से शारीरिक और मानसिक थकान की अनुभूति होती है। इस कमी को दूर करने के लिए नियमित रूप से अंकुरित अनाज का सेवन ज़रूरी है। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं और बच्चों को भी इसका रोजाना सेवन करना चाहिए। अंकुरित भोजन के सेवन से रहें कैंसर से दूर (Ankurit anaj ke fayde can prevent Cancer) नियमित रूप से अंकुरित अनाज का सेवन कई बीमारियों से बचा सकता है। रोजाना अंकुरित अनाज खाने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स (antioxidants) के साथ विटामिन ए और विटामिन सी भी मिलते हैं जो ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए ज़रूरी होते हैं। इस तरह अखरोट का नियमित सेवन करने से आप ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) जैसी भयावह बीमारी से बच सकते हैं। यह शरीर में ट्यूमर जैसी खतरनाक बीमारी को होने से रोकता है। रोज एक मुट्ठी अंकुरित अनाज चबाकर आप शरीर में होने वाले कई तरह के अंदरूनी डैमेज की मरम्मत कर सकते हैं। इसके अलावा बढ़ती उम्र के चिन्ह और कोलोरेक्तल कैंसर जैसी बिमारियों से बचने के लिए भी आपको रोज़ अंकुरित अनाजों का सेवन करना चाहिए। प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बनाने के लिए स्प्राउट के लाभ (Sprouts ke fayde for the strong immunity) प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत बना कर आप अपने जीवन का भरपूर मज़ा ले सकते हैं। अगर आपकी यही इम्यूनिटी कमजोर होती है तो आपको विभिन्न तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा कोई भी इन्फेक्शन या संक्रामक रोग भी आपको जल्दी घेर सकते हैं इस सब से बचे रहने के लिए प्रतिरक्षा तंत्र या इम्यून सिस्टम का मजबूत होना ज़रूरी है। कई खनिज तत्वों के साथ विटामिन सी उच्च मात्रा में होते हैं जो आपके शरीर की इम्युनिटी को बेहतर करने में मदद करते हैं। ezekiel bread , sprouting seeds, sprouts , sprouted grain bread , sprouted grains , sprouted bread , sprouted wheat, organic sprouting seeds , sprouted grain ,sprouted wheat flour , seeds for sprouting , sprouted seeds , sprouted wheat bread, sprouted grain flour, sprouted beans, Benefits of Sprouted Grains, अंकुरित अनाज के फायदे, Sprouted Grains Benefits
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Ayurvedic Home Remedies for Stomach Acidity - बदहजमी दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय |
 
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Ayurvedic Home Remedies for Stomach Acidity in Hindi - बदहजमी दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय | Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ गैस का आयुर्वेदिक इलाज – बदहजमी दूर करने के आयुर्वेदिक उपाय (Ayurvedic Home remedies for stomach acidity) एसिडिटी के उपाय – केला (Bananas) केला पोटैशियम से भरपूर होता है और पेट में एसिड उत्पन्न होने की क्रिया को नियंत्रित करता है एवं शरीर को अत्याधिक मात्रा में पेट में उत्पन्न होने वाले म्यूकस के हानिकारक परिणामों से बचाता है। केले में फाइबर होता है यह हाज़मे की समस्या के निवारण में सहायता करता है। एसिडिटी से तुरंत राहत के लिए एक केला रोज़ खाएं। एसिडिटी का आयुर्वेदिक उपचार – तुलसी के पत्ते (Tulsi) तुलसी के पत्ते पेट में म्यूकस के उत्पादन में सहायता करते हैं। यह पेट के हानिकारक रसों के प्रभाव से शरीर को बचाता है। अगर किसी को बेचैनी महसूस हो रही हो या पेट के ऊपरी भाग में जलन का अनुभव हो रहा हो तो उसे तुलसी के कुछ पत्ते खा लेने चाहिए। एसिडिटी के उपाय – बदहजमी दूर करने के लिए ठंडा मिल्क (Cold Milk) ठंडा दूध पीने से बदहजमी के लक्षणों से आपको काफी आराम प्राप्त होगा। दूध कैल्शियम (calcium) से भरपूर होता है। यह आपके शरीर में एसिड बनने से रोकता है और पेट में बनने वाले अतिरिक्त एसिड को सोखने में मदद करता है। बिना चीनी डाले एक गिलास दूध पीने से बदहजमी से तुरंत राहत प्राप्त होती है। यह उपचार तब और भी ज़्यादा असरदार हो जाता है, अगर दूध में एक चम्मच घी का भी मिश्रण कर दिया जाए। बदहजमी के लिए सौंफ (Saunf or aniseed) यह हाजमे का एक महत्वपूर्ण तत्व है, जो आँतों को साफ़ करने में भी काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सिर्फ सौंफ चबाते रहने से ही आपको बदहजमी से छुटकारा मिल जाता है। एक और तरीका यह है कि रात में सौंफ को पानी के साथ उबालें और इस पानी को जमा करके रख दें। अगले दिन सुबह या शाम को इस पानी का सेवन कर लें। गैस्ट्रिक का इलाज – जीरा (Jeera or cumin seeds) जीरा आपके मुंह में थूक का उत्पादन करके आपके हाजमे में मदद करता है। यह शरीर के मेटाबोलिज्म (metabolism) में भी वृद्धि करता है और पेट की समस्याओं से निजात दिलाता है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का यह मानना है कि जीरे में एक आराम प्रदान करने वाला गुण होता है, जो आपको सीने में जलन से निजात दिलाता है। थोड़े से पानी में एक चम्मच जीरा मिश्रित करके इसका सेवन करें। वैकल्पिक तौर पर जीरा डालकर पानी को उबालें तथा इसके ठंडा होने के बाद इसका सेवन कर लें। एसिडिटी का आयुर्वेदिक उपचार – लौंग (Clove) लौंग आपके हाजमे को दुरुस्त करने में काफी बड़ी भूमिका निभाती है और बदहजमी के लक्षणों को दूर करने में काफी कारगर भी सिद्ध होती है। लौंग में मौजूद पोषक तत्व पेट में मौजूद भोजन को आँतों तक धकेलने में काफी सहायता करते हैं। मुंह में एक लौंग लेकर इसे चबाएं तथा इसके रस को निगलकर बदहजमी से आराम पाएं। बदहजमी के लिए इलायची (Cardamom or Elaichi) आयुर्वेदिक शास्त्र के अनुसार शरीर के तीन मुख्य दोष होते हैं – वात, पित्त और कफ। इलायची में ऐसे गुण होते हैं, जो इन तीनों दोषों को ठीक करके नियंत्रित करने का कार्य बखूबी करने में सक्षम होते हैं। इलायची आपके हाजमे को दुरुस्त करने में काफी मदद करती है और पेट में उठ रही मरोड़ों से राहत प्रदान करता है। अगर आप पानी में इलायची डालकर इसे उबालें तथा इस पानी का सेवन करें, तो इससे आपकी बदहजमी चुटकियों में गायब हो सकती है। एसिडिटी का घरेलू उपचार – पुदीना (Mint or pudina leaves) पुदीना आपके पेट में बनने वाले एसिड के उत्पादन की प्रक्रिया को धीमा करके हाजमे को दुरुस्त करने में काफी बड़ी भूमिका निभाता है। पेट में हो रहे जलन और दर्द को पुदीने के ठन्डे और आरामदायक प्रभाव के बल पर आसानी से दूर किया जा सकता है। home remedies for acidity , heartburn , acid reflux , home remedies for heartburn , heartburn remedies , heartburn relief , acid reflux remedies, heartburn symptoms , home remedies for acid reflux , heartburn cures , heartburn home remedy, acid reflux cure , acid reflux symptoms , symptoms of heartburn , cure for heartburn , acid reflux treatment , what causes heartburn , symptoms of acidity
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Cancer Treatment in Ayurveda - आयुर्वेद में कैंसर का इलाज | Cancer Treatment By Rajiv Dixit
 
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Cancer Treatment in Ayurveda - आयुर्वेद में कैंसर का इलाज | Ayurvedic Treatment for Cancer | आयुर्वेद में कैंसर का इलाज - कैंसर का घरेलू उपचार | Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ कैंसर के सभी सवालों के जवाब - https://youtu.be/NV5BjJ48j1I स्तन कैंसर के लक्षण - https://youtu.be/XMCi_hW1zVo महिलाओं में कैंसर के लक्षण - https://youtu.be/u3YHVI3K-X4 पुरुषों में कैंसर के लक्षण - https://youtu.be/kM-Kshao6NE मित्रो कैंसर हमारे देश मे बहुत तेज़ी से बड़ रहा है । हर साल बीस लाख लोग कैंसर से मर रहे है और हर साल नए Cases आ रहे है । और सभी डॉक्टर्स हाथ-पैर डाल चुके है । राजीव भाई की एक छोटी सी विनती है याद रखना के … ” कैंसर के patient को कैंसर से death नही होती है, जो treatment उसे दिया जाता है उससे death सबसे अधिक होती है ” । माने कैंसर से ज्यादा खतरनाक कैंसर का treatment है । Treatment कैसा है ? ?आप सभी जानते है .. Chemotherapy दे दिया, Radiotherapy दे दिया, Cobalt-therapy दे दिया । इसमें क्या होता है के शारीर का जो प्रतिरक्षक शक्ति है Resistance power ! वो बिलकुल ख़तम हो जाती है । जब Chemotherapy दिए जाते है तो डाक्टर ये बोलते है की हम कैंसर के सेल को मारना चाहते है लेकिन होता क्या है अच्छे सेल भी उसी के साथ मर जाते है । राजीव भाई के पास कोई भी रोगी जो आया Chemotherapy लेने के बाद राजीव भाई उसे बचा नही पाए । लेकिन इसका उल्टा भी रिकॉर्ड है .. राजीव भाई के पास बिना Chemotherapy लिए हुए कोई भी रोगी आया Second & third Stage के cancer तक वो एक भी नही मर पाया ! मतलब क्या है Treatment लेने मे जो खर्च आपने कर दिया वो तो गया ही और रोगी भी आपके हाथ से गया । डॉक्टर आपको भूल-भुलैया में रखता है अभी 6 महीने में ठीक हो जायेगा 8 महीने में ठीक हो जायेगा लेकिन अंत में वो मर ही जाता है , कभी हुआ नही है के Chemotherapy लेने के बाद कोई बच पाया हो । आपके घर परिवार में अगर किसी को कैंसर हो जाये तो ज्यादा खर्चा मत करिए कियों की जो खर्च आप करेंगे उससे मरीज का तो भला नही होगा उसको इतना कष्ट होता है की आप कल्पना नही कर सकते । उसको जो injections दिए जाते है, जो Tablets खिलाई जाती है, उसको जो Chemotherapy दी जाती है उससे सारे बाल उड़ जाते है, भ्रू के बाल उड़ जाते है, चेहरा इतना डरावना लगता है के पहचान में नही आता ये अपना ही आदमी है? इतना कष्ट क्यों दे रहे हो उसको ? सिर्फ इसलिए के आपको एक अहंकार है के आपके पास बहुत पैसा है तो Treatment कराके ही मानुगा ! होता ही नही है वो, और आप अपनी आस पड़ोस की बाते ज्यादा मत सुनिए क्योंकि आजकल हमारे Relatives बहुत Emotionally Exploit करते है । घर में किसीको गंभीर बीमारी हो गयी तो जो रिश्तेदार है वो पहले आके कहते है ‘ अरे All India नही ले जा रहे हो? PGI नही ले जा रहे हो ? Tata Institute बम्बई नही ले जा रहे हो ? आप कहोगे नही ले जा रहा हूँ मेरे घर में ही चिकित्सा …. अरे तुम बड़े कंजूस आदमी हो बाप के लिए इतना भी नही कर सकते माँ के लिए इतना नही कर सकते ” । ये बहुत खतरनाक लोग होते है !! हो सकता है कई बार वो Innocently कहते हो, उनका intention ख़राब नही होता हो लेकिन उनको Knowledge कुछ भी नही है, बिना Knowledge के वो suggestions पे suggestions देते जाते है और कई बार अच्छा खासा पढ़ा लिखा आदमी फंसता है उसी में .. रोगी को भी गवाता है पैसा भी जाता है । कैंसर के लिए क्या करे ? हमारे घर में कैंसर के लिए एक बहुत अच्छी दावा है ..अब डॉक्टर ने मान लिया है पहले तो वे मानते भी नही थे; एक ही दुनिया में दावा है Anti-Cancerous उसका नाम है ” हल्दी ” । हल्दी कैंसर ठीक करने की ताकत रखती है ! कैसे ताकत रखती है वो जान लीजिये हल्दी में एक केमिकल है उसका नाम है कर्कुमिन (Carcumin) और ये ही कैंसर cells को मार सकता है बाकि कोई केमिकल बना नही दुनिया में और ये भी आदमी ने नही भगवान ने बनाया है । हल्दी जैसा ही कर्कुमिन और एक चीज में है वो है देशी गाय के मूत्र में । गोमूत्र माने देशी गाय के शारीर से निकला हुआ सीधा-सीधा मूत्र जिसे सूती के आट परत की कपड़ो से छान कर लिया गया हो । तो देशी गाय का मूत्र अगर आपको मिल जाये और हल्दी आपके पास हो तो आप कैंसर का इलाज आसानी से कर पायेंगे । (देशी गाय की पहचान उसकी पीठ पर हंप होता है ) अब देशी गाय का मूत्र आधा कप और आधा चम्मच हल्दी दोनों मिलाके गरम करना जिससे उबाल आ जाये फिर उसको ठंडा कर लेना । Room Temperature में आने के बाद रोगी को चाय की तरहा पिलाना है .. चुस्किया ले ले के सिप सिप कर कर । एक और आयुर्वेदिक दावा है पुनर्नवा जिसको अगर आधा चम्मच इसमें मिलायेंगे तो और अच्छा result आयेगा । ये Complementary है जो आयुर्वेद के दुकान में पाउडर या छोटे छोटे पीसेस में मिलती है ।..............WATCH FULL VIDEO cancer treatment ayurveda , can ayurveda cure cancer , ayurvedic cancer hospital , cancer medicine in ayurveda , siddha medicine for cancer , ayurvedic treatment for lung cancer , cancer and ayurveda ayurvedic medicine for cancer treatment , cancer cure in ayurveda , treatment of cancer in ayurveda , आयुर्वेद में कैंसर का इलाज, cancer treatment in ayurveda, ayurvedic cancer treatment, ayurvedic treatment of cancer, cancer ayurveda, ayurvedic treatment for breast cancer,
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Home Remedies For Low Blood Pressure in Hindi - निम्न रक्तचाप का उपचार | Low BP Treatment
 
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Home Remedies For Low Blood Pressure - निम्न रक्तचाप का उपचार | Low BP Treatment | Low Blood Pressure Treatment | Treatment of Low Blood Pressure | کم بلڈ پریشر کا علاج Read this Article - http://www.healthcareforyou.in/निम्न-रक्तचाप-का-उपचार/ Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Healthcareforyou.in/ Website - http://www.healthcareforyou.in/ निम्न रक्तचाप का घरेलू उपचार - (Home Remedy for Low Blood Pressure) निम्न रक्तचाप की बीमारी ठीक करने के लिए दवाएं – 1. गुड़ (Jaggery) निम्न रक्तचाप की बीमारी के लिए गुड़ सबसे अच्छी दवा है। ये गुड़ पानी में मिलाकर, नमक डालकर, नीबू का रस मिलाकर पीजिये। एक गिलास पानी में 25 ग्राम गुड़, थोडा नमक और नींबू का रस मिलाकर दिन में दो तीन बार पीने से निम्न रक्तचाप (Low Blood Pressure) सबसे जल्दी ठीक होता है। 2. अनार का रस (Pomegranate Juice) अनार का रस एक ओर अच्छी दवा है। अनार के रस को रोज नमक डालकर पीने से बहुत जल्दी निम्न रक्तचाप (Low Blood Pressure) ठीक हो जाती है। 3. गन्ने का रस (Sugarcane Juice) श्री राजीव दीक्षित जी के अनुसार गन्ने के रस को रोज नमक डालकर पीने से भी निम्न रक्तचाप (Low Blood Pressure) ठीक हो जाती है। 4. मिश्री और मक्खन (Sugar and butter) मिश्री और मक्खन मिलाकर खाओ – ये निम्न रक्तचाप की सबसे अच्छी दवा है । 5. दूध और घी (Milk and Ghee) दूध और घी निम्न रक्तचाप के लिए और एक बढिया दवा है । दूध में घी मिलाकर पीना चाहिए। एक गिलास देशी गाय का दूध और एक चम्मच देशी गाय की घी मिलाकर रात को पीने से निम्न रक्तचाप बहुत अच्छे से ठीक होगा । 6. नमक का पानी (Salt Water) नमक के पानी को दिन में दो तीन बार पीने से भी निम्न रक्त चाप ठीक होता है। संतरे का रस (Orange Juice) तथा अनानास के रस (Pineapple Juice) में नमक डाल कर पीने से भी निम्न रक्तचाप ठीक होता है।
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Lung Cancer in Hindi - फेफड़ों का कैंसर | Lung Cancer Symptoms | Lung Cancer Treatment
 
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Lung Cancer - फेफड़ों का कैंसर | Lung Cancer Symptoms in Hindi | Lung Cancer Treatment in Hindi | Lungs Disease Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ फेफड़े (Lungs) - फेफड़े छाती में स्पंज की तरह शंकु के आकार के अंगो की एक जोड़ी है । यह हमारी श्वसन प्रणाली का हिस्सा है । बाँया फेफड़ा आकार में छोटा होता है क्योंकि हृद्धय बाँयी तरफ जगह लेता है । फेफडों का मुख्य कार्य साँस और रक्त के बीच गैसों का आदान प्रदान करना है । ऑक्सीजन फेफडों के माध्यम से शरीर में प्रवेश करती है और कार्बन डाईआक्साईड साँस द्वारा बाहर छोड़ी जाती है । फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) - कैंसर कोषाणु अपसामान्य कोषाणु होते हैं । कैंसर कोषाणु स्वस्थ कोषाणुओं के मुकाबले अधिक तेजी से पैदा होते तथा बढ़ते हैं। कुछ कैंसर कोषाणु मिलकर ऐसी संरचना विकसित कर सकते हैं, जिसे ट्यूमर कहा जाता है। फेफड़ों का कैंसर तब होता है, जब फेफड़ों में शामिल कोषाणु, परिवर्तित होकर अपसामान्य बन जाते हैं। फेफड़ों के कैंसर के कोषाणु रक्त अथवा लसीका प्रणाली के माध्यम से शरीर के अन्य क्षेत्रों में जा सकते हैं। फेफड़ों के कैंसर को मुख्यत: दो भागों में विभाजित किया गया है (ट्यूमर कोशिकाओं की रचना के आधार पर) – एन.एस.सी.एल.सी. और एस.सी.एल.सी. एन.एस.सी.एल.सी. कैंसर ( 75-80 प्रतिशत ) एन.एस.सी.एल.सी. कैंसर ( 15-20 प्रतिशत ) की तुलना में अधिक पाया जाता है । फेफड़ों के कैंसर के जोखिम कारक - फेफड़ें के कैंसर के खतरे को बढ़ाने में कई कारक सहायक है । इनमें से कुछ जोखिम कारकों को जीवन शैली में परिवर्तन द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है, जबकि कुछ अन्य कारकों को जैसे पारिवारिक इतिहास को नियंत्रित नही किया जा सकता । फेफड़ों के कैंसर के लिये जोखिम कारक : सिगरेट और बीड़ी धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर के लिये प्रमुखतम जोखिम कारक है । तम्बाकू का उपयोग किसी भी रूप में हानिकारक है चाहे धूम्रपान हो या निर्धूम (धूम्ररहित) । निर्धूम तम्बाकू के इस्तेमाल से होंठ, मुँह, ग्रासनली, पाचन, श्वसन और छाती के अन्दरूनी अंगो के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है । सिगरेट पीने से किसी भी व्यक्ति में फेफड़े के कैंसर होने की संभावना 15 से 30 गुना तक बढ़ जाती है। फेफड़ों के कैंसर के अलावा धूम्रपान के कारण शरीर में कहीं भी कैंसर हो सकता है जैसे सिर और गर्दन का क्षेत्र, पेट, जिगर, अग्नाशय, मलाशय, मूत्राशय, गुर्दे, गर्भाशय ग्रीवा, रक्त और अस्थिमज्जा (बोन मैरो) । फेफड़ों के कैंसर से बचाव - कोई ऐसा सिद्ध तरीका नही है जो फेफड़ों के कैंसर से पूर्णरूप से बचाव करने में सहायक हो । लेकिन फेफड़ों के कैंसर को कम करने हेतु कुछ कदम उठाये जा सकते है – फेफड़ों के कैंसर को रोकने का सबसे सही तरीका है कि धूम्रपान न किया जाये । यदि आप ऐसी जगह रहते या काम करते है जहां कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है तो उन्हें धूम्रपान बाहर जा कर करने के लिये अनुरोध करें । यदि आप एक ऐसे क्षेत्र में रह रहे है जहाँ रेडान एक समस्या है तो अपने घर में रेडोन के स्तर की जाँच करायें और जोखिम को कम करने के लिये कदम उठाएँ । नियमित शारीरिक गतिविधियों में संलग्न रहें । आहार में फल ओर सब्जियों का अधिक सेवन करें । फेफड़ों के कैंसर के संकेत एवं लक्षण - फेफड़ों का कैंसर आम तौर पर अपनी प्रारंभिक अवस्था में कोई भी विशिष्ट संकेत और लक्षण पैदा नही करता । फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित ज्यादातर लोगों में लक्षण तब पैदा होते है जब रोग उन्न्त अवस्था में पहुँच चुका होता है। इसके आम लक्षणों में शामिल हैं : लगातार खाँसी जो सामान्य उपचार के बावजूद बढ़ती जाती है । साँस की तकलीफ । कफ (बलगम) में खून आना । खाँसी के साथ खून आना । साँस में घरघराहट । सीने या कंधे में दर्द । वजन में अस्पष्टीकृत गिरावट । अत्याधिक थकान । भूख न लगना । फेफड़ों के कैंसर की जाँच - फेफड़ों के कैंसर के लक्षण आमतौर पर नही दिखाई देते । ये अधिकतर रोग की उन्नत अवस्था में पता चलते है, जब रोग का पूर्ण रूप से इलाज नहीं हो पाता । फेफड़ों का कैंसर के प्रारंभिक लक्षण जैसे लगातार खाँसी, सीने में दर्द और साँस की तकलीफ, फेफड़ों की अन्य बीमारियों जैसे कि संक्रमण या धूम्रपान के दीर्घकालिक प्रभावों से मिलते जुलते होते है और इन्हें गम्भीर रूप से नही लिया जाता । इस कारण रोग के निदान में अक्सर देरी होती जाती है । फेफड़ों के कैंसर के लिये तीन परीक्षणों का स्क्रीनिंग के रूप में अध्ययन किया है : छाती का एक्सरे : यह छाती के अंदर के अंगो तथा हड्डियों का एक्सरे है । बलगम कोशिका विज्ञान : यह एक प्रक्रिया है जहाँ बलगम का एक नमूना कैंसर की कोशिकाओं की जाँच के लिये लिया जाता है । सी.टी. स्कैन : यह शरीर के अंदर के अंगो की विस्तृत तस्वीरों की एक श्रृंखला बनाता है। इस प्रक्रिया में कम विकिरण उपयोग की जाती है । इन तीनों परीक्षणों में छाती का एक्स-रे और बलगम कोशिका-विज्ञान को कैंसर का पता लगाने के लिये कम संवेदनशील पाया गया है। केवल सीटी स्कैन को फेफड़ों के कैंसर की स्क्रीनिंग के लिये, उच्च जोखिम वाले रोगियों में इस्तेमाल करने की सिफारिश की गई है। lung cancer , lung cancer symptoms, lung cancer treatment, lung cancer symptoms in hindi, lung cancer stage 4, Symptoms of Cancer in Hindi, lung cancer symptoms, symptoms of lung cancer , lung cancer treatment , lungs ,treatment for lung cancer , mesothelioma, chemotherapy ,lung disease , what is lung cancer , cancer in hindi , breast cancer symptoms in hindi , lung cancer stages , cancer symptoms in hindi, फेफड़ों का कैंसर
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How to Lose Weight Fast - मोटापा कम करने के उपाय | Weight loss tips in hindi | Fast weight loss tips
 
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Small Daily Habits - Big Weight loss! | Weight loss tips in hindi | Weight Loss in Hindi | Fast weight loss tips in hindi Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ मोटापा – इस बीमारी (disease) के चपेट में क्या बच्चे, जवान और बूढ़े, सबी कोई इसके चपेट में है. यह कोई लाइलाज बीमारी नहीं है जिसका कोई इलाज नहीं हो सकता है – अगर आप आपने खान पान और regular exercise को अपने दिनचर्या (daily routine) में शामिल कर लेते है तो आपको मोटापे (weight gain) और वज़न बढ़ने की कभी शिकायत नहीं आयेगी मोटापा के कारण (Reason behind weight gain) फास्टफूड (fastfood) जायदा खाना Exercise नहीं करना जायदा तला-गला (oily) खाना खाने पर control नहीं होना Late night तक सोना एक ही place पर बैठ कर काम करना मोटापे से छुटकारा पाने के लिए घरेलु उपचार (Home Remedies to get rid of Weight Gain) मोटापे से बचने के लिए सबसे अच्छा तरीका रोजाना टहलना (jogging) चाहिए | जिस्से शरीर की अतिरीक्त चर्बी (extra fat) कम होती हैं | रोजाना सुबह एक ग्लास गुनगुने गर्म पानी में नीबूं का रस (warm water and lemon juice) मिलाकर पिने से भी मोटापे कम करने में फ़ायदा मिलता है | युवा लोगो को मोटापे से बचने के लिए प्रति दिन कम से कम एक या दो घंटा खेलना चाहिए इस्से शारीर चुस्त एवं तंदरुस्त बना रहता है | इस्से बचने के लिए असान तरीको में योगा भी एक महत्वपुर्ण उपाए हैं ,विभिन प्रकार के आसन (व्यायाम) जैसे सुर्य नमस्कार , धनुरास्सन , इत्यादि से भी मोटापे को कम करने में मदद मिलती है | वैसे खाने की चीजो को परहेज करे जिस्में वशा (fat) की मात्रा अधिक हो | जैसे क्रीम ,घी ,मक्खन (butter), तेल में तली हुई खाने की चीज | अपने पाचन क्रिया को चुस्त रखनी चाहिए | इसके लिए हरी सब्जी जैसे पत्तागोभी (cabbage), हरे रेशेदार साक को रोजाना सेवन करे | प्रातकाल के शमय में सूर्य की रौशनी से शारीर में बिटामिन –डी (Vitamin-D) बनता है साथ ही शारीर की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में भी सूर्य की रौशनी मदद करता है | जरुरत से ज्यादा खाने से परहेज करे जिस्से शारीर में चर्बी बनता है | खाने के तुरंत बाद लेटने या सोने से भी शारीर में चर्बी बन्ने लगता है | अत; खाने के बाद कम से कम एक घंटा बैठने की आदत डालनी चाहिए | रात के अलावा दिन में भी लम्बे शमय तक सोने से , दिन भर भोज्य पदार्थ ग्रहण करने से भी मोटापे में वृद्धि होती हैं | अत ; दिन में सोने की आदत को बदलना चाहिए और बार – बार खाने की प्रवृति में भी बदलाव करनी चाहिए | अपने खाने की चीजो में प्रोटीन एवं विटामिन वाले आहार को शामिल करना चाहिए |
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मुंह का कैंसर - Mouth Cancer | Mouth Cancer Symptoms in Hindi | Muh ke cancer ke lakshan
 
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मुंह का कैंसर - Mouth Cancer | Mouth Cancer Symptoms in Hindi | Mouth Cancer Treatment | Causes of Mouth Cancer | Risk factors for Oral Cancer | Muh ke Cancer ke lakshan | Signs of Mouth Cancer | منہ کا کینسر | मुंह का कैंसर के संकेत और लक्षण Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Healthcareforyou.in/ Website - http://www.healthcareforyou.in/ मुख का कैंसर - मुँह के कैंसर का अर्थ है - मौखिक गुहा ( होठों से शुरू होकर पीछे टॉन्सिल तक का हिस्सा ) अथवा ओरोफैरिन्कस ( गले का अंदरूनी हिस्सा ) के ऊतकों में होने वाला कैंसर। मौखिक गुहा - मौखिक गुहा में अलग-अलग हिस्से होते है : जीभ होंठ मसूडे और दाँत गालों का अस्तर लार ग्रथिंयाँ मुँह की निचली सतह मुँह का ऊपर का हिस्सा (ठोस तालू) टॉन्सिल अलिजिव्हा मुंह का कैंसर के संकेत और लक्षण - मुहँ, चेहरा या गले में पुराना पीड़ादायक घाव जो ठीक न हो रहा हो । मुहँ खोलने में कठिनाई । जीभ, मसूड़ों और मुहँ के भीतरी हिस्सों में सफेद, लाल या मिश्रित चकत्ते होना । गले में गाठँ होना । मुहँ, जीभ, जबडे़ में दर्द और चबाने या निगलने में कठिनाई। होंठ, मसूड़ों या मुहँ की भीतरी हिस्सों पर सूजन या गाठँ होना । मुहँ में अस्पष्टीकृत रक्तस्त्राव । स्वर या आवाज में परिवर्तन । ढीला दाँत और बुरी फिटिगं का डेन्चर । अस्पष्टीकृत वजन घटना ।
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Arthritis Treatment in Hindi  - गठिया का उपचार | Home Remedies of Arthritis
 
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Home Remedies of Arthritis - गठिया के घरेलू उपचार | Arthritis Treatment in Hindi | Natural Remedies for Arthritis | Arthritis Cure | Gathiya ka ilaz Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Healthcareforyou.in/ Website - http://www.healthcareforyou.in/ Home Remedies of Arthritis - गठिया के घरेलू उपचार | 1. चूना ( Lime ) दोनों तरह के गठिया Osteoarthritis and Rheumatoid arthritis में आप चूने का प्रयोग करें, वही चूना जो आप पान में खाते हो। चूने को रोज सुबह खाली पेट गेंहू के दाने के बराबर खाना चाहिए। आप इसको एक कप दही में मिलाकर या दाल में मिलाकर, नहीं तो पानी में मिलाकर ले सकते है। ऐसा लगातार तीन महीने तक करने से गठिया ठीक हो जाती है। ( ध्यान रहे पानी पीने के समय हमेशा बैठ के घूँट-घूँट कर के पीना चाहिए नहीं तो बीमारी ठीक नहीं होगी। ) अगर आपके हाथ या पैर की हड्डी में कट-कट की आवाज आती हो तो वो भी चूने से ठीक हो जायेगा। 2. मेथी दाना ( Fenugreek Seeds ) दोनों तरह के गठिया ( Arthritis ) के लिए छोटा मेथी दाना एक ओर अच्छी दवा है। एक कांच के गिलास में गर्म पानी लेकर एक छोटा चम्मच मेथी दाना को उसमें भिगो दें। फिर उसको रात भर भीगा रहने दें। सुबह उठ कर पानी घूँट-घूँट करके पी लीजिये, और मेथी दाने को चबा-चबा कर खा लीजिये। ऐसा तीन महीने तक करने से गठिया ठीक हो जाती है। ( ध्यान रहे पानी पीने के समय हमेशा बैठ के घूँट-घूँट कर के पीना चाहिए नहीं तो बीमारी ठीक नहीं होगी। ) 3. हारश्रृंगार ( पारिजात ) के पत्ते ( Harsrringar ( Parijata ) Leaves ) जोड़ो का दर्द यदि बहुत पुराना है भले ही 20 साल या 30 साल पुराना है या जब डाक्टर कहें कि घुटने बदलने पड़ेंगे, उस समय चूना काम नहीं करेगा। उसको चूने की जगह हारश्रृंगार के पत्तों का काढ़ा देना पड़ेगा। हारश्रृंगार को पारिजात भी कहते हैं। इसमें सफेद रंग के छोटे फूल होते हैं जिनकी नारंगी रंग की डंडी होती है। इसके फूलों में बहुत तेज खुशबू होती है। इस पेड़ के 7-8 पत्तों को बारीक पीस कर चटनी जैसा बनाकर एक गिलास पानी में उबालें, आधा गिलास रह जाने पर सुबह खाली पेट पी लें। तीन महीने में यह समस्या बिल्कुल ठीक हो जायेगी । बुखार के लिए भी लाभकारी – किसी भी तरह का बुखार होने की स्थिति में भी यह काढ़ा काम करता है। उस स्थिति में 7-8 दिन ही देना है। ये औषधि बहुत खास ( Exclusive ) है और बहुत Strong औषधि है। इसलिए अकेली ही देनी चाहिये, इसके साथ कोई भी दूसरी दवा नहीं देनी चाहिए। Arthritis Treatment in Ayurveda, Arthritis Treatment In Hindi, arthritis , rheumatoid arthritis , arthritis symptoms , arthritis treatment , what causes arthritis , rheumatoid arthritis treatment , symptoms of arthritis , arthritis causes , arthritis in hindi , arthritis treatment in ayurveda in hindi , best treatment of gathiya, गठिया, गठिया के घरेलू उपचार, home remedies of Arthritis
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गठिया: लक्षण, कारण तथा इलाज - Arthritis: Symptoms, Causes And Treatment | Symptoms of Arthritis
 
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गठिया: लक्षण, कारण, जांच तथा इलाज - Arthritis: Symptoms, Causes And Treatment | Symptoms of Arthritis in Hindi | Arthritis Cure | Arthritis Treatment | Gathiya ka ilaz Read this article - http://www.healthcareforyou.in/गठिया-arthritis Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Healthcareforyou.in/ Website - http://www.healthcareforyou.in/ गठिया ( Arthritis ) गठिया ( Arthritis ) जोड़ों में होने वाली एक बहुत ही आम बीमारी है। इस बीमारी में जोड़ों में दर्द होता है और जोड़ों को घुमाने, मोड़ने, हिलाने और हरकत करने में परेशानी होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक सौ से भी अधिक किस्म के अर्थराइटिस होते हैं। अर्थराइटिस से व्यक्ति की रोज़मर्रा की जीवनशैली बुरी तरह प्रभावित होती है। यह जीवन भर सताने वाली बीमारी होती है। बीमारी अधिक बढ़ने पर मरीज के जोड़ों में असहनीय पीड़ा होती है और हाथ–पांव हरकत करना तक बंद कर देते हैं। गठिया क्या है ? ( What is Arthritis ? ) गठिया ( Arthritis ) आपके शरीर के जोड़ों में सूजन उत्पन्न होने पर गठिया होता है या आपके जोड़ों में उपास्थि (कोमल हड्डी) भंग हो जाती है तब गठिया होता है। शरीर के जोड़ – शरीर के जोड़ ऐसे स्थल होते हैं जहां दो या दो से अधिक हड्डियाँ एक दूसरे से मिलती हैं जैसे कि कूल्हे या घुटने। उपास्थि – उपास्थि जोड़ों में गद्दे की तरह होती है जो दबाव से उनकी रक्षा करती है और क्रियाकलाप को सहज बनाती है। जब किसी जोड़ में उपास्थि भंग हो जाती है तो आपकी हड्डियाँ एक दूसरे के साथ रगड़ खातीं हैं, इससे दर्द, सूजन और ऐंठन उत्पन्न होती है। हड्डी का गठिया ( Bone Arthritis ) हड्डी का गठिया सबसे सामान्य तरह का गठिया होता है। इस तरह के गठिया में, लंबे समय से उपयोग में लाए जाने अथवा व्यक्ति की उम्र बढ़ने की स्थिति में जोड़ घिस जाते है। जोड़ पर चोट लग जाने से भी इस प्रकार का गठिया हो जाता है। हड्डी का गठिया अक्सर घुटनों, कूल्हों और हाथों में होता है। जोड़ों में दर्द और स्थूलता शुरू हो जाती है। समय-समय पर जोड़ों के आसपास के ऊतकों में तनाव होता है और उससे दर्द बढ़ता है। रियूमेटायड गठिया ( Rheumatoid Arthritis ) गठिया (Arthritis) उस समय भी हो सकता है जब प्रतिरोधक क्षमता प्रणाली, जो आमतौर से शरीर को संक्रमण से बचाती है, शरीर के ऊतकों पर वार कर देती है। इस प्रकार की गठिया में रियूमेटायड गठिया सबसे सामान्य गठिया होता है। यह इस बीमारी का बहुत अधिक पाया जाने वाला गंभीर रूप है। इस अर्थराइटिस का समय पर प्रभावी उपचार करवाना आवश्‍यक होता है वरना बीमारी बढ़ने पर एक साल के अन्दर ही शरीर के जोड़ों को काफी नुकसान हो जाता है। इससे जोड़ों में लाली आ जाती है और दर्द होता है और शरीर के दूसरे अंग भी इससे प्रभावित हो सकते हैं, जैसे कि हृदय, पेषियाँ, रक्त वाहिकाएँ, तंत्रिकाएं और आँखें। गठिया के लक्षण ( Symptoms of Arthritis ) - गठिया के लक्षण निम्नलिखित है : जोड़ों में दर्द। जोड़ स्थिर नहीं रहते हैं या ऐसा महसूस होता है कि यह सहारा नहीं देगा। जोड़ बड़े हो जाते हैं या सूज़न आ जाती है। अक्सर सुबह के समय अकड़न। जोड़ का सीमित उपयोग। जोड़ के आसपास गर्माहट। जोड़ के आसपास की त्वचा पर लालीपन। ( रियूमेटायड गठिया (Arthritis) के अन्य लक्षण भी हो सकते हैं। यदि आप के कोई ऐसे लक्षण हों, जिनसे आपको तकलीफ या चिंता होती है, तो अपने चिकित्सक से मुलाकात करें। ) गठिया की जांच ( Check Arthritis ) - आपके डाॅक्टर आपके स्वास्थ्य के बारे में आपसे बात करेगें और आपके जोड़ देखेगें। आपके डाॅक्टर रक्तजाँच, एक्स-रे या दर्द वाले जोड़ के आसपास के द्रव का कुछ नमूना लेने के लिए कह सकते हैं। गठिया का इलाज ( Arthritis Treatment ) - गठिया का इलाज निम्न बातों पर होता है : कारण। कौन से जोड़ों में दर्द है। दर्द की मात्रा। गठिया आपकी दैनिक गतिविधियों को किस प्रकार प्रभावित करता है। आपकी आयु। आपका कार्य या गतिविधि। चिकित्सक द्वारा सुझाव ( Physician Suggestion ) – आपका चिकित्सक ये सुझाव दे सकता है : दर्द और सूजन नियंत्रित करने के लिए दवाएँ। शारीरिक या पेषेवर थेरेपी। वजन कम करना। पुराने की जगह नया जोड़ लगाने के लिए सर्जरी। स्वयं इलाज ( Self Treatment ) स्वयं इलाज रूप में, आपको जरूरत पड़ सकती है : क्रिया और जोड़ की षक्ति में सुधार के लिए व्यायाम। अच्छे विकल्पों में टहलना, तैरना, साईकिल चलाना, नृत्य करना, षक्ति परीक्षण और षरीर के हल्के खिंचाव वाले व्यायाम षामिल हैं। दर्द और सूजन पर नियंत्रण के लिए गर्म या ठंडे पानी का प्रयोग। उन स्थितियों और गतिविधियों से बचना जिनसे आपके दर्दयुक्त जोड़ों पर अतिरिक्त ज़ोर पड़ता हो। किसी एक स्थिति में अधिक लंबे समय तक रहने से बचना। यदि आपका कोई प्रश्न या चिंता हो, तो अपने डाॅक्टर या नर्स से बात करें।
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Wheatgrass Benefits In Hindi | गेहूँ की घास के फ़ायदे | Wheatgrass Nutrition
 
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Wheatgrass Benefits - गेहूँ की घास के फ़ायदे | Health benefits of wheatgrass in Hindi - गेहूँ की घास के फ़ायदे | Wheatgrass in Hindi | Wheatgrass Nutrition | Benefits of wheatgrass juice Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ गेहूं के जवारे : पृथ्वी की संजीवनी बूटी प्रकृति ने हमें अनेक अनमोल नियामतें दी हैं। गेहूं के जवारे उनमें से ही प्रकृति की एक अनमोल देन है। अनेक आहार शास्त्रियों ने इसे संजीवनी बूटी भी कहा है, क्योंकि ऐसा कोई रोग नहीं, जिसमें इसका सेवन लाभ नहीं देता हो। यदि किसी रोग से रोगी निराश है तो वह इसका सेवन कर श्रेष्ठ स्वास्थ्य पा सकता है। गेहूं के जवारों में अनेक अनमोल पोषक तत्व व रोग निवारक गुण पाए जाते हैं, जिससे इसे आहार नहीं वरन्‌ अमृत का दर्जा भी दिया जा सकता है। जवारों में सबसे प्रमुख तत्व क्लोरोफिल पाया जाता है। प्रसिद्ध आहार शास्त्री डॉ. बशर के अनुसार क्लोरोफिल (गेहूंके जवारों में पाया जाने वाला प्रमुख तत्व) को केंद्रित सूर्य शक्ति कहा है। गेहूं के जवारे रक्त व रक्त संचार संबंधी रोगों, रक्त की कमी, उच्च रक्तचाप, सर्दी, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, स्थायी सर्दी, साइनस, पाचन संबंधी रोग, पेट में छाले, कैंसर, आंतों की सूजन, दांत संबंधी समस्याओं, दांत का हिलना, मसूड़ों से खून आना, चर्म रोग, एक्जिमा, किडनी संबंधी रोग, सेक्स संबंधी रोग, शीघ्रपतन, कान के रोग, थायराइड ग्रंथि के रोग व अनेक ऐसे रोग जिनसे रोगी निराश हो गया, उनके लिए गेहूं के जवारे अनमोल औषधि हैं। इसलिए कोई भी रोग हो तो वर्तमान में चल रही चिकित्सा पद्धति के साथ-साथ इसका प्रयोग कर आशातीत लाभ प्राप्त किया जा सकता है। हिमोग्लोबिन रक्त में पाया जाने वाला एक प्रमुख घटक है। हिमोग्लोबिन में हेमिन नामक तत्व पाया जाता है। रासायनिक रूप से हिमोग्लोबिन व हेमिन में काफी समानता है। हिमोग्लोबिन व हेमिन में कार्बन, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन व नाइट्रोजन के अणुओं की संख्या व उनकी आपस में संरचना भी करीब-करीब एक जैसी होती है। हिमोग्लोबिन व हेमिन की संरचना में केवल एक ही अंतर होता है कि क्लोरोफिल के परमाणु केंद्र में मैग्नेशियम, जबकि हेमिन के परमाणु केंद्र में लोहा स्थित होता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि हिमोग्लोबिन व क्लोरोफिल में काफी समानता है और इसीलिए गेहूं के जवारों को हरा रक्त कहना भी कोई अतिशयोक्ति नहीं है। गेहूं के जवारों में रोग निरोधक व रोग निवारक शक्ति पाई जाती है। कई आहार शास्त्री इसे रक्त बनाने वाला प्राकृतिक परमाणु कहते हैं। गेहूं के जवारों की प्रकृति क्षारीय होती है, इसीलिए ये पाचन संस्थान व रक्त द्वारा आसानी से अधिशोषित हो जाते हैं। यदि कोई रोगी व्यक्ति वर्तमान में चल रही चिकित्सा के साथ-साथ गेहूं के जवारों का प्रयोग करता है तो उसे रोग से मुक्ति में मदद मिलती है और वह बरसों पुराने रोग से मुक्ति पा जाता है। यहां एक रोग से ही मुक्ति नहीं मिलती है वरन अनेक रोगों से भी मुक्ति मिलती है, साथ ही यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति इसका सेवन करता है तो उसकी जीवनशक्ति में अपार वृद्धि होती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि गेहूं के जवारे से रोगी तो स्वस्थ होता ही है किंतु सामान्य स्वास्थ्य वाला व्यक्ति भी अपार शक्ति पाता है। इसका नियमित सेवन करने से शरीर में थकान तो आती ही नहीं है। यदि किसी असाध्य रोग से पीड़ित व्यक्ति को गेहूं के जवारों का प्रयोग कराना है तो उसकी वर्तमान में चल रही चिकित्सा को बिना बंद किए भी गेहूं के जवारों का सेवन कराया जा सकता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि कोई चिकित्सा पद्धति गेहूं के जवारों के प्रयोग में आड़े नहीं आती है, क्योंकि गेहूं के जवारे औषधि ही नहीं वरन श्रेष्ठ आहार भी है।
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Benefits of Green tea In Hindi - हरी चाय के लाभ | Green Tea Benefits  | Advantages of Green Tea
 
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Benefits of Green tea - हरी चाय के लाभ | Green Tea Benefits | Advantages of Green Tea | Health Benefits of Green Tea | Health Benefits of Tea | Benefits of Tea Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ ग्रीन टी हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत फायदेमंद है. और ग्रीन टी आजकल बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रही है. ग्रीन टी को कैमिला साइनेंसिस की पत्तियों को सुखाकर बनाया जाता है. तो आइए आज हम जानते हैं कि ग्रीन टी (हरी चाय) के क्या-क्या फायदे हैं और इसके क्या-क्या नुकसान हैं. इसे कितनी मात्रा में पीना चाहिए, इत्यादि.ग्रीन टी (हरी चाय) के फायदे : ग्रीन टी सुबह-सुबह खाली पेट नहीं पीना चाहिए. ग्रीन टी के साथ दवा न लें, दवा पानी के साथ हीं लें. ग्रीन टी हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. ग्रीन टी कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकती है. ग्रीन टी नियमित पीने से मूत्राशय के कैंसर की आशंका नहीं के बराबर रह जाती है. ग्रीन टी ब्लडप्रेशर को नियन्त्रण में रखता है. इसे पीने से दिल का दौरा पड़ने की सम्भावना कम हो जाती है. हार्ड ग्रीन टी नहीं पीनी चाहिए, इससे पेट की समस्याएँ हो सकती है, नींद आने में समस्या हो सकती है, चक्‍कर आने जैसी समस्‍या पैदा हो सकती है. ग्रीन टी वजन कम करने में मदद करती है, यह फालतू कैलोरी बर्न करने में मदद करती है. अगर आप हर दिन दो-तीन कप से ज्‍यादा ग्रीन टी पियेंगे तो यह आपको नुकसान पहुंचाएगी. दांत के रोग फैलाने वाले बैक्टीरिया को ग्रीन टी खत्म कर देती है. यह मुंह में बदबू पैदा करने वाली बैक्टीरिया के विकास को कम कर देती है. हमेशा ताजी ग्रीन टी पियें. ग्रीन टी ब्‍लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है. ग्रीन टी में पाया जानेवाला अमीनो एसिड चिंता दूर करने में मदद करता है. ग्रीन टी में हाई फ्लोराइड नाम का chemical पाया जाता है. यह हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है. यह बोन डेंसिटी बनाए रखने में मदद करता है. ग्रीन टी फ़ूड पोइसोनिंग से बचाता है. ग्रीन टी एंटी एजिंग दवा का काम करता है. benefits of green tea, green tea , green tea benefits , best green tea, green tea diet , green tea weight loss ,health benefits of green tea, green tea health benefits , advantages of green tea. is green tea good for you , green tea advantages , green tea leaves , tea benefits , green tea for weight loss , health benefits of tea, benefits of tea , green tea side effects
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Home Remedy For Headaches In Hindi - सर दर्द के लिए घरेलु उपाय  | Headache Remedies | Headache Cures
 
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Home Remedy For Headaches - सर दर्द के लिए घरेलु उपाय | Headache Remedies In Hindi | Headache Cures | Headache Treatment | Natural Remedies For Headaches Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में अक्सर हमें सर दर्द की परेशानियों का सामना करना पड़ता है | रोजाना की भागदौड़ के कारण कभी कमजोरी तो कभी थकान जैसी समस्याएं हमें कई तरह से परेशानियों में डाल देती है | ऐसी ही कुछ समस्याओ में से सर दर्द भी है , जिसके कारण कई बार हमारा शरीर प्रभावित होता है | सर दर्द के कारण (Causes of Head Pain) शरीर मे पानी कि मात्रा के कम होने के कारण भी सर दर्द होने लगता है | मौसम में अचानक बदलाव हो या फिर तेज धुप में बाहर निकलने पर सर दर्द होने लगते है | अगर आप रात में देर तक नहीं सोते है और आपकी नींद पूरी नहीं होती है, तो आपको सर दर्द होने लगता है और साथ ही साथ Neck Pain शुरु हो सकता है | सर दर्द के लिए घरेलु उपाय Take rest – अगर ज्यादा थकान के कारण सर दर्द हो रहा है, तो आपको नींद नहीं आ सकती है, इस इस्थी में तो आप थोड़ी देर आराम से सो जाये | Ice pack – किसी कपडे के बैग में थोड़े से बर्फ के टुकड़े को भर ले | अब उसे अपने सर में रख दे थोड़ी देर तक रखने के बाद हटा दे | इसी तरह करते रहे 10 से 15 minute तक | तुलसी के पत्ते वाली चाय – एक ग्लास जल को तुलसी के पत्ते डाल कर उबाल ले और उसमे थोड़ी सी चाय पत्ती भी डाल दे | चाय को दिन में तीन बार पिए | मधुरस एवं तुलसी – एक ग्लास उबले हुए पानी में 2 से तीन चम्मच मधुरस मिला ले | अब उस तुलसी जल को पि जाये सर दर्द कम होगा | लौंग (cloves) – 15 से 20 लौंग के दाने को पिस कर powder बना ले | अब उस powder को थोड़े से पानी या फिर तेल में मिलाकर उसे माथे में लगाए | सेब (apple) – सेब के फल को काट ले फिर उसे नमक के साथ खाए | इससे भी दर्द से राहत मिलेगा | प्याज (onian) – सर दर्द से राहत के लिए प्याज के paste का भी इस्तेमाल किया जा सकता है | 2 से 3 प्याज ले उसे पीस कर paste तैयार कर ले , उस paste को अपने पैरो के तलवे मे लागाये | लगाकर 20 minute के लिए छोड़ दे | head massage – tension तनाव आदि के कारण होने वाले सर दर्द को दुर भागाने के लिए, आप सिर के massage करवाए | इससे भी दर्द से राहत मिलेगा | बाजारों में उपलब्ध पाए जाने वाले ठन्डे तेल को massage कर या लगाकर सोने से भी सर दर्द दूर होता है |
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Best Foods To Relieve Migraine Headache - सर दर्द के लिए सर्वोतम आहार
 
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Best Foods To Relieve Migraine Headache - सर दर्द के लिए सर्वोतम आहार | Prevent Headaches- Eat These Foods | migraine relief Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ सिरदर्द का रोग अर्धकपारी या फिर माइग्रेन एक बडी़ ही आम सी बीमारी है। कई लोग माइग्रेन से हफ्ते में एक या दो बार जरुर जूझते हैं। इसके रोगी वे होते हैं जिनके घरों में यह बीमारी सालों से चली आ रही हो। माइग्रेन का दर्द बड़ा ही तेज होता है जिसमें सिर के एक ही ओर तेज़ दर्द होने लगता है। यह दर्द कई अन्‍य बीमारियों की भी न्‍यौता देता है जैसे, चक्‍कर, उल्‍टी और थकान। माइग्रेन के दर्द को ठीक करने के कई तरीके हैं जैसे दवाइयां या फिर कुछ खाघ पदार्थ। क्‍या आप जानते हैं कि ऐसे कई फूड्स हैं जिन्‍हें खा कर आप माइग्रेन के दर्द से तुरंत ही छुटकारा पा सकते हैं। यदि आपको हर समय दवाइयों पर जिन्‍दा नहीं रहना है तो अब खाघ पदार्थ खा कर अपने जीवन की रक्षा करें। इन्‍हें खाने के अलावा थोड़ा आराम करना भी आवश्‍यक है। एक अच्‍छी नींद भी माइग्रेन के दर्द से राहत दिला सकती है। यहां कई प्रकार के फूड दिये जा रहे हैं जिससे आपको माइग्रेन के दर्द से राहत मिल जाएगी। Best Foods To Relieve Migraine Headache हरी पत्‍तेदार सब्‍जियां - इन सब्‍जियों में मैग्निशियम अधिक होता है। यह रसायन माइग्रेन के दर्द को तुरंत गायब कर देगा। साबुत अनाज, समुंद्री जीव और गेहूं आदि में बहुत मैग्निशियम होता है। मछली - इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड और विटामिन पाया जाता है। ये तत्‍व माइग्रेन का दर्द पैदा करने वाली सनसनाहट को कम करते हैं। अलसी का बीज - इसमें भी खूब सारा ओमेगा 3 और फाइबर पाया जाता है। यह बीज सूजन को कम करती हैं। कॉफी - यह बात बिल्‍कुल सही है कि सिर दर्द में कॉफी पीने से वह गायब हो जाता है, तो माइग्रेन अटैक आने पर कॉफी का सेवन जरुर करें। रेड वाइन - वाइन और बीयर में टायरामाइन पाया जाता है जो माइग्रेन के दर्द को दूर करता है। ब्रॉक्‍ली - इनमें मैग्‍निशीयम पाया जाता है तो ब्रॉकली को या तो स्‍टीम कर के खाइये या फिर उबाल कर। बाजरा - इसमें फाइबर, एंटीऑक्‍सीडेंट और मिनरल पाये जाते हैं। तो ऐसे में दर्द पड़ने पर साबुत अनाज से बने भोजन का जरुर सेवन करें। अदरक - आयुर्वेद के अनुसार अदरक आपके सिर दर्द को ठीक कर सकता है। भोजन बनाते वक्‍त उसमें थोड़ा सा अदरक मिला दें और फिर खाएं।
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Symptoms of HIV in Hindi - एचआईवी के लक्षण | HIV Symptoms | Signs of HIV | HIV Aids Symptoms
 
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Symptoms of HIV - एचआईवी के लक्षण | HIV Symptoms in Hindi | Signs of HIV in Hindi | HIV Aids Symptoms | Aids Symptoms | Symptoms of HIV Aids Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ एचआईवी होने के लक्षण (Symptoms of HIV) - एच आई वी यानि ह्यूमन इम्‍युनडिफिशिएंशी वायरस एक विषाणु है जो बॉडी के इम्‍यून सिस्‍टम पर नकारात्‍मक प्रभाव ड़ालता है और व्‍यक्ति के शरीर में उसकी प्रतिरोधक क्षमता को दिनोंदिन कमजोर कर देता है। एक सर्वे के अनुसार, एच आई वी के शुरूआती स्‍टेज में इसका पता नहीं चल पाता है और व्‍यक्ति को इलाज करवाने में देर हो जाती है। इसीलिए आपको एच आई वी के शुरूआती 12 लक्षणों के बारे में पता होना जरूरी है। बार - बार बुखार आना : हर दो तीन दिन में बुखार महसूस होना और कई बार तेजी से बुखार आना, एच आई वी का सबसे पहला लक्षण होता है। थकान होना : पिछले कुछ दिनों से पहले से ज्‍यादा थकान होना या हर समय थकावट महसूस करना एच आई वी का शुरूआती लक्षण होता है। मांशपेशियों में खिचावं : आपने किसी प्रकार का भी भारी काम नहीं किया या फिर आप शारीरिक मेहनत का कोई काम नहीं करते , फिर भी मांशपेशियों में हमेशा तनाव और अकड़न रहती है। यह भी एच आई वी का लक्षण होता है। जोड़ों में दर्द व सूजन : ढ़लती उम्र से पहले ही अगर आपके जोड़ों में दर्द और सूजन हो जाती है तो आपको एच आई वी टेस्‍ट करवाने की जरूरत है। गला पकना : अक्‍सर कम पानी पीने की वजह से गला पकने की शिकायत होती है लेकिन अगर आप पानी पर्याप्‍त मात्रा में पीते हैं और फिर भी आपके गले में भयंकर खराश और पकन महसूस हो, तो यह लक्षण अच्‍छा नहीं है। सिर में दर्द : सिर में हर समय हल्‍का - हल्‍का दर्द रहना, सुबह के समय दर्द में आराम और दिन के बढ़ने के साथ दर्द में भी बढ़ोत्‍तरी एच आई वी का सबसे बड़ा लक्षण है। धीरे - धीरे वजन का कम होना : एच आई वी में मरीज का वजन एकदम से नहीं घटता है। हर दिन धीरे - धीरे बॉडी के सिस्‍टम पर प्रभाव पड़ता है और वजन में कमी होती है। अगर पिछले दो महीनों में बिना प्रयास के आपके वजन में गिरावट आई है तो चेक करवा लें। स्‍कीन पर रेशैज होना : शरीर में हल्‍के लाल रंग के चक्‍त्‍ते पड़ना या रेशैज होना भी एच आई वी का लक्षण है। बिना वजह के तनाव होना : आपके पास कोई प्रॉब्‍लम नहीं है लेकिन फिर भी आपको तनाव हो जाता है, बात - बात पर रोना आ जाता है तो नि:संदेह आपको एच आई वी की जांच करवाना जरूरी है। मतली आना : हर समय मतली आना या फिर खाना खाने के तुरंत बाद उल्‍टी होना भी शरीर में एच आई वी के वायरस का होना इंडीकेट करते हैं। हमेशा जुकाम रहना : मौसम आपके बेहद अनुकूल है लेकिन उस हालत में भी नाक बहती रहती है। हर समय छींक आती है और रूमाल का साथ हमेशा चाहिए होता है। ड्राई कफ : आपको भयंकर खांसी नहीं हुई थी लेकिन हमेशा कफ आता रहता है। कफ में कोई ब्‍लड़ नहीं आता। मुंह का जायका खराब रहता है। अगर आपको इनमें से अधिकाशत: लक्षण अपने शरीर में लगते हैं तो आप एच आई वी टेस्‍ट जरूर करवाएं।
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Yoga Poses to Undo the Damage Caused by Desk Job | Excercise For Back Pain
 
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Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ sholder pain, desk job pain , Yoga Poses, Yoga Poses to Undo the Damage Caused by Desk Job, back pain when sitting , desk jobs, desk back pain , pain when sitting , pain in neck and shoulder , desk job back pain , exercises for neck and shoulder pain , ache jobs , how to fix neck pain , repetitive strain injury shoulder , upper back and shoulder pain , yoga for neck pain , pain in shoulder and neck
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How to Get Fair Skin in Hindi- अपनी त्वचा को कैसे  गोरा बनायें ? | How to Become Fair
 
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How to Get Fair Skin - अपनी त्वचा को कैसे गोरा बनायें ? | How to Become Fair | Home Remedies For Fair Skin | Beauty Tips For Fairness | How to get glowing skin | Home remedies for glowing Skin | Tips for glowing skin Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ 1 - ताजा नींबू का रस प्रयोग करें: नींबू को टुकड़ों में काटें, इसका एक भाग प्रयोग में लें और बचा हुआ आधा नींबू बाद में उपयोग के लिए रख दें। बचा हुआ नींबू का टुकड़ा रेफ्रिजटर या किसी अन्य ठन्डे स्थान पर ही रखें।अब एक कटोरी में आधे कटे नींबू का रस निकालें। चाक़ू की सहायता से नींबू में छोटे छोटे किन्तु गहरे छेद कर दें। इससे रस निकालने में आसानी होगी। अब रुई के फाहे की मदद से नींबू का रस त्वचा के उस हिस्से पर लगाएं जहाँ का रंग आप हल्का करना चाहते हों । फिर चाहे ये आपका चेहरा हो, गर्दन हो या शरीर का और कोई हिस्सा. ध्यान रखिएं की नींबू का रस आपकी आँखों में न जाये। अब इसे 15 से 20 मिनट तक रखकर चेहरा धो दें। चेहरा धोने के लिए गुनगुने पानी का उपयोग करें और नींबू का रस लगाने के बाद हमेशा moisturizer का उपयोग करें। इस प्रयोग को सप्ताह में दो -तीन बार दोहरायें परंतु एक ही दिन में एक बार से ज्यादा न करने की सलाह दी जाती है। यदि आपको लगता है कि नींबू का रस आपकी त्वचा के हिसाब से बहुत ज्वलनशील है तो इसे चेहरे पर लगाने से पहले इसमें आधा पानी मिला दें। 2- लेमन मास्क बनायें: एक मास्क आपकी त्वचा के रोमछिद्रों में नींबू के अम्लीय हिस्से को धीरे धीरे अंदर जाने देता है और धीरे धीरे आपकी त्वचा के कोम्प्लेक्सशन को बदलता है। त्वचा के रंग को हल्का करने वाले मास्क के लिए, 1 चमच्च नींबू का रस, 1 चमच्च टमाटर का रस, 1 चमच्च ककड़ी/खीरे का रस, और एक चमच्च चन्दन के पेस्ट को मिला कर पेस्ट बना लें। इसे त्वचा पर लगाएं और 15-20 मिनट्स लगा रहने दें। फिर इसे गुनगुने पानी और से धो लें और मॉइस्चराइजर लगा लें। सुखी या शुष्क त्वचा के मास्क के लिए, 1 चमच्च दूध का पाउडर, 1 चमच्च शहद, 1 चमच्च , एक छोटी चम्मच नींबू का रस और दो बूँद सुंगंधित तेल को एक साथ मिला लें। इसे त्वचा पर लगाएं और 20-25 मिनट्स के लिए लगा रहने दें। अब गुनगुने पानी से धो कर मॉइस्चराइजर लगा लें। हफ्ते में एक या दो बार, मास्क्स, एक्सफ़ोलिएंट्स, और पील्स का उपयोग सोच समझ कर करना चाहिए। त्वचा सुखाने वाले तत्वों से अधिक संपर्क अधिक शुष्क त्वचा और जलन का कारण बन सकता है। 3- नारियल पानी को आजमाएं: नारियल पानी त्वचा को नर्म और कोमल बनाने के साथ इसका रंग भी हल्का करता है। नारियल पानी में रुई का फाहा डुबो कर अपने चेहरे को उससे पोंछें, या किसी अन्य शरीर के भाग पर लगाएं जिसका आप रंग हल्का करना चाहते हैं। इसे धोने की कोई जरूरत नहीं है। आप नारियल पानी पी भी सकतें हैं इससे आपकी त्वचा में अंदर से बाहर पानी की आपूर्ति होती है। नारियल पानी आवश्यक मिनरल्स का बहुत अच्छा स्त्रोत है और इसमें केलोरीज़ भी कम होती हैं। 4- एलोवेरा का उपयोग करें: एलो वेरा का रस/अर्क एक बहुत ही अच्छा प्राकृतिक शामक है, जो जल जाने पर या त्वचा के घावों को ठीक करने में सहायता करता है। यह बहुत ही मॉइस्चराइजिंग है और त्वचा के पुनर्नवीनीकरण को भी बढ़ावा देता है - जिससे यह गहरे धब्बों को कम करने और त्वचा का रंग हल्का करने में सहायक होता है। एलोवेरा के पौधे की पत्तियां तोड़ लें (यह प्लांट नर्सरीज़ में उपलब्ध है) और इसके जेल जैसे रस को उन सभी जगहों पर लगाएं जिन्हे आप हल्का करना चाहते हैं। एलोवेरा आपकी त्वचा के लिए अच्छा है, इसलिए आप इसे बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के डर के जितनी बार चाहें उपयोग कर सकते हैं। fair skin , beauty tips for fairness, how to get fair skin , how to become fair , tips for fair skin , how to get a fair skin , how to get glowing skin , how to get white skin ,how to fair skin ,fair skin ,how to make skin fair , fair skin tips , how to get fair and glowing skin , how to get beautiful skin , how to get fair skin fast , tips to become fair ,how to get fair skin naturally ,home remedies for fair skin , skin fairness tips , how to get fair , how to have fair skin
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Symptoms of Cancer in Hindi | कैंसर के लक्षण | Cancer Symptoms In Hindi | Signs of Cancer In Hindi
 
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Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Healthcareforyou.in/ Website - http://www.healthcareforyou.in/ आयुर्वेद में कैंसर का इलाज - https://youtu.be/p-p8Aari-hY स्तन कैंसर के लक्षण - https://youtu.be/XMCi_hW1zVo महिलाओं में कैंसर के लक्षण - https://youtu.be/u3YHVI3K-X4 पुरुषों में कैंसर के लक्षण - https://youtu.be/kM-Kshao6NE कैंसर के सभी सवालों के जवाब - https://youtu.be/NV5BjJ48j1I कैंसर होने के मुख्य कारण : - * उम्र का ब़ढ़ना * किसी भी प्रकार का इरिटेशन * तम्बाकू का सेवन * विकिरणों का प्रभाव * आनुवांशिकता * शराब का सेवन * इन्फेक्शन * मोटापा डब्ल्यूएचओ द्वारा तय किए लक्षण :- विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ ने इस बीमारी को भयावह माना है और बताया है कि इन लक्षणों से इसे पहचाना जा सकता है। * लंबे समय तक गले में खराश होना। * लगातार खांसी आना। * आहार निगलने में रुकाव होना। * शरीर में गठान पड़ना। * कहीं से भी पानी या रक्त बहाव होना। * त्वचा में मस्सा या तिल में तात्कालिक परिवर्तन। * आवाज बदल जाना। * वजन में गिरावट होना। * बुखार आना। Types of Cancer, Types of Cancer In Hindi, Cancer Types, कैंसर के प्रकार , skin cancer, melanoma, liver cancer , thyroid cancer,bone cancer, brain cancer , cancer , breast cancer , what is cancer, cancer symptoms , symptoms of cancer , signs of cancer , uterine cancer , symptoms of cancer in hindi ,cancer symptoms, lung cancer symptoms , breast cancer symptoms, throat cancer symptoms, symptoms of ovarian cancer, symptoms of lung cancer , symptoms of breast cancer, symptoms of colon cancer , blood cancer symptoms
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Benefits of castor oil in hindi | Castor oil uses in hindi | Castor oil benefits
 
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Benefits of castor oil - अरंडी तेल के फायदे | Castor oil uses in hindi | Castor oil in hindi | Castor oil benefits Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ कैस्टर ऑइल एक तरह का चिपचिपा तेल होता है,जिसके स्वास्थ्य और सुंदरता से जुड़े हुए कई गुण होते हैं। बालों के लिए भी यह काफी औषधि मानी जाती है और बालों के झड़ने, नए बालों के बढ़ने और डैंडरफ (dandruff) को दूर करने में काफी सहायता करता है। अगर आप बालों की मरम्मत के लिए कोई उपाय ढूंढ रहे हैं तो भी कैस्टर ऑइल एक काफी बेहतरीन औषधि है। अगर आप बालों के झड़ने की समस्या से ग्रस्त हैं और ज़्यादा महंगे विकल्पों का प्रयोग नहीं कर सकते, तो भी कैस्टर ऑइल आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होता है। भले ही कैस्टर ऑइल चिपचिपा होता है, यह आपके बालों के लिए कई तरीकों से फायदेमंद साबित होता है। अरण्डी के गुण – अरंडी के तेल के सौंदर्य लाभ (Castor oil beauty benefits) आयु निशान: अरंडी का तेल/एरंड का तेल उम्र निशानों के लिए सबसे अच्छे उपाय है। अरंडी के तेल को उम्र के निशानों पर लगायें हैं और उन पर हल्की मालिश करें। यह उम्र के निशानों पर अच्छी तरह से काम करता है। बाल का पुन:विकास: पुराने दिनों में अरंडी के तेल/कैस्टर ऑयल बालों के तेल के रूप में उपयोग किये जाते थे। लेकिन अब नारियल का तेल उसके स्थान पर उपयोग हो रहा है क्योंकि अरंडी का तेल प्रकृति में मोटा है और इसकी महक खुशबूदार नहीं है। लेकिन अरंडी का तेल बालों के पुन:विकास में मदद करता है। खोपड़ी पर अरंडी के तेल को लगायें। खोपड़ी के बालों पर गर्म अरंडी के तेल का उपयोग करना बेहतर है। एक घंटे के बाद शैंपू से धो डालें। कंडीशनिंग बाल: यह आपके बालों के लिए कंडीशनर के रूप में भी काम करता है अरंडी के तेल में वसा अम्ल होता है जो आपके बालों के लिये कंडिशनर के रूप में भी काम करता है। फटे नाखूनों के लिए अच्छा: अरंडी का तेल/कैस्टर ऑयल नाखून और उंगलियों के पोरों के लिए अच्छा है। नाखूनों और उंगलियों के पोरों पर अरंडी के तेल को रात में लगायें। यह फटे नाखूनों से बचाता है। साफ त्वचा: यह त्वचा की सफाई के रूप में भी काम करता है। स्नान के लिए जाने से पहले अपने शरीर पर अरंडी के तेल को लगायें। इसे 15 मिनट के लिए छोड़ दें। फिर गर्म पानी से नहाना चाहिये। यह शरीर में मृत कोशिकाओं को साफ और आपकी त्वचा को साफ बनाता है और आपको ताज़ा रूप देता है। फटी एड़ियों का इलाज़: हल्के गर्म अरंडी के तेल को रात के समय में फटी एड़ियों पर लगायें। अपनी एड़ियों को धुल डालें। यह फटी एड़ियों के दर्द को हटायेगा। इसका लगातार इलाज फटी एड़ियों को ठीक करता है। शिकन मुक्त त्वचा: शिकन क्षेत्र में अरंडी के तेल को लगायें और त्वचा के द्वारा इसे अवशोषित करने योग्य बनायें। शिकन मुक्त त्वचा पाने के लिए बार-बार इसे दोहरायें। त्वचा तिल हटाने में: अरंडी के तेल के साथ बेकिंग सोडा मिलाएं और त्वचा तिल क्षेत्र पर लगा लें। इसे बार बार अपनी त्वचा तिल पर तब तक लगायें जब तक यह हट न जाये। खिंचाव के निशान का इलाज: अरण्डी का तेल खिंचाव के निशान का भी इलाज करता है। कुछ दिनों तक खिंचाव निशान के क्षेत्र पर अरंडी के तेल को लगायें। वे कुछ दिनों में हल्के हो जायेगे। अच्छा परिणाम प्राप्त करने के लिये इसे एक महीने तक करें। मॉइस्चराइज़र: अरंडी का तेल त्वचा पर मॉइस्चराइज़र के रूप में भी काम करता है।
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Benefits of Guava in Hindi - अमरूद के लाभ | Guava Health Benefits | Guava Benefits
 
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Benefits of Guava - अमरूद के लाभ | Guava Health Benefits | Guava Benefits | Guava Fruit Benefits Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ Benefits of Guava - अमरूद के लाभ अमरुद कैंसर से लड़ने में सक्षम (Guava can fight cancer hai amrood ke gun) अमरुद एंटीऑक्सीडेंटस (anti-oxidants) से भरपूर होता है जो कैंसर तथा शरीर की अन्य असामान्य समस्याओं को ठीक करने में सक्षम होते हैं। इसमें पर्याप्त मात्रा में लाइकोपीन (lycopene) मौजूद होता है, जो प्रोस्टेट (prostate) एवं स्तनों के कैंसर से लड़ने में आपकी मदद करता है। लाइकोपीन के अलावा अमरुद में विटामिन सी, फ़्लवोनोइडस, बीटा कैरोटिन, क्रिप्टोज़न्थिन और लूटेन (beta-carotene, cryptoxanthin and lutein) भी मौजूद होता है जो फ्री रेडिकल्स (free radicals) से लड़कर आपको कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है। ये एंटीऑक्सीडेंटस कैंसर की कोशिकाओं के ख़त्म होने के ज़िम्मेदार भी बन सकते हैं। अमरुद प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाए (Amrood khane ke fayde it boosts the immunity) अमरुद एक ऐसा फल है जिसमें विटामिन ए और विटामिन सी के साथ अन्य पोषक तत्व भी होते हैं जो आपकी प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करते हैं। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होने से आप सामान्य संक्रमणों से बचे रहते हैं और बीमारियों से रहित जीवन जी पाते हैं। अपने रोजाना के खानपान में 1 अमरुद को शामिल करने पर आप इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि आपकी प्रतिरोधक क्षमता अपने चरम पर है। इससे आप सामान्य सर्दी खांसी और बुखार से दूर रह पाएंगे। दिल के अच्छे स्वास्थ्य के लिए अमरुद (Guava for a better heart health) अमरुद के सेवन से दिल का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। इसमें फाइबर (fiber) की उच्च मात्रा होती है जो शरीर के खराब कोलेस्ट्रोल (cholesterols) को सोखकर अच्छे कोलेस्ट्रोल की मात्रा में इजाफा करते हैं। इस फल में चीनी की मात्रा कम होती है, जिससे शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा नियंत्रित होती है। अमरुद में मौजूद पोटैशियम की उच्च मात्रा से दिल का स्वास्थ्य अच्छा होता है और दिल का दौरा पड़ने की संभावना भी कम हो जाती है। अतः अगर आपको दिल की बीमारी है या फिर आप उच्च रक्तचाप की समस्या से गुज़र रहे हैं तो अपने रोज़ाना के भोजन में अमरुद को शामिल करें। अमरूद के लाभ – हाजमे को सुधारे (Promotes digestive health hai amrood ke faide in hindi) अमरुद में काफी मात्रा में फाइबर होता है जो हाजमे को दुरुस्त रखने में आपकी मदद करता है और कब्ज़ जैसी समस्याओं से छुटकारा दिलाता है। अमरुद के बीज प्राकृतिक लैक्सेटिव (laxative) माने जाते हैं जो हाज़मे की प्रणाली को साफ़ करने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके सेवन से हाजमे की प्रणाली में हुआ संक्रमण भी ठीक होता है। अमरुद में उच्च मात्रा में मौजूद अघुलनशील फाइबर मलाशय से मल की हलचल करवाते हैं और पेट में पोषक तत्वों को समाने में मदद करते हैं। स्वस्थ जीवन के लिए हाजमे का सही होना काफी आवश्यक है और इसके लिए अमरुद काफी अच्छा विकल्प है। मधुमेह का इलाज करे (Amrood ke fayde can treat diabetes) लम्बे समय से दंतकथाओं में अमरुद की पत्तियों से मधुमेह को ठीक करने के बारे में कहा जाता रहा है। शोधों से भी साबित हुआ है कि अमरुद के छिलके और पत्ते शरीर में सुक्रोज तथा माल्टोज़ (sucrose and maltose) को अच्छे से सोखकर रक्त में चीनी की मात्रा को कम करते हैं। जापान में प्राचीन समय से सूखे अमरुद के पत्तों से बनी चाय से मधुमेह के इलाज की कहानी चली आ रही है। विश्व के कई हिस्सों में अमरुद के छिलकों से भी मधुमेह को दूर किया जाता रहा है।एक शोध के अनुसार अमरूद की पत्तियां एल्फा-ग्लूकोसाइडिस एंज़ाइम की क्रिया द्वारा रक्त शर्करा को कम करती है। दूसरी तरफ सुक्रोज़ और लैक्टोज़ को सोखने से शरीर को रोकती है जिससे शुगर का स्तर नियंत्रित रहता है। benefits of guava, guava , guava fruit ,guava health benefits , guava benefits , guava tree , guava juice , guava nutrition , guava leaves ,guava leaf tea ,guava plant, guava fruit benefits , guava leaves benefits , red guava, vitamins in guava , benefits of guava in hindi , अमरूद के लाभ, guava and diabetes, guava weight loss, guava juice benefits
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Home Remedies for White Hair In Hindi - सफ़ेद बाल को काला कैसे करे ? | Cure for White Hair in Hindi
 
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Home Remedies for White Hair - सफ़ेद बाल को काला कैसे करे ? | White hair treatment | White hair solution | Treatment for white hair | Solution for white hair | Cure for white hair Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ बालो को सफ़ेद होने से कैसे बचाए ? 1 - Black tea (चाय की पत्ती) – एक बर्तन में एक ग्लास पानी ले और उसमे 5 से 6 चम्मच चाय की पत्ती डालकर उबाले | इसके बाद उबले हुए पानी से चाय की पत्ती को छान ले और उसका paste तैयार कर ले | उस paste को अपने बालो के जड़ो तक लगा कर रखे | फिर साफ पानी से धो दे | सप्ताह में दो बार ही इस प्रक्रिया का इस्तेमाल करे | 2 - नारियल का तेल और कड़ी पत्ता एक बर्तन मे 4 से 5 चम्मच नारियल का तेल ले और उसमे 10 से 12 पकवान बनाने में use किये जाने वाले कड़ी पत्ता को डाल कर थोड़ी देर गर्म करे | अब उस तेल से अपने सर को massage करे, इससे न केवल आपके बाल काले होंगे बल्कि रुसी की समस्या का इलाजभी होगा. याद रहे तेल बालो के जड़ो तक पहुचना चाहिए | 25 से 30 minute के बाद बाल को साफ पानी से धो दे | 3 - आवला एवं नीबूं का रस - 4 से 5 चम्मच नीबू का रस में 3 चम्मच आवला के powder को मिला दे | उस paste को 1 घंटे के लिए छोड़ दे | उसके बाद बालो में उस paste को लगा कर आधे घंटे के लिए छोड़ दे | फिर ठन्डे पानी से बाल धो ले | सफेद बालों को काला करने के लिए घरेलू उपाय सफेद बालों को काला करने के लिए ब्लैक कॉफी का इस्तेमाल करें ब्लैक कॉफी बगैर किसी साइड इफेक्ट के सफेद बालों से छुटकारा दिलाएगी इसके लिए आप ब्लैक कॉफी को पूरे बालों में अच्छी तरह लगाएं और लगभग आधे घंटे तक इसको लगा रहने दें उसके बाद बिना शैंपू लगाएं अपने बाल अच्छी तरह से धो लें और कुछ हफ्तों तक ऐसा करते रहने से आपके बाल प्राकृतिक रूप से काले होने लगेंगे. बालों को काला करने के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक उपाय आंवले से उपचार है सफ़ेद बालों को काला करने के लिए आंवले का प्रयोग सदियों से किया जा रहा है. सफेद बालों को काला करने के लिए आवले को इस तरह से इस्तेमाल करें सबसे पहले आंवले को पानी में अच्छी तरह उबाल लें और उबालने के बाद उनका पेस्ट बना लें, और इस पेस्ट को अपने बालों की जड़ों में लगाएं और लगभग 30 मिनट तक लगा रहने दें इस तरह आप महीने में कम से कम चार बार करें कुछ ही दिनों में आप देखेंगे कि आपके सफेद बाल प्राकृतिक रूप से काले घने और पहले से कहीं ज्यादा खूबसूरत नजर आने लगे हैं. सफेद बालों के लिए ओट्स का प्रयोग दोस्तों ओट्स का प्रयोग भले ही हम खाने के लिए करते हैं, लेकिन यहां आपको जानकारी के लिए बता दें कि ओट्स में बायोटिन तत्व मौजूद रहते हैं जो आपके सफेद बालों को काला करने में काफी मददगार साबित होते हैं. और इतना ही नहीं इसमें मौजूद बायोटिन तत्व आपके बालों के डैंड्रफ को भी खत्म करता है ओट्स से सफेद बाल काले करने के लिए आप ओट्स को भिगोकर या फिर उबालकर हेयर मास्क के रूप में उसका प्रयोग करें और कुछ ही हफ्तों में आपके बाल प्राकृतिक रूप से काले नजर आने लगते हैं और अगर बालों में डैंड्रफ की समस्या भी है तो जड़ से खत्म हो जाती है. चाय की पत्ती सफेद बालों को काला करने के लिए काफी मददगार साबित होती है चाय की पत्ती से सफेद बाल काले करने के लिए चाय की पत्ती को अच्छी तरह पानी में उबाल लें और फिर इस पानी से बालों को धो लें . यह भले ही अपना काम धीरे धीरे करती है लेकिन यह तरीका पूरी तरह प्राकृतिक है और जी आपके सर में मौजूद एक-एक सफेद बाल को प्राकृतिक रूप से काला कर देती है और इनमें एक अलग ही प्राकृतिक चमक पैदा करती है, आप खुद ताज्जुब करेंगे बालों की रेशमी चमक को देखकर. मेहंदी का इस्तेमाल प्राकृतिक कलर जैसा दीखता है, हफ्ते में एक बार बालों में मेहंदी लगाना लगभग 2 महीने में आपके बाल सफेद से काले नजर आने लगेंगे और इससे भी ज्यादा अच्छी तरह असर दिखाने के लिए आप हिंदी में त्रिफला, शिकाकाई, आंवला, ब्लैक कॉफी इनमे से किसी एक का भी प्रयोग कर सकते हैं ऐसा करने से मेहंदी की असर करने की क्षमता दुगनी हो जाती है. और अगर इनको मिलाने से आपको बालों में थोड़ा रूखापन सा महसूस होता है तो आप मेहंदी को पानी की जगह दही से घोल लें ऐसा करने से आपके बाल कंडीशनर लगाने जैसे मुलायम महसूस होंगे.
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Causes of dark circles under eye - आंखों के नीचे काले घेरे होने के कारण | Reasons of dark circles
 
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Causes of dark circles - आंखों के नीचे काले घेरे होने के कारण | Reasons of dark circles | Dark circles causes Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ आंखों के नीचे काले घेरे होने के कारण- 1.हीमोग्‍लोबिन की कमी जिन महिलाओं में हीमोग्‍लोबिन का स्‍तर 10 से कम होता है उनमें आंखों के नीचे काले घेरे होने की संभावना अधिक होती है। यदि हीमोग्लोबिन का स्तर दवा व आहार से नियंत्रित कर लिया जाए, तो काले घेरे की समस्या स्वयं चली जाती है। 2. कोलेजेन की कमी आंखों के नीचे की त्वचा काफी पतली व संवेदनशील होती है। उम्र के बढ़ने के साथ कोलेजेन के कम बनने के कारण कई बार त्वचा पतली होने लगती है और त्वचा की कसावट खो जाती है। त्वचा के इस तरह पतले हो जाने से आंखों के नीचे लालिमा लिये हुए नीली रक्त वाहिनियां दिखने लगती हैं। त्वचा के नीचे की रक्त वाहिनियां ही काले घेरे की वजह बनती हैं। 3. पिगमेंटेशन के कारण पिगमेंटेशन की समस्या के कारण त्वचा टोन असमान बनाती हैं। और यह असमान रंगत आंखों के नीचे काले घेरों का कारण बनती हैं। 4. एलर्जी एलर्जी के कारण भी समस्या हो सकती है। यह किसी सामग्री या खान-पान की चीज के प्रति रिएक्शन है जो आंख में खारिश पैदा करता है। और आंखों के आस-पास की त्वचा को रगड़ने या खरोंचने से भी डिस्कलरेशन हो जाता है। 5. आनुवांशिक कारणों से आनुवांशिकता कारणों से भी काले घेरे की समस्या हो सकती है। आंखों के नीचे काले घेरे जेनेटिक कारणों से भी हो सकती है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी परिवार में चलती रही हो। चूंकि त्वचा की पारदर्शिता के कारण रक्त वाहिनियां दिखती हैं इनमें होकर गुजरता रक्त इसे नीली आभा प्रदान करता है। अनेक मामलों में त्वचा की यह बनावट आनुवंशिक कारणों से होती है। 6. सन एक्‍सपोजन कई बार यह समस्या सन एक्सपोजर के कारण हो जाती है। सन एक्सपोजर से मैलेनिन के बनने में बढ़ोत्तरी हो जाती है जिससे आंखों के नीचे काले घेरे बन सकते हैं। 7. दवाएं के कारण कुछ दवाएं रक्त वाहिनियों को चौड़ा करती हैं जो डार्क सर्किल्स का कारण बनती हैं। ब्लड प्रेशर और नसल डिकंजेशन ड्रग्स इसके उदाहरण माने जा सकते हैं। 8. आयरन की कमी एनीमिया त्वचा को निस्तेज बनाता है जिससे आपकी त्वचा के नीचे की रक्त वाहिनियां दिखने लगती हैं। 9. नींद की कमी आंखों के नीचे काले घेरे होने का एक बड़ा कारण नींद की कमी भी है। नींद न आने और डिहाईड्रेशन से त्वचा निस्तेज और शिकनयुक्त हो सकती है जिससे आपकी आंखों के नीचे की रक्त वाहिनियां डार्क डिस्कलरेशन के रूप में दिखने लगती हैं। dark circles causes, dark circles , dark circles under eyes, bags under eyes , puffy eyes, how to get rid of dark circles under eyes, eye cream for dark circles, dark eye circles , under eye circles , best eye cream for dark circles , eye bags , dark circles around eyes , how to get rid of bags under eyes , under eye bags , how to remove dark circles , dark circles treatment , how to reduce dark circles
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10 Proven Ways to Keep Your Skin Young and Healthy
 
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10 Proven Ways to Keep Your Skin Young and Healthy | How to get glowing skin | Home remedies for glowing skin | Skin care tips | Tips for glowing skin | Beauty tips Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ 10 Proven Ways to Keep Your Skin Young and Healthy 1. Protect Your Skin from the Sun 2. Wash Your Face Just Once a Day 3. Moisturize within 3 Minutes after Bathing 4. Eat 5 Servings of Fruits and Vegetables Daily 5. Don’t Smoke and Avoid Secondhand Smoke 6. Sleep on Your Back 7. Add Coconut Oil to Your Beauty Routine 8. Shave with Care 9. Practice Facial Yoga 10. Avoid Excessive Scrubbing skin care, skin care products , best skin care products , skin care tips, moisturizer , beauty tips , tips for glowing skin , best skin care products , glowing skin , best skin care , skin care routine , homemade beauty tips , natural skin care , tips for healthy skin , beauty tips for face , beauty tips for glowing skin , natural skin care products , face care tips, how to get glowing skin, how to get clear skin , how to get fair skin
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Benefits of Aloe Vera in Hindi - एलोविरा के लाभ | Aloe Vera Benefits | Benefits of Aloe Vera Juice
 
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Benefits of Aloe Vera - एलोविरा के लाभ | Aloe Vera Benefits | Benefits of Aloe Vera Juice | Use of Aloe Vera | Health Benefits of Aloe Vera | Aloe Vera Juice Benefits Please Subscribe, Share and like. Facebook - https://www.facebook.com/Health-Foryou-1191025424300738/ ऐलोवेरा जूस: स्‍वास्‍थ्‍य की कुंजी 1. डिटॉक्‍स जूस : एलोवेरा जूस एक अच्‍छा डिटॉक्‍सीफिकेशन करने वाला पेय पदार्थ है। हमारे शरीर में कई प्रकार के विषैले तत्‍व होते है जो स्‍कीन को खराब कर देते है और बॉडी सिस्‍टम पर गंदा प्रभाव डालते है। प्रदुषण, जंक फूड, अनहेल्‍दी लाइफ स्‍टाइल और कुछ गंदी आदतें जैसे - स्‍मोकिंग या ड्रिकिंग आदि से बॉडी में विषैले तत्‍व पैदा होते है, अगर आप हर दिन एलोवेरा जूस का सेवन करें तो यह तत्‍व शरीर से खत्‍म हो जाते है और शरीर को जूस के विटामिन और मिनरल्‍स मिलते है जो बॉडी को स्‍वस्‍थ बनाते है। 2. वजन घटाना : हर दिन एक ग्‍लास एलोवेरा जूस पीने से वजन घट जाता है और सही रहता है। इसे पीने से पाचन क्रिया भी दुरूस्‍त रहती है। एलोवेरा जूस में कई पोषक तत्‍व होते है जो शरीर का कमजोर नहीं होने देते है। इसे पीने से हर पल खाने और मंचिंग करने की आदत भी दूर हो जाती है। 3. दांतों के लिए लाभकारी : एलोवेरा जूस में एंटी - माइक्रोवाइल प्रॉपर्टी होती है जो दांतों को साफ और जर्मफ्री रखता है। एलोवेरा जूस को माउथ फ्रेशनर के तौर पर भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है। एलोवेरा के जूस को मुंह में भरने से छाले और बहने वाले खून को भी रोका जा सकता है। इस प्रकार, एलोवेरा जूस, दांतों की समस्‍या के लिए लाभकारी होता है। 4. एनर्जी बूस्‍टर : एलोवेरा जूस एक प्रकार का एनर्जी ड्रिंक होता है जिसे हर दिन पीने से एनर्जी आती है। एलोवेरा जूस में कई पोषण तत्‍व, विटामिन और मिनरल्‍स होते है जो बॉडी सिस्‍टम को इम्‍प्रुव करते है और उसे एनर्जी देते है। इसे पीने से शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता भी बढ़ जाती है। 5. हेल्‍दी स्‍कीन और हेयर : एलोवेरा जूस के सेवन से खराब त्‍वचा सही हो जाती है और उसमें निखार आ जाता है। एलोवेरा जूस के नियमित सेवन से स्‍कीन हमेशा यंग और ब्राइटर लगती है। ऐसा ही बालों के साथ होता है। एलोवेरा जूस को पीने से बालों में शाइन आती है, रूसी दूर हो जाती है और टेक्‍सचर भी अच्‍छा हो जाता है। यह एलोवेरा जूस के कुछ मुख्‍य फायदे हैं। benefits of aloe vera, aloe vera , aloe vera juice, aloe vera gel , aloe vera uses, aloe vera benefits, aloe vera drink , aloe vera juice benefits , aloe vera plant , aloe juice , aloe vera gelly , benefits of aloe vera juice , uses of aloe vera , aloe vera water , pure aloe vera gel , aloe vera juice side effects , aloe plant , aloe vera gel benefits , health benefits of aloe vera ,best aloe vera juice , aloe vera gel uses , use of aloe vera
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